बाड़मेर दुष्कर्म मामला: दोषी को अंतिम सांस तक उम्रकैद
पॉक्सो कोर्ट ने महज तीन महीने में फैसला सुनाते हुए अभियुक्त को 1.75 लाख रुपये के अर्थदंड से भी दंडित किया है।
बाड़मेर में पॉक्सो कोर्ट द्वारा दुष्कर्म के दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है।
बाड़मेर में 7 वर्षीय नाबालिग बालिका से दुष्कर्म के मामले में न्यायालय ने आरोपी को अंतिम सांस तक आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विशिष्ट न्यायाधीश पॉक्सो कोर्ट बाड़मेर श्री अजिताभ आचार्य ने दोषी मगसिंह पुत्र तेजसिंह निवासी इन्द्रा नगर को आजीवन कारावास के साथ 1 लाख 75 हजार रुपये के अर्थदण्ड से दण्डित किया। केस ऑफिसर स्कीम के तहत पुलिस की त्वरित कार्रवाई और अभियोजन पक्ष की प्रभावी पैरवी के चलते इस गंभीर मामले का ट्रायल महज तीन माह में पूरा हुआ।
जिला पुलिस अधीक्षक चूनाराम जाट ने बताया कि 19 जुलाई 2026 को दोपहर 3 से 4 बजे के बीच 7 वर्षीय बालिका अपने घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान आरोपी मग सिंह उसे बहला-फुसलाकर झाड़ियों में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म किया। घटना की रिपोर्ट मिलने पर महिला थाना बाड़मेर में मामला दर्ज किया गया।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नितेश आर्य के नेतृत्व में तत्कालीन महिला थाना थानाधिकारी देवीचन्द ढाका और कोतवाली थानाधिकारी मनोज कुमार की टीमों का गठन किया गया। पुलिस को आरोपी की तलाश कर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। पुलिस टीमों ने तेजी से कार्रवाई करते हुए घटना के मात्र दो घंटे के भीतर आरोपी को दस्तयाब कर गिरफ्तार कर लिया।
जिला पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर अनुसंधान अधिकारी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नितेश आर्य ने मामले का अनुसंधान निर्धारित समय में पूरा किया। आरोपी की गिरफ्तारी के महज 14 दिन के भीतर उसके खिलाफ न्यायालय में चालान पेश कर दिया गया।
जघन्य एवं गंभीर प्रकृति का मामला होने के कारण पुलिस मुख्यालय राजस्थान, जयपुर के निर्देशानुसार इसे केस ऑफिसर स्कीम में शामिल किया गया। महिला थाना थानाधिकारी सरिता विश्नोई को प्रकरण का केस ऑफिसर नियुक्त किया गया। प्रकरण के पर्यवेक्षण के दौरान नियत पेशियों पर न्यायालय में उपस्थित रहकर गवाहों के बयान अभियोजन पक्ष के अनुरूप करवाने और संबंधित साक्ष्य समय पर न्यायालय में प्रस्तुत करवाने के प्रयास किए गए।
सरकार की ओर से विशिष्ट लोक अभियोजक श्री दामोदर चौधरी ने मामले में प्रभावी पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने न्यायालय में 20 गवाहों के बयान करवाए तथा 44 दस्तावेज और 18 आर्टिकल साक्ष्य के रूप में प्रस्तुत किए। प्रभावी अनुसंधान और सुनियोजित अभियोजन पैरवी के परिणामस्वरूप घटना के मात्र तीन माह में ट्रायल पूरा हुआ। इसके बाद 03 नवम्बर 2026 को न्यायालय ने आरोपी मगसिंह को दोषी ठहराते हुए अंतिम सांस तक आजीवन कारावास और 1,75,000 रुपये के अर्थदण्ड की सजा सुनाई।
इस प्रकरण में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नितेश आर्य (अनुसंधान अधिकारी), तत्कालीन महिला थाना थानाधिकारी देवीचन्द ढाका, महिला थाना थानाधिकारी एवं केस ऑफिसर सरिता विश्नोई, महिला सेल के सहायक उपनिरीक्षक हरदानराम, महिला थाना के सहायक उपनिरीक्षक हर्षाराम एवं बबरी, कोर्ट एलसी महिला थाना के कांस्टेबल हिंगलाजदान तथा महिला सेल बाड़मेर के कांस्टेबल विक्रमसिंह की विशेष भूमिका रही। घटना के दो घंटे में गिरफ्तारी, 14 दिन में चालान और तीन माह में सुनवाई पूरी होने के बाद आया यह फैसला त्वरित न्यायिक प्रक्रिया का महत्वपूर्ण उदाहरण है।