RAC-MBC Dikshant Parade: कुल्लू में 472 नव आरक्षियों का पासिंग आउट समारोह संपन्न
कुल्लू के शमशी प्रशिक्षण केंद्र में आरएसी और एमबीसी के जवानों की दीक्षांत परेड आयोजित हुई, जहां उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले आरक्षियों को पुरस्कृत किया गया।
कुल्लू के शमशी एसएसबी केंद्र में आरएसी और एमबीसी के 472 नव आरक्षियों के दीक्षांत समारोह के दौरान परेड का आयोजन।
राजस्थान सशस्त्र कांस्टेबुलरी (आरएसी) और मेवाड़ भील कोर (एमबीसी) के 472 नव आरक्षियों की दीक्षांत परेड हिमाचल प्रदेश के कुल्लू स्थित सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के शमशी प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित हुई। अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस (प्रशिक्षण) राघवेंद्र सुहास ने परेड की सलामी ली। इस दौरान नव आरक्षियों ने अनुशासन और प्रशिक्षण कौशल का प्रदर्शन करते हुए राजस्थान और हिमाचल प्रदेश से आए सैकड़ों दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया।
दीक्षांत परेड में 472 कांस्टेबलों ने पूरे उत्साह के साथ हिस्सा लिया। परेड के बाद नव आरक्षियों ने योगाभ्यास, दंगा नियंत्रण, जूडो और आतंक विरोधी कार्रवाई का प्रदर्शन किया। इन गतिविधियों के माध्यम से प्रशिक्षण के दौरान सीखे गए कौशल का प्रदर्शन किया गया। सशस्त्र सीमा बल के उप महानिरीक्षक अजय कुमार ने समारोह में पहुंचे सभी मेहमानों का स्वागत किया।
समारोह में परेड कमांडर जयपाल सिंह चौहान, सभी प्लाटून कमांडर, अनुदेशकों और विभिन्न गतिविधियों में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विजेताओं को पुरस्कृत किया गया। मुकेश कुमार को सर्वश्रेष्ठ नव आरक्षी यानी ओवरऑल बेस्ट के खिताब से सम्मानित किया गया। वहीं, सुरेन्द्र बिड़ियासर को बेस्ट इंडोर नव आरक्षी, हरीश कुमार को बेस्ट आउटडोर, सवान खान को बेस्ट फायरर तथा जयपाल चौहान को बेस्ट इन ड्रिल एवं टर्नआउट का पुरस्कार प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण में उत्कृष्ट योगदान देने वाले प्रशिक्षकों को भी सम्मानित किया गया। कंपनी कमांडर विजयपाल को बेस्ट इंडोर प्रशिक्षक, इंस्पेक्टर (जीडी) प्रकाश कुमार तिवारी को बेस्ट आउटडोर प्रशिक्षक और सेवानिवृत्त असिस्टेंट कमांडेंट जिया लाल को ओवरऑल बेस्ट प्रशिक्षक का पुरस्कार दिया गया।
दीक्षांत समारोह के अवसर पर शाम को सांस्कृतिक संध्या और बड़े खाने का आयोजन भी किया गया। प्रशिक्षण पूरा करने वाले नव आरक्षियों के लिए यह अवसर गौरव और उपलब्धि का प्रतीक रहा। शमशी प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित इस परेड के साथ आरएसी और एमबीसी के 472 जवानों ने अपने कठोर प्रशिक्षण, अनुशासन और पुलिस सेवा के प्रति समर्पण का परिचय दिया।