कौन हैं Pradeep Rawat? साउथ सिनेमा के सबसे खतरनाक विलेन की कहानी
अभिनेता प्रदीप रावत ने महाभारत में अश्वत्थामा के किरदार से पहचान बनाई और बाद में दक्षिण भारतीय व हिंदी फिल्मों में एक प्रभावशाली खलनायक के रूप में स्थापित हुए।
भारतीय फिल्म अभिनेता प्रदीप रावत जिन्होंने महाभारत टीवी सीरीज और गजनी जैसी फिल्मों में अपने अभिनय से दर्शकों के बीच एक विशिष्ट पहचान बनाई है।
जब भी पर्दे पर भारी आवाज, डर पैदा करने वाली आंखें और खौफनाक स्क्रीन प्रेजेंस दिखाई देती है, तो दर्शकों को सबसे पहले प्रदीप रावत याद आते हैं। इन दिनों फिर से उनका नाम चर्चा में है क्योंकि नई पीढ़ी सोशल मीडिया पर उनके पुराने विलेन किरदारों के क्लिप्स वायरल कर रही है। चाहे ‘गजनी’ का बेरहम गैंगस्टर हो या ‘सई’ का बिक्षु यादव, प्रदीप रावत ने हर किरदार में ऐसा आतंक पैदा किया कि हीरो तक फीके पड़ गए। दिलचस्प बात ये है कि उन्होंने सिर्फ तेलुगु या हिंदी ही नहीं, बल्कि तमिल, कन्नड़, मलयालम, भोजपुरी और नेपाली फिल्मों तक में अपनी दमदार पहचान बनाई।
बहुत कम लोग जानते हैं कि प्रदीप रावत का पहला बड़ा पहचान वाला किरदार टीवी के सबसे आइकॉनिक शो ‘महाभारत’ में अश्वत्थामा का था। बी.आर. चोपड़ा के इस शो ने उन्हें घर-घर पहुंचा दिया। उसके बाद उन्होंने हिंदी फिल्मों में छोटे लेकिन असरदार रोल किए। ‘सरफरोश’, ‘लगान’, ‘कोयला’ और ‘अग्निपथ’ जैसी फिल्मों में उनका रफ एंड टफ अंदाज दिखा, लेकिन असली गेम तब बदला जब उन्होंने साउथ सिनेमा का रुख किया। तेलुगु फिल्म ‘सई’ में बिक्षु यादव बनकर उन्होंने ऐसा धमाका किया कि रातों-रात इंडस्ट्री के सबसे डिमांडिंग विलेन बन गए।
‘सई’ ने सिर्फ उन्हें स्टार नहीं बनाया बल्कि उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट विलेन अवॉर्ड, नंदी अवॉर्ड और संतोषम अवॉर्ड भी दिलाया। इसके बाद ‘छत्रपति’, ‘देसीमुदुरु’, ‘योगी’, ‘स्टालिन’, ‘नायक’, ‘सर्रैनोडु’ और ‘वाल्टेयर वीरय्या’ जैसी फिल्मों में उनका नेगेटिव अवतार दर्शकों के बीच जबरदस्त हिट रहा। उनकी खास बात ये रही कि वह सिर्फ चीखने वाले विलेन नहीं बने, बल्कि हर किरदार को अलग बॉडी लैंग्वेज और अलग डर के साथ पेश किया। यही वजह है कि बड़े-बड़े सुपरस्टार्स की फिल्मों में भी लोग उनके एंट्री सीन का इंतजार करते थे।
तमिल सिनेमा में भी प्रदीप रावत ने खूब नाम कमाया। ‘गजनी’ में उनका डबल रोल आज भी लोगों को याद है। बाद में उन्होंने इसी किरदार को हिंदी रीमेक में भी निभाया और आमिर खान की फिल्म में अपनी अलग छाप छोड़ी। ‘जिल्ला’, ‘वीरम’, ‘आंबाला’ और ‘शिवलिंगा’ जैसी फिल्मों में उनका दबदबा साफ दिखाई दिया। खास बात ये है कि उन्होंने हर भाषा की फिल्मों में खुद को उसी इंडस्ट्री के कलाकार की तरह ढाल लिया, इसलिए दर्शकों ने उन्हें हर जगह अपनाया।
प्रदीप रावत का करियर सिर्फ फिल्मों तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने टीवी, इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स और कई रीजनल इंडस्ट्रीज में लगातार काम किया। भोजपुरी फिल्म ‘क्रैक फाइटर’ से लेकर बंगाली फिल्म ‘हीरो 420’ और मराठी-नेपाली फिल्मों तक, उनका सफर बताता है कि वह सिर्फ एक अभिनेता नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा के सबसे बहुमुखी विलेन में से एक हैं। आज जब सोशल मीडिया पर पुराने विलेन किरदारों की फिर से चर्चा हो रही है, तब प्रदीप रावत की एंट्री, डायलॉग डिलीवरी और स्क्रीन प्रेजेंस को नई पीढ़ी भी खूब पसंद कर रही है।
यही वजह है कि प्रदीप रावत को सिर्फ एक खलनायक नहीं बल्कि भारतीय सिनेमा का ऐसा चेहरा माना जाता है जिसने डर को भी स्टारडम बना दिया। चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में उन्होंने हर दौर के सुपरस्टार्स के साथ काम किया और हर बार अपने किरदार को यादगार बनाया। आज भी जब कोई दमदार विलेन की बात होती है, तो प्रदीप रावत का नाम सबसे पहले लिया जाता है।