मदन राठौड़ का कांग्रेस पर हमला, बोले- वोट चोरी के खिलाफ आंदोलन राजनीतिक पाखंड
मदन राठौड़ ने कांग्रेस के प्रदर्शन को फ्लॉप बताते हुए कहा कि पार्टी नेताओं ने सोशल मीडिया पर भ्रामक तस्वीरें साझा कर जनता को गुमराह करने की कोशिश की है।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष मदन राठौड़ ने कांग्रेस के वोट चोरी के आरोपों को लेकर किए जा रहे आंदोलन पर निशाना साधते हुए इसे राजनीतिक पाखंड करार दिया है। उन्होंने कहा कि वोट चोरी के आरोपों से घिरी कांग्रेस आज खुद वोट चोरी के खिलाफ आंदोलन करने का ढोंग कर रही है। कांग्रेस के लोकतंत्र मॉडल में मतपत्रों की चोरी शामिल है। हाल ही में जोधपुर जिले की बिलाड़ा पंचायत समिति के भावी ग्राम पंचायत क्षेत्र में एनएसयूआई नेता सुनील चौधरी पर मतपत्र चोरी कर मतदान केंद्र से बाहर ले जाने और अपने प्रत्याशी के पक्ष में मुहर लगाने का मामला सामने आया है। आरोपित चौधरी अशोक गहलोत का नजदीकी व्यक्ति है। लोकतंत्र की बार-बार दुहाई देने वाले गहलोत को जवाब देना चाहिए कि क्या वह इसी तरह का लोकतंत्र मॉडल पूरे देश में लागू करना चाहते हैं।
जयपुर में 2 नवंबर 2026 को जारी बयान में मदन राठौड़ ने कहा कि कांग्रेस का इतिहास लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं के दुरुपयोग और जनादेश के अपमान से भरा रहा है। ऐसे में कांग्रेस नेताओं को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने अतीत और वर्तमान के कारनामों पर आत्ममंथन करना चाहिए। गांधी परिवार से लेकर कांग्रेस के विभिन्न नेताओं पर समय-समय पर लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं को लेकर सवाल उठते रहे हैं।
राठौड़ ने कहा कि भावी पंचायत का मामला चुनावी प्रक्रिया की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। कांग्रेस को इस मामले में जवाबदेही तय करनी चाहिए, न कि वोट चोरी के नाम पर राजनीतिक नौटंकी कर जनता का ध्यान वास्तविक मुद्दों से भटकाना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस आज लोकतंत्र की रक्षा का दावा कर रही है, जबकि देश का इतिहास गवाह है कि इसी पार्टी ने संविधान के अनुच्छेद 356 का 93 बार इस्तेमाल कर राज्य सरकारों को बर्खास्त किया। यह लोकतांत्रिक जनादेश और संघीय व्यवस्था के सम्मान पर गंभीर सवाल खड़े करता है। लंबे समय तक सत्ता में रहते हुए लोकतांत्रिक संस्थाओं का राजनीतिक इस्तेमाल करने वाली पार्टी का आज लोकतंत्र का सबसे बड़ा हितैषी बनने का प्रयास जनता को भ्रमित करने वाला है।
कांग्रेस के रामलीला मैदान में आयोजित प्रदर्शन पर निशाना साधते हुए भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि कांग्रेस की रैली और प्रदर्शन पूरी तरह फ्लॉप साबित हुआ। मंच से नेताओं के भाषण जारी थे, लेकिन सामने कुर्सियां खाली पड़ी थीं। यह कांग्रेस के प्रति जनता की घटती रुचि और उसके राजनीतिक एजेंडे से लोगों की दूरी को दर्शाता है। जब जनता प्रदर्शन में शामिल होने नहीं पहुंची तो पार्टी नेताओं ने सोशल मीडिया पर तस्वीरों के जरिए भीड़ दिखाने का सहारा लिया।
राठौड़ ने आरोप लगाया कि राजस्थान के पूर्व कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने सोशल मीडिया पर प्रयागराज में उमड़ी भीड़ की तस्वीर साझा कर उसे कांग्रेस के प्रदर्शन से जोड़कर प्रस्तुत करने का प्रयास किया। उन्होंने कहा कि किसी दूसरे स्थान की तस्वीरों के जरिए अपने प्रदर्शन को सफल दिखाने की कोशिश कांग्रेस की राजनीतिक हताशा उजागर करती है। उन्होंने सवाल उठाया कि तीन बार मुख्यमंत्री रह चुके कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत को दिल्ली प्रदर्शन में किस कारण और किसके कहने पर साइडलाइन किया गया। राठौड़ ने कहा कि जनता सब देख रही है और सोशल मीडिया पर इस तरह के प्रयासों से सच्चाई नहीं छिपाई जा सकती।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने सोशल मीडिया पर भ्रामक तस्वीरें और गलत जानकारियां प्रसारित करने पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि आज सोशल मीडिया का दौर है, जहां कोई भी जानकारी पलक झपकते ही लाखों लोगों तक पहुंच जाती है। ऐसे में किसी भी जानकारी को साझा करने से पहले उसकी सटीकता, प्रमाणिकता और तथ्यों की सत्यता की जांच करना जरूरी है। केवल राजनीतिक लाभ के उद्देश्य से भ्रामक तस्वीरें और गलत जानकारियां प्रसारित करना जनता को गुमराह करने का प्रयास है। सोशल मीडिया का इस्तेमाल जनजागरण और सही जानकारी पहुंचाने के लिए होना चाहिए, न कि झूठे प्रचार और भ्रम फैलाने के लिए। उन्होंने कहा कि जनता जागरूक है और तथ्यों तथा वास्तविकता के आधार पर सच्चाई समझने में सक्षम है।
राठौड़ ने कहा कि यदि कांग्रेस को लोकतंत्र और चुनावी पारदर्शिता की चिंता है तो उसे सबसे पहले अपने नेताओं से जुड़े आरोपों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए। केवल नारेबाजी, प्रदर्शन और भ्रामक तस्वीरों के सहारे जनता का विश्वास नहीं जीता जा सकता। लोकतंत्र की मजबूती के लिए निष्पक्ष चुनाव, पारदर्शिता और राजनीतिक जवाबदेही जरूरी हैं। कांग्रेस को दोहरे मापदंड छोड़कर वास्तविक मुद्दों पर जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि जनता अब आरोपों की राजनीति के बजाय तथ्यों, पारदर्शिता और जवाबदेही की अपेक्षा करती है।