जयपुर: गुप्त वृन्दावन धाम में नरसिम्हा चतुर्दशी पर विशेष यज्ञ का आयोजन

नरसिम्हा चतुर्दशी पर तीन दिवसीय कथा का समापन हुआ और श्री श्री कृष्ण बलराम का भव्य चन्दन अलंकार कर विघ्न विनाशक यज्ञ में आहुतियां दी गईं।

Update: 2026-05-01 08:02 GMT

जयपुर के गुप्त वृन्दावन धाम में नरसिम्हा चतुर्दशी के अवसर पर आयोजित यज्ञ और कथा कार्यक्रम में भगवान का आशीर्वाद लेने पहुंचे भारी संख्या में श्रद्धालु।

अधर्म के विनाश और धर्म की स्थापना हेतु सतयुग में अवतरित हुए भगवान् नरसिम्हा का प्राकट्य दिवस 'नरसिम्हा चतुर्दशी' जयपुर के गुप्त वृन्दावन धाम में पूर्ण श्रद्धा और भव्यता के साथ मनाया गया। ३० अप्रैल को आयोजित इस पावन पर्व पर मंदिर परिसर में 'विघ्न विनाशक नरसिम्हा यज्ञ' का विशेष आयोजन हुआ, जिसमें भारी संख्या में उमड़े भक्तों ने अपने जीवन के संकटों के निवारण हेतु आहुतियां दीं। भक्तों के दुखों का अंत करने वाले और अपने परम भक्त प्रहलाद की रक्षा के लिए स्तंभ से प्रकट होने वाले भगवान् नरसिम्हा के इस जन्मोत्सव ने संपूर्ण वातावरण को भक्तिमय कर दिया।

 




उत्सव के मुख्य आकर्षण के रूप में श्री श्री कृष्ण बलराम का विशेष चन्दन अलंकार किया गया, जिसकी अलौकिक आभा देखते ही बन रही थी। पूरे मंदिर परिसर को विदेशी और सुगंधित फूलों से अत्यंत सुंदर ढंग से सजाया गया था। इस अवसर पर विगत तीन दिनों से चल रही 'नरसिम्हा कथा' का भी समापन हुआ, जिसमें भगवान् की दिव्य लीलाओं का विस्तार से वर्णन कर श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया गया। गुप्त वृन्दावन धाम के अध्यक्ष श्री अमितासना दास ने आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि भगवान् नरसिम्हा का प्राकट्य सूर्यास्त के समय हुआ था, यही कारण है कि इस विशेष कालखंड में उनकी पूजा-अर्चना का सर्वाधिक विधान है। शास्त्रोक्त मान्यताओं के अनुसार, जो भी भक्त इस दिन विधि-विधान से पूजन और व्रत का पालन करते हैं, उन्हें अक्षय फल की प्राप्ति होती है और अंततः वैकुण्ठ लोक में स्थान प्राप्त होता है। शाम ढलते ही जब महाआरती हुई, तो समूचा शहर भगवान् के जयकारों से गुंजायमान हो उठा, जिससे इस आयोजन ने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गरिमा के नए आयाम स्थापित किए।

Similar News