कौन हैं Sunil Varma? कॉमेडी के बादशाह से खतरनाक विलेन बनने तक का धमाकेदार सफर
तेलुगु अभिनेता सुनील वर्मा ने 'पुष्पा' में मंगलम सीनू के किरदार से अपनी छवि बदली है। जानें उनके संघर्ष, कॉमेडी में सफलता और विलन बनने तक की पूरी कहानी।
दक्षिण भारतीय फिल्मों के प्रसिद्ध अभिनेता सुनील वर्मा, जिन्होंने कॉमेडी के बाद अब नकारात्मक भूमिकाओं में अपनी एक नई पहचान बनाई है।
साउथ सिनेमा में इन दिनों अगर किसी कलाकार की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है तो वह हैं Sunil Varma। कभी अपनी जबरदस्त कॉमिक टाइमिंग और अलग अंदाज़ की हंसी से लोगों को लोटपोट करने वाले सुनील अब बड़े पर्दे पर खौफनाक विलेन बनकर तहलका मचा रहे हैं। ‘पुष्पा’ में मंगलम सीनू के रोल ने उनकी इमेज पूरी तरह बदल दी और दर्शकों को दिखा दिया कि यह कलाकार सिर्फ कॉमेडी तक सीमित नहीं है। यही वजह है कि आज सोशल मीडिया से लेकर फिल्म इंडस्ट्री तक हर जगह उनकी वापसी की चर्चा हो रही है।
आंध्र प्रदेश के भीमावरम से आने वाले सुनील का सफर बिल्कुल आसान नहीं था। उन्होंने 1996 में फिल्मों में कदम रखा, लेकिन शुरुआती दिनों में उन्हें छोटे-मोटे रोल भी मुश्किल से मिलते थे। उनकी पहली फिल्म में तो उनके सीन ही फाइनल कट से हटा दिए गए थे। स्ट्रगल के उन्हीं दिनों में उनकी दोस्ती निर्देशक Trivikram Srinivas से हुई, जो आगे चलकर उनकी जिंदगी का बड़ा टर्निंग पॉइंट बनी। ‘नुव्वे कावाली’ ने उन्हें पहचान दिलाई और फिर उनकी कॉमिक टाइमिंग ने तेलुगु सिनेमा में ऐसा धमाका किया कि वह 2000 के दशक के सबसे बड़े कॉेडियन सितारों में गिने जाने लगे।
सुनील की खासियत सिर्फ मजेदार डायलॉग नहीं थी, बल्कि उनका एक्सप्रेशन, बॉडी लैंग्वेज और स्क्रीन प्रेजेंस उन्हें सबसे अलग बनाती थी। ‘पेडा बाबू’, ‘नुव्वु नेनु’ और ‘अंध्रुडु’ जैसी फिल्मों में उनके काम ने उन्हें कई बड़े अवॉर्ड दिलाए। तीन नंदी अवॉर्ड और दो फिल्मफेयर अवॉर्ड साउथ जीतना इस बात का सबूत है कि वह सिर्फ दर्शकों के नहीं बल्कि क्रिटिक्स के भी फेवरेट रहे हैं। उनकी लोकप्रियता इतनी बढ़ गई थी कि कई बार लोग फिल्म के हीरो से ज्यादा उनके सीन का इंतजार करते थे।
कॉमेडियन के तौर पर सुपरहिट होने के बाद सुनील ने लीड हीरो बनने का रिस्क लिया। ‘अंदाला रामुडु’, Maryada Ramanna, Poola Rangadu और Tadakha जैसी फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार कमाई की और साबित कर दिया कि वह अकेले दम पर फिल्म चला सकते हैं। खासकर निर्देशक S. S. Rajamouli की ‘मर्यादा रामन्ना’ ने उनकी इमेज पूरी तरह बदल दी। इस फिल्म में उनके डांस, एक्शन और इमोशनल परफॉर्मेंस ने दर्शकों को हैरान कर दिया था।
हालांकि लीड रोल्स पर ज्यादा फोकस करने की वजह से उनके करियर में एक ऐसा दौर भी आया जब लगातार कई फिल्में फ्लॉप होने लगीं। लेकिन सुनील ने हार नहीं मानी। उन्होंने खुद को दोबारा बदला और सपोर्टिंग व निगेटिव रोल्स की तरफ कदम बढ़ाया। ‘कलर फोटो’ में उनका खतरनाक किरदार हो या Pushpa: The Rise में निभाया गया मंगलम सीनू, हर रोल में उन्होंने अपनी अलग छाप छोड़ी। इसके बाद तमिल फिल्मों ‘मावीरण’, ‘मार्क एंटनी’ और ‘गुड बैड अग्ली’ में भी उनकी दमदार मौजूदगी देखने को मिली। आज सुनील उन कलाकारों में शामिल हैं जिन्होंने खुद को समय के साथ बदलकर फिर से इंडस्ट्री में टॉप पर पहुंचाया।
फिल्मों के अलावा सुनील अपनी सादगी और जमीन से जुड़े स्वभाव के लिए भी जाने जाते हैं। अपने 40वें जन्मदिन पर उन्होंने ब्लाइंड स्कूल में जाकर बच्चों के साथ समय बिताया और मदद भी की। यही वजह है कि लोग उन्हें सिर्फ शानदार अभिनेता ही नहीं बल्कि दिल जीतने वाला इंसान भी मानते हैं। कॉमेडी से लेकर विलेन तक का उनका सफर इस बात का उदाहरण है कि असली कलाकार वही होता है जो हर किरदार में खुद को ढाल सके।