तस्वीर में जयपुर के श्री अमरापुर स्थान में आयोजित धार्मिक अनुष्ठान के दौरान मंच पर बैठे संत और सामने बैठे श्रद्धालु नजर आ रहे हैं।

जयपुर स्थित आस्था, भक्ति और श्रद्धा के पावन केंद्र श्री अमरापुर स्थान में सतगुरु स्वामी शांति प्रकाश जी महाराज के पंच दिवसीय 120वें पावन जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में भक्ति और सत्संग का विशाल आयोजन हुआ। इस अवसर पर पंच दिवसीय जयपुर प्रवास पर पधारे हाजरा हजूर पूज्य गुरुदेव सतगुरु स्वामी भगत प्रकाश जी महाराज की अमोलक वाणी में श्रद्धालुओं ने भक्ति का रसपान किया।

पूज्य गुरुदेव स्वामी भगत प्रकाश जी महाराज ने अपनी अमोलक वाणी में कहा कि संत महापुरुषों का जन्म परमार्थ सेवा के लिए होता है। जीव कल्याण के लिए संत-महात्मा अपना पूरा जीवन समर्पित कर देते हैं।

इस अवसर पर सतगुरु स्वामी शांति प्रकाश जी महाराज के स्वरूप का गुणगान करते हुए कहा गया—

“परम प्रेम के पुंज है

परम मनोहर रूप!

सतगुरु शांति प्रकाश जी

माधुरी मधुर स्वरूप!”

संत-महात्माओं को हरि का प्यारा बताते हुए कहा गया कि वे जीवों का कल्याण करते-करते स्वयं हरि रूप हो जाते हैं।

पंच दिवसीय जन्मोत्सव का समापन 28 अगस्त शुक्रवार को रक्षाबंधन के शुभ अवसर पर श्री प्रेम प्रकाश ग्रंथ और गीता जी के पाठों के भोग परायण तथा विशाल आम भंडारे के साथ होगा।

जन्मोत्सव के दौरान सेवा संकल्प कार्यों के अंतर्गत मांग्यवास स्थित सतगुरु टेऊँराम गौशाला में गौ माता को हरा चारा, फल आदि खिलाकर सेवा की गई। इसके साथ ही आश्रय होम अनाथालय में अनाथ बच्चों के साथ भक्ति भाव किया गया और फल, बिस्कुट, उपहार आदि सेवा कार्य किए गए।

श्री अमरापुर स्थान जयपुर में आयोजित यह पंच दिवसीय जन्मोत्सव भक्ति, सत्संग और सेवा संकल्प के विभिन्न आयोजनों के साथ आगे बढ़ रहा है, जिसका समापन 28 अगस्त को भोग परायण और विशाल आम भंडारे के साथ होगा।

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