मालीगांव। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे को नया महाप्रबंधक मिल गया है। 1989 बैच के भारतीय रेलवे यांत्रिक इंजीनियरिंग सेवा (आईआरएसएमई) के अधिकारी श्री विवेक खरे ने 1 नवंबर, 2026 को पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के महाप्रबंधक का कार्यभार संभाल लिया। इस पद पर वह पूरे पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के कार्यकारी प्रमुख के रूप में जिम्मेदारी निभाएंगे।

भारतीय रेल के 18 भौगोलिक जोनों में शामिल पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे सबसे बड़े और चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में से एक है। इसका विस्तार 10 राज्यों और 36 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों तक है। इसके कार्यक्षेत्र में असम, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, अरुणाचल प्रदेश, मेघालय और सिक्किम के साथ पश्चिम बंगाल तथा बिहार के कुछ हिस्से शामिल हैं।

श्री विवेक खरे को रेलवे परिचालन, रखरखाव, कार्यक्षमता में सुधार और आधुनिकीकरण के क्षेत्र में तीन दशक से अधिक का अनुभव है। उन्होंने देश के विभिन्न राज्यों और रेलवे जोनों में अपनी सेवाएं दी हैं। महाप्रबंधक का पद संभालने से पहले वह रायबरेली स्थित मॉडर्न कोच फैक्ट्री (एमसीएफ) में प्रधान मुख्य यांत्रिक इंजीनियर के पद पर कार्यरत थे। इससे पहले मार्च 2026 के दौरान उन्होंने कुछ समय के लिए एमसीएफ, रायबरेली के महाप्रबंधक का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला था।

श्री खरे ने 3 मार्च 1991 को दक्षिण मध्य रेलवे में अपनी सेवाएं शुरू की थीं। इस दौरान उन्होंने सिकंदराबाद और विजयवाड़ा में काम किया। इसके अलावा दक्षिण मध्य रेलवे के लालागुड़ा कारखाने और उत्तर रेलवे के तुगलकाबाद डीजल शेड में भी विभिन्न जिम्मेदारियां निभाईं।

वर्ष 2000 से 2005 के बीच राइट्स में प्रतिनियुक्ति के दौरान उन्होंने उप महाप्रबंधक और अपर महाप्रबंधक के रूप में कार्य किया। इस अवधि में उन्होंने भारत और बांग्लादेश में कई प्रमुख बुनियादी ढांचागत परियोजनाओं की जिम्मेदारी संभाली।

इसके बाद वर्ष 2013 तक लखनऊ स्थित अनुसंधान अभिकल्प एवं मानक संगठन (आरडीएसओ) में निदेशक के रूप में उन्होंने महत्वपूर्ण रेलवे प्रणालियों से जुड़ी कई शोध पहलों, डिजाइन मानकीकरण और तकनीकी सुधारों में अहम भूमिका निभाई।

दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत रायपुर में अपर मंडल रेल प्रबंधक (एडीआरएम) के रूप में कार्य करते हुए उन्होंने ट्रेन परिचालन में सुधार के लिए योगदान दिया। वहीं, लखनऊ के चारबाग कारखाने में मुख्य कारखाना प्रबंधक के पद पर रहते हुए आधुनिकीकरण कार्यों का नेतृत्व किया और कारखाने की उत्पादन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार किए।

श्री खरे ने भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईएसबी), हैदराबाद सहित अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों से प्रबंधन प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है। भारतीय रेल के विभिन्न क्षेत्रों में उनकी तकनीकी विशेषज्ञता और प्रबंधन कौशल के लिए उन्हें जाना जाता है।

उनके तीन दशक से अधिक के अनुभव, गुणवत्ता सुधार के प्रयासों, अत्याधुनिक तकनीकों को अपनाने की विशेषज्ञता और नेतृत्व क्षमता से पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के विकास कार्यों को गति मिलने की उम्मीद है। इससे क्षेत्र के रेल यात्रियों, माल परिवहन से जुड़े ग्राहकों और अन्य सभी हितधारकों की अपेक्षाओं एवं आकांक्षाओं को पूरा करने में मदद मिलेगी।

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