पापांकुशा एकादशी के पावन अवसर पर भगवान विष्णु की पूजा और जरूरतमंदों को दान-पुण्य करने का विशेष महत्व बताया गया है।

इस साल आश्विन महीने के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को पापांकुशा एकादशी के रूप में मनाया जाएगा, जो कि 22 अक्टूबर, गुरुवार के दिन पड़ेगी। यह एक विशेष अवसर है जिसे पद्म पुराण में भी काफी महत्व दिया गया है। पद्म पुराण के अनुसार, इस दिन व्रत रखने, श्रीहरि भगवान विष्णु की पूजा करने और विशेष रूप से दान-पुण्य करने का अत्यंत लाभकारी असर बताया गया है। ऐसी मान्यता है कि अगर इस दिन श्रद्धाभाव और सच्चे मन से तिल और अन्न सहित कुछ विशेष चीजों का दान किया जाए, तो मनुष्य का तन और मन दोनों स्वस्थ बना रहता है। इस पवित्र अवसर पर किए जाने वाले दान के बारे में विस्तार से बताया गया है।

आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की इस एकादशी तिथि को पापांकुशा एकादशी का व्रत किया जाता है और जैसा कि पद्म पुराण में भी इसका महात्म्य विस्तार से बताया गया है, ऐसा कहा जाता है कि इस एकादशी का व्रत करने से यमराज को देखने की नौबत नहीं आती और मनुष्य के लिए सीधे मोक्ष के द्वार खुल जाते हैं। ऐसे में यह विशेष रूप से सलाह दी जाती है कि पापांकुशा एकादशी के दिन व्रत रखने और श्रीहरि की पूजा विधि विधान से करने के साथ-साथ इस दिन तिल और अन्न सहित कुछ खास चीजों का दान अवश्य करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि अगर श्रद्धापूर्वक यह व्रत, पूजा और दान किया जाए, तो अत्यंत शुभ फल की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख व समृद्धि के संयोग भी बन सकते हैं। इस विषय में पद्म पुराण में वर्णित दान की जानकारी दी गई है।

सबसे पहले, एकादशी तिथि पर तिल के दान का विशेष महत्व बताया गया है। ऐसे में आप पापाकुंशा एकादशी तिथि पर अपने सामर्थ्य और क्षमता के अनुसार, किसी जरूरतमंद व्यक्ति को तिल का दान कर सकते हैं। ऐसी मान्यता है कि ऐसा करने से अत्यंत शुभ फल प्राप्त होता है और कार्यों में आ रही जो भी बाधाएं हैं, वे कम होने के संयोग बन जाते हैं। साथ ही, शास्त्रों में भी एकादशी पर तिल के दान को बहुत अधिक फलदायी बताया गया है।

इसके अलावा, शास्त्रों और पुराणों में अन्न दान को "महादान" यानी महान दान की श्रेणी में रखा गया है। ऐसे में आप पापाकुंशा एकादशी पर व्रत करने के साथ-साथ किसी जरूरतमंद व्यक्ति को अपने सामर्थ्य के अनुसार अन्न का दान कर सकते हैं। इस विशेष दिन पर 7 प्रकार के अनाज का दान करना बहुत अधिक शुभ माना जाता है। इसके अलावा, किसी असहाय व्यक्ति को भोजन कराना भी अत्यंत पुण्य का कार्य माना जाता है। ऐसी भी बात कही जाती है कि अन्न का दान करने से कभी भी आपके घर में अन्न का भंडार खाली नहीं रहता है और हमेशा बरकत बनी रहती है।

पद्म पुराण के ही अनुसार, एकादशी तिथि पर जूते और छाते का दान करना बहुत अधिक शुभ और फलदायी माना जाता है। ऐसे में, मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए, आप किसी जरूरतमंद व्यक्ति को जूते या फिर छाते का दान कर सकते हैं। अगर आप श्रद्धा भाव और मन में श्रीहरि का स्मरण करके इस दान को करते हैं, तो आपको भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त हो सकती है। साथ ही, इससे जीवन में सुख व समृद्धि के संयोग भी बनते हैं।

एकादशी के दिन जल यानी पानी का दान करना भी बहुत शुभ माना जाता है और अन्न दान की ही तरह इसे भी "महादान" कहा गया है। पापाकुंशा एकादशी के दिन आप किसी जरूरतमंद व्यक्ति को जल से भरा हुआ कोई पात्र यानी बर्तन दान कर सकते हैं। इसके अलावा, अगर आपका सामर्थ्य है, तो आप किसी सार्वजनिक स्थान पर जल की व्यवस्था भी कर सकते हैं। साथ ही, बेजुबान पशु-पक्षियों के लिए अन्न और जल का इंतजाम करना भी अत्यंत लाभदायक माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से सौभाग्य में वृद्धि हो सकती है।

अगर यह संभव हो, तो आप पापांकुशा एकादशी के दिन सुवर्ण यानी सोने या फिर भूमि यानी जमीन का दान भी कर सकते हैं। पद्म पुराण में इस दान को बहुत अधिक पुण्यकारी बताया गया है। हालांकि, जैसा कि आज के समय में सोने के दाम काफी ज्यादा बढ़ चुके हैं और हर किसी के लिए यह संभव नहीं है, तो ऐसी स्थिति में आप अपने सामर्थ्य अनुसार गेहूं या जौ का दान कर सकते हैं। ऐसी भी मान्यता है कि सोने या भूमि की जगह गेहूं या जौ का दान करने से स्वर्ण दान के समान ही पुण्य फल की प्राप्ति होती है।

पद्म पुराण के अनुसार, जो भी व्यक्ति पापाकुंशा एकादशी के दिन सुवर्ण, तिल, भूमि, गौ, अन्न, जल, जूते और छाते का दान करता है, उसे कभी भी यमराज का सामना नहीं करना पड़ता और यमलोक का द्वार नहीं देखना पड़ता। साथ ही, ऐसे जातक यानी व्यक्ति के लिए स्वर्ग और मोक्ष के द्वार पूरी तरह से खुल सकते हैं। यह दिन धर्म और दान-पुण्य के महत्व को रेखांकित करता है और लोगों को अच्छे कर्मों की ओर प्रेरित करता है।