22 अक्टूबर 2026 के पंचांग और शुभ मुहूर्त की जानकारी देती एआई जनित तस्वीर।

22 अक्टूबर 2026, गुरुवार को आश्विन शुक्ल द्वादशी का संयोग बन रहा है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुरुवार का दिन भगवान विष्णु की पूजा के लिए विशेष माना जाता है। इस दिन पूजा-पाठ, शुभ कार्यों और यात्रा की योजना बनाने से पहले तिथि, नक्षत्र, योग, करण, शुभ मुहूर्त, राहुकाल और दिशाशूल की जानकारी महत्वपूर्ण है।

हिंदू धर्म में पंचांग का विशेष महत्व है। पूजा-पाठ करने, यात्रा पर जाने या किसी नए काम की शुरुआत करने के लिए पंचांग देखा जाता है। इसके माध्यम से दिन की तिथि, वार, नक्षत्र, योग और करण के साथ शुभ-अशुभ समय की जानकारी मिलती है। 22 अक्टूबर 2026 को आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि रहेगी। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और जरूरतमंद लोगों की सहायता करने से सुख-समृद्धि और शांति की कामना की जाती है।

द्वादशी तिथि और नक्षत्र का समय

पंचांग के अनुसार, 22 अक्टूबर को द्वादशी तिथि रात 2 बजकर 56 मिनट तक रहेगी। इसके बाद त्रयोदशी तिथि शुरू होगी। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र सुबह 5 बजकर 41 मिनट तक रहेगा, जबकि शोभन योग शाम 4 बजकर 18 मिनट तक रहेगा। करण की बात करें तो बव करण दोपहर 3 बजकर 8 मिनट तक रहेगा। इस दिन सूर्य तुला राशि और चंद्रमा कुंभ राशि में विराजमान रहेंगे।

शुभ मुहूर्त और राहुकाल का समय

22 अक्टूबर को शुभ मुहूर्त सुबह 11 बजकर 16 मिनट से दोपहर 12 बजकर 1 मिनट तक रहेगा। इस अवधि में पूजा-पाठ और अन्य शुभ कार्यों की योजना बनाई जा सकती है। वहीं, राहुकाल दोपहर 1 बजकर 27 मिनट से 2 बजकर 53 मिनट तक रहेगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, राहुकाल में नए शुभ कार्यों की शुरुआत करने से बचने की सलाह दी जाती है।

गुलिक काल सुबह 9 बजकर 10 मिनट से 10 बजकर 36 मिनट तक रहेगा। यमगण्ड काल सुबह 6 बजकर 30 मिनट से 7 बजकर 56 मिनट तक रहेगा। इन समयों को अशुभ माना जाता है और मान्यता के अनुसार, इस दौरान नए मांगलिक कार्य शुरू करने से परहेज किया जाता है।

सूर्योदय, सूर्यास्त और दिशाशूल

22 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 6 बजकर 30 मिनट पर होगा और सूर्यास्त शाम 5 बजकर 32 मिनट पर होगा। चंद्रमा दोपहर 1 बजकर 54 मिनट पर उदित होगा और अगले दिन रात 1 बजकर 22 मिनट पर अस्त होगा।

पंचांग के अनुसार, गुरुवार को दक्षिण दिशा में दिशाशूल माना जाता है। इसलिए इस दिन दक्षिण दिशा की यात्रा करने से बचने की सलाह दी जाती है। यदि यात्रा करना जरूरी हो, तो धार्मिक मान्यताओं के अनुसार उचित उपाय करके यात्रा की जा सकती है।

इस तरह 22 अक्टूबर 2026 को पूजा-पाठ, मांगलिक कार्यों और यात्रा की योजना बनाते समय द्वादशी तिथि, शुभ मुहूर्त, राहुकाल, गुलिक काल, यमगण्ड और दिशाशूल के समय को ध्यान में रखा जा सकता है।