20 साल के संघर्ष के बाद अरुणाभ कुमार का सपना साकार, TVF की पहली फिल्म ‘Vvaan’ 100 करोड़ के करीब
TVF के संस्थापक अरुणाभ कुमार की पहली थिएट्रिकल फिल्म ‘Vvaan’ दुनियाभर के बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये के करीब पहुंच रही है। जानिए 20 साल के संघर्ष, एकता कपूर के सहयोग और फिल्म की सफलता की पूरी कहानी।
TVF के संस्थापक अरुणाभ कुमार और निर्माता एकता कपूर, जिनकी फिल्म 'Vvaan' बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ के करीब है।
फिल्ममेकर बनने का सपना, छह साल का संघर्ष और लगातार मिलती असफलताओं के बीच अपने रास्ते को बदलने का फैसला। अरुणाभ कुमार के लिए यह सफर आसान नहीं रहा। TVF के संस्थापक अरुणाभ कुमार की पहली थिएट्रिकल फिल्म ‘Vvaan’ अब दुनियाभर के बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये के ग्रॉस कलेक्शन के आंकड़े के करीब पहुंच रही है। मास बेल्ट में फिल्म को मिल रही प्रतिक्रिया के बीच अरुणाभ ने अपने 20 साल के संघर्ष को याद करते हुए सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा किया है।
अरुणाभ कुमार ने इस पोस्ट में अपनी सिनेमाई कल्पना को हकीकत में बदलने में योगदान देने वाले सभी लोगों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने फिल्म के निर्माण से जुड़े लोगों के साथ-साथ निर्माता एकता कपूर और निर्देशक दीपक मिश्रा को भी धन्यवाद दिया।
बहुत कम लोग अरुणाभ कुमार के उस सफर के बारे में जानते हैं, जो उन्होंने 2012 में TVF की शुरुआत से पहले तय किया था। वह 2006 में मुंबई आए थे और फिल्ममेकर बनने के अपने सपने को पूरा करने के लिए छह साल से भी ज्यादा समय तक संघर्ष करते रहे। इस दौरान उन्हें लगातार असफलताओं का सामना करना पड़ा और आखिरकार कुछ समय के लिए अपने इस सपने को छोड़ना पड़ा।
अपने पुराने इंटरव्यू में अरुणाभ ने बताया था कि फिल्म इंडस्ट्री के साथ-साथ एडवरटाइजिंग और टेलीविजन के क्षेत्र में भी उन्हें कई बार रिजेक्शन मिला। वह इन क्षेत्रों में बतौर स्टोरीटेलर अपनी पहचान बनाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन लगातार मिल रही असफलताओं ने उनके सामने मुश्किलें खड़ी कर दीं।
साल 2012 तक हालात इतने मुश्किल हो गए थे कि उन्हें यह भी पता नहीं था कि अगला खाना कहां से आएगा। ऐसे समय में उन्होंने अपना रास्ता बदलने का फैसला किया और TVF की शुरुआत की। डिजिटल स्पेस में अपनी पहचान बनाने के लिए शुरू किया गया यह सफर अब बड़े पर्दे तक पहुंच चुका है।
करीब 20 साल के संघर्ष के बाद अरुणाभ कुमार का फिल्म बनाने का सपना आखिरकार बड़े पर्दे पर साकार हुआ है। TVF के चर्चित शोज की तरह उनकी पहली थिएट्रिकल फिल्म ‘Vvaan’ ने भी दर्शकों के बीच अपनी जगह बनाई है। खासतौर पर मास बेल्ट में फिल्म को शानदार प्रतिक्रिया मिल रही है। फिल्म दुनियाभर के बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ रुपये के ग्रॉस कलेक्शन के आंकड़े के करीब पहुंच रही है।
सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए अरुणाभ ने एक खास नोट लिखा। उन्होंने कहा, "व्यक्तिगत विचार और पेशेवर आभार 🙏… हमारी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर प्रतीकात्मक रूप से 100 करोड़ ग्रॉस के आंकड़े तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। ऐसे में मैं छठी मैया से प्रार्थना करना चाहता हूं कि वह मुझे आशीर्वाद दें और मां वन देवी का शुक्रिया अदा करना चाहता हूं कि उन्होंने इस सफर को पूरा करने में मेरा साथ दिया। मैं फिल्म की शुरुआत से लेकर इसके निर्माण में शामिल हर एक व्यक्ति का दिल से आभार व्यक्त करता हूं। (P.S.- 2006 में हीरानंदानी के CCD में बैठकर लैपटॉप पर अपनी पहली फिल्म लिखने की कोशिश कर रहा तस्वीर में दिख रहा वह लड़का, तभी से इस सपने को देख रहा था। जल्द ही कुछ और पोस्ट साझा करूंगा।)"
अरुणाभ ने अपने नोट में फिल्म के बॉक्स ऑफिस प्रदर्शन के साथ उस संघर्ष को भी याद किया, जिसकी शुरुआत 2006 में मुंबई में हुई थी। हीरानंदानी के CCD में बैठकर लैपटॉप पर अपनी पहली फिल्म लिखने की कोशिश कर रहे उस लड़के के लिए यह सफर एक लंबे सपने के साकार होने जैसा है।
उन्होंने खास तौर पर निर्माता एकता कपूर का आभार जताया, जिन्होंने उन्हें फिल्म बनाने के लिए प्रेरित किया। अरुणाभ के मुताबिक, एक समय ऐसा आ गया था जब उन्होंने फिल्म बनाने का विचार लगभग छोड़ दिया था। लेकिन एकता कपूर के भरोसे, मार्गदर्शन और सहयोग ने उन्हें ‘Vvaan’ बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।
इसके साथ ही उन्होंने अपने निर्देशक और लंबे समय से सहयोगी रहे दीपक मिश्रा का भी शुक्रिया अदा किया। अरुणाभ ने कहा कि दीपक मिश्रा ने उनकी महत्वाकांक्षी कहानी को पर्दे पर जीवंत किया। उन्होंने फिल्म की पूरी कास्ट और क्रू के प्रति भी आभार व्यक्त किया।
बड़े पर्दे पर ‘Vvaan’ को मिली सफलता के बीच TVF के अब तक के सफर को याद करना भी जरूरी है। TVF ने पिछले कई वर्षों में भारतीय मनोरंजन जगत को ऐसी कहानियां और शोज दिए हैं, जिन्होंने दर्शकों और पॉप कल्चर पर गहरी छाप छोड़ी है।
डिजिटल स्पेस में अपनी मजबूत पहचान बनाने के बाद ‘Vvaan’ के जरिए थिएट्रिकल सिनेमा की दुनिया में कदम रखना TVF के सफर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव है। अरुणाभ कुमार के लिए यह फिल्म न केवल उनके लंबे संघर्ष का परिणाम है, बल्कि उस सिनेमाई सपने की भी पूर्ति है, जिसे उन्होंने 2006 में मुंबई आने के बाद देखा था।