तस्वीर में छोटा उदेपुर रेलवे स्टेशन पर आयोजित मॉक ड्रिल के दौरान राहत एवं बचाव कार्यों का अभ्यास करती हुई एनडीआरएफ और रेलवे की टीमें नजर आ रही हैं।   

वडोदरा मंडल के छोटा उदेपुर स्टेशन पर 18 सितम्बर 2026 को आपदा एवं दुर्घटना प्रबंधन तैयारियों की व्यापक जांच के लिए मॉक ड्रिल आयोजित की गई। रेलवे के संरक्षा विभाग की ओर से आयोजित इस संयुक्त अभ्यास में एनडीआरएफ, रेलवे अधिकारी, रेल सुरक्षा बल, सिविल प्रशासन, फायर ब्रिगेड और स्थानीय पुलिस ने सक्रिय सहभागिता की।

वडोदरा मंडल के जनसम्पर्क अधिकारी श्री अनुभव सक्सेना द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, ड्रिल के दौरान प्रातः लगभग 12.15 बजे एक परिकल्पित रेल दुर्घटना की स्थिति बनाई गई। इसमें दर्शाया गया कि एक ट्रेन के दो कोच आपस में टकराकर एक-दूसरे पर चढ़ गए हैं और उनमें मौजूद परिकल्पित यात्रियों को गंभीर चोटें आई हैं।

घटना की सूचना मिलते ही वडोदरा से सेल्फ प्रोपेल्ड एक्सिडेंट रिलीफ मेडिकल इक्विपमेंट (SPARME) तथा एक्सिडेंट रिलीफ ट्रेन (ART) को तुरंत छोटा उदेपुर भेजा गया। रेलवे अधिकारियों, रेल सुरक्षा बल, सिविल प्रशासन, एनडीआरएफ, फायर ब्रिगेड, स्थानीय पुलिस और निकटस्थ अस्पतालों को भी सूचित कर राहत कार्यों की रूपरेखा सक्रिय की गई।

दुर्घटना स्थल पर प्राथमिक उपचार के लिए टेंट स्थापित किए गए। विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय के लिए दूरसंचार केंद्र भी बनाया गया। वडोदरा मंडल के मंडल रेल प्रबंधक श्री राजू भडके ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कंट्रोल रूम से आपात परिस्थिति में राहत एवं बचाव कार्यों की निगरानी की।

साइट पर अपर मंडल रेल प्रबंधक श्री नीरज धमीजा, वरिष्ठ मंडल संरक्षा अधिकारी श्री शरद गौतम, वरिष्ठ मैकेनिकल इंजीनियर श्री अनिल कुमार, वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त श्री फ्रांसिस लोबो, वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक श्री राजेश मथूरिया, वरिष्ठ वित्त प्रबंधक श्री किरनेंदु, वरिष्ठ मंडल विद्युत इंजीनियर (TRO) श्री वीरेन्द्र, वरिष्ठ परिचालन प्रबंधक (सामान्य) श्री परवेज, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक श्री दिनेश तथा NDRF के कमांडेट श्री सुरेंद्र सिंह एवं डिप्टी कमांडेंट श्री संजय के मार्गदर्शन में संयुक्त रेस्क्यू योजना पर कार्य किया गया।

रेलवे और NDRF की टीमों ने समन्वित कार्रवाई करते हुए परिकल्पित दुर्घटनाग्रस्त कोच को काटकर सभी परिकल्पित ‘घायल’ यात्रियों को स्ट्रेचर की सहायता से बाहर निकालने की प्रक्रिया पूरी की और उन्हें अस्थाई चिकित्सा कक्ष तक पहुंचाया। दोपहर लगभग 16.05 बजे पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूर्ण घोषित की गई और इसे मॉक ड्रिल बताया गया।

अभ्यास का मुख्य उद्देश्य विभिन्न विभागों की आपातकालीन तैयारी, त्वरित प्रतिक्रिया, आपसी समन्वय और राहत कार्यों की प्रभावशीलता का परीक्षण करना था। ड्रिल के दौरान घायलों की निकासी, प्राथमिक उपचार, भीड़ नियंत्रण, संचार व्यवस्था, संरक्षा उपाय और राहत गतिविधियों का विस्तृत अनुकरण किया गया।

संयुक्त अभ्यास में रेलवे के ऑपरेटिंग, सेफ्टी, इलेक्ट्रिकल, इंजीनियरिंग, सिग्नल एवं टेलीकॉम, मैकेनिकल, सुरक्षा, वाणिज्यिक और मेडिकल विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं कर्मचारियों के साथ NDRF, पुलिस, मेडिकल तथा सिविल प्रशासन के अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए। मॉक ड्रिल के माध्यम से आपदा या दुर्घटना की स्थिति में राहत एवं बचाव से जुड़े विभिन्न विभागों की तैयारियों और समन्वित कार्रवाई की प्रक्रिया का परीक्षण किया गया।

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