राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने RUHS के 11वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया

राज्यपाल ने विश्वविद्यालय के डिजिटल पोर्टल का शुभारंभ किया और नई शिक्षा नीति 2020 को भारतीय गौरव व कौशल विकास से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण कड़ी बताया।

Update: 2026-04-24 14:27 GMT

जयपुर में राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (RUHS) के 11वें दीक्षांत समारोह के दौरान मंच से संबोधित करते राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे।

राज्यपाल एवं कुलाधिपति श्री हरिभाऊ बागडे ने स्वर्णिम भारत के निर्माण के लिए सामूहिक प्रयासों का आह्वान करते हुए कहा कि शिक्षा और उपाधियों की सार्थकता तभी है जब राष्ट्र को सर्वोपरि रखकर कार्य किया जाए। उन्होंने विद्यार्थियों से सकारात्मक मनःस्थिति के साथ देश और समाज के समग्र विकास में योगदान देने का आह्वान किया।

श्री बागडे राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय के ग्यारहवें दीक्षांत समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने विश्वविद्यालय द्वारा समस्त अभ्यर्थियों के शैक्षणिक रिकॉर्ड को डिजिटलाइज करने के प्रयासों के अंतर्गत पोर्टल पर डिग्रियों को अपलोड करने की प्रक्रिया का शुभारंभ किया। उन्होंने इसे महत्वपूर्ण पहल बताते हुए केंद्र और राज्य सरकार के डिजिटल अभियान की सराहना की।

राज्यपाल ने कहा कि दीक्षांत समारोह विद्यार्थी जीवन का नया आरम्भ होता है। उन्होंने प्राचीन गुरुकुल परंपरा का उल्लेख करते हुए समावर्तन संस्कार को आज के दीक्षांत समारोह का स्वरूप बताया। उन्होंने मैकाले द्वारा लागू अंग्रेजी शिक्षा पद्धति की आलोचना करते हुए कहा कि इसने भारतीयों को उनके इतिहास से अलग कर दिया। उन्होंने नई शिक्षा नीति 2020 को भारत के महान गौरव से जोड़ने वाली नीति बताया।

अपने संबोधन में उन्होंने भारत की वैज्ञानिक और ऐतिहासिक उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत ने विश्व को शून्य का ज्ञान दिया, जिससे गणना की शुरुआत संभव हुई। उन्होंने खगोल विज्ञान में भारत के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि भास्कराचार्य ने 1150 में पृथ्वी के गोल होने की जानकारी दी और गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांत को प्रतिपादित किया, जिसे बाद में न्यूटन से जोड़ा गया। उन्होंने बप्पा रावल का उल्लेख करते हुए कहा कि उन्होंने सातवीं शताब्दी में अरबों को खदेड़ा और उनके नाम पर पाकिस्तान का रावलपिंडी शहर बसा।

राज्यपाल ने कहा कि आजादी से पहले देश में आठ लाख गुरुकुल थे, जिन्हें अंग्रेजों ने नष्ट किया। उन्होंने आरोप लगाया कि अंग्रेजों ने भारतीय दृष्टिकोण की शिक्षा को समाप्त कर गुलाम मानसिकता विकसित की और घरेलू उद्योगों को बंद कर नागरिकों को आर्थिक रूप से कमजोर किया। उन्होंने कहा कि नई शिक्षा नीति में कौशल विकास पर जोर देकर आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का लक्ष्य रखा गया है।

इससे पूर्व उन्होंने युवाओं को नशे से दूर रहने का संदेश देते हुए कहा कि पड़ोसी देश नशे के व्यापार के माध्यम से भारत के युवाओं को कमजोर करना चाहता है। उन्होंने कहा कि नशा व्यक्ति को समय से पहले बूढ़ा बना देता है।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय को एम्स की तर्ज पर देश का सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा संस्थान बनाया जाएगा। उन्होंने प्रदेश को मेडिकल टूरिज्म के रूप में विकसित करने के प्रयासों की जानकारी दी और मुख्यमंत्री आरोग्य आयुष्मान योजना को देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना बताया। उन्होंने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के प्रयासों को महत्वपूर्ण बताया।

समारोह में देश के सुप्रसिद्ध नेत्र चिकित्सक डॉ. विकास महात्मे ने दीक्षांत व्याख्यान देते हुए चिकित्सा शिक्षा में व्यावहारिक कौशल विकास की आवश्यकता पर बल दिया। कुलगुरु प्रो. प्रमोद येवले ने विश्वविद्यालय के नवाचारों और शैक्षिक उन्नयन की जानकारी दी। राज्यपाल ने इस अवसर पर विद्यार्थियों को डिग्री और पदक प्रदान किए।

यह दीक्षांत समारोह न केवल विद्यार्थियों के लिए नई शुरुआत का प्रतीक बना, बल्कि शिक्षा, कौशल और राष्ट्र निर्माण के समन्वय का सशक्त संदेश भी प्रदान कर गया।

Similar News