राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में औषधि वितरण पर भारत-ब्रिटेन कार्यशाला
स्पार्क योजना के तहत आयोजित इस कार्यशाला में 20 संस्थानों के 125 से अधिक शोधकर्ता एआई और कम्प्यूटेशनल तकनीकों के उपयोग पर चर्चा कर रहे हैं।
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में औषधि वितरण पर भारत-ब्रिटेन कार्यशाला का शुभारंभ हुआ।
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय में औषधि वितरण के क्षेत्र में कम्प्यूटेशनल तकनीकों की संभावनाओं और उनके प्रभावी उपयोग पर भारत और ब्रिटेन के विशेषज्ञों ने चर्चा शुरू की है। विश्वविद्यालय के फार्मेसी विभाग की ओर से 23 अक्टूबर 2026 को “औषधि वितरण में कम्प्यूटेशनल दृष्टिकोण: आवश्यकता एवं संभावनाएँ” विषय पर दो दिवसीय भारत-ब्रिटेन सहयोगात्मक संयुक्त कार्यशाला का शुभारंभ किया गया। इसमें भारत के सात राज्यों के 20 संस्थानों से 125 से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए। कार्यशाला का आयोजन यूनाइटेड किंगडम के ब्रैडफोर्ड विश्वविद्यालय के सहयोग से किया जा रहा है। यह कार्यक्रम शिक्षा मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा वित्तपोषित शैक्षणिक एवं अनुसंधान सहयोग संवर्धन योजना (SPARC) के अंतर्गत आयोजित किया जा रहा है।
उद्घाटन सत्र में राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. आनंद भालेराव ने विश्वविद्यालय की उल्लेखनीय प्रगति पर प्रकाश डालते हुए अपना दृष्टिकोण साझा किया। उन्होंने कहा कि उनका लक्ष्य विश्वविद्यालय को ऐसा संस्थान बनाना है, जिसका अनुसंधान आम नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने में सार्थक योगदान दे। उन्होंने वर्तमान अनुसंधान परिदृश्य में कार्यशाला के विषय की प्रासंगिकता रेखांकित करते हुए औषधि वितरण में कम्प्यूटेशनल दृष्टिकोण को वैज्ञानिक अनुसंधान का महत्वपूर्ण और समसामयिक क्षेत्र बताया। उन्होंने शोधकर्ताओं को समाज के कल्याण के लिए इन तकनीकों की संभावनाओं का अन्वेषण करने और उनका उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया। साथ ही, कार्यशाला के सफल आयोजन के लिए आयोजकों को शुभकामनाएं दीं।
कार्यक्रम की मुख्य अतिथि और राष्ट्रीय औषधीय शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (NIPER), रायबरेली की निदेशक प्रो. शुभिनी ए. सराफ ने शोधार्थियों और विद्यार्थियों को आलोचनात्मक चिंतन विकसित करने तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और कम्प्यूटेशनल उपकरणों के प्रति संतुलित दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने जोर दिया कि शोधकर्ताओं को AI से प्राप्त परिणामों पर आंख मूंदकर भरोसा नहीं करना चाहिए। इन उपकरणों का प्रभावी और जिम्मेदार उपयोग करने के लिए आवश्यक ज्ञान तथा विशेषज्ञता हासिल करना जरूरी है। उन्होंने रोगियों के स्वास्थ्य और उपचार के परिणामों में सुधार के लिए किफायती दवाओं के विकास के महत्व को भी रेखांकित किया। इसके साथ ही प्रतिभागियों को लगातार नए कौशल सीखने और उन्हें अपने अनुसंधान कार्यों में शामिल करने के लिए प्रोत्साहित किया, ताकि औषधि विज्ञान के क्षेत्र में उभरती चुनौतियों का सामना किया जा सके।
कार्यशाला में यूनाइटेड किंगडम के ब्रैडफोर्ड विश्वविद्यालय से डॉ. मुहम्मद वहाजुद्दीन ने भी सहभागिता की। सूरत स्थित सरदार वल्लभभाई राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (SVNIT) से डॉ. नावेद मलिक विशेषज्ञ के रूप में शामिल हुए। ब्रैडफोर्ड विश्वविद्यालय की डॉ. अमालिया रुइज़ और डॉ. विभु झा ने वर्चुअल माध्यम से भाग लिया। उनकी सहभागिता भारत और ब्रिटेन के बीच शैक्षणिक सहयोग को दर्शाती है। उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान कार्यशाला की कार्यपुस्तिका का विमोचन भी किया गया।
इस दो दिवसीय कार्यशाला का उद्देश्य अंतर्विषयक अधिगम को बढ़ावा देना, अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान सहयोग मजबूत करना और औषधीय अनुसंधान तथा औषधि वितरण के क्षेत्र में कम्प्यूटेशनल दृष्टिकोण की संभावनाओं का अन्वेषण करना है। विभिन्न संस्थानों के विशेषज्ञों और प्रतिभागियों को एक मंच पर लाकर ज्ञान के आदान-प्रदान को सुगम बनाने, उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने तथा नवोन्मेषी, किफायती और रोगी-केंद्रित औषधीय अनुसंधान के अवसरों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।
सात राज्यों के 20 संस्थानों से 125 से अधिक प्रतिभागियों की भागीदारी औषधीय विज्ञान में कम्प्यूटेशनल दृष्टिकोण और सहयोगात्मक अनुसंधान के प्रति बढ़ती रुचि को दर्शाती है। कार्यशाला के आगामी सत्रों में विशेषज्ञ व्याख्यान, व्यावहारिक प्रशिक्षण और ज्ञान-साझाकरण सत्र आयोजित किए जाएंगे। इनमें औषधि वितरण अनुसंधान में कम्प्यूटेशनल उपकरणों की बदलती भूमिका, उनकी उपयोगिता और भविष्य की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।