सोहम शाह की फिल्में: 'तुम्बाड' से 'क्रेज़ी' तक अनकन्वेंशनल सिनेमा का सफर
'शिप ऑफ थीसियस', 'तलवार' और 'महारानी' जैसी रचनाओं के जरिए एक्टर-प्रोड्यूसर सोहम शाह ने बॉलीवुड में अलग पहचान बनाई है।
तस्वीर में अभिनेता सोहम शाह बारिश के दौरान एक लकड़ी की संरचना से बाहर देखते दिख रहे हैं।
एक ऐसी फिल्म इंडस्ट्री में, जो अक्सर पारंपरिक फॉर्मूलों पर चलती है, सोहम शाह ने अनकन्वेंशनल कहानियों, लेयर्ड किरदारों और चुनौतीपूर्ण कथानकों को लगातार प्राथमिकता दी है। एक्टर, प्रोड्यूसर और एंटरप्रेन्योर के तौर पर उनका फिल्मी सफर अलग-अलग जॉनर और सिनेमाई दुनिया को तलाशने की उनकी इच्छा को दिखाता है। राजस्थान के श्री गंगानगर के रहने वाले शाह ने फिल्ममेकिंग में कदम रखने से पहले रियल एस्टेट में सफल करियर शुरू किया था। अपने बैनर सोहम शाह फिल्म्स के जरिए उन्होंने कंटेंट-ड्रिवन कहानियों को समर्थन दिया और खुद को ऐसे अभिनेता के रूप में स्थापित किया, जो अलग-अलग जॉनर में सहजता से काम कर सकते हैं।
आनंद गांधी के निर्देशन में बनी ‘शिप ऑफ थीसियस’ (2013) शाह के उस सफर की अहम शुरुआत रही, जिसमें उन्होंने अनकन्वेंशनल सिनेमा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। नेशनल फिल्म अवॉर्ड जीतने वाली इस फिल्म में पहचान, नैतिकता और इंसानी वजूद से जुड़े सवालों को सामने रखा गया। शाह ने नवीन परनामी का किरदार निभाया, जो एक मैटेरियलिस्टिक स्टॉकब्रोकर है। किडनी ट्रांसप्लांट के बाद दुनिया को देखने का उसका नजरिया बदल जाता है और यह बदलाव उसके सामने नैतिक दुविधाएं खड़ी करता है। शाह के किरदार में संयम और भावनात्मक गहराई देखने को मिली।
इसके बाद 2015 में मेघना गुलज़ार की ‘तलवार’ के जरिए शाह ने इन्वेस्टिगेटिव ड्रामा की दुनिया में कदम रखा। विशाल भारद्वाज द्वारा लिखी गई यह फिल्म 2008 के नोएडा डबल मर्डर केस पर आधारित थी। फिल्म ने मामले से जुड़े अलग-अलग नजरियों और इंस्टीट्यूशनल झगड़ों को सामने रखा। शाह ने ACP वेदांत मिश्रा का किरदार निभाया और इरफ़ान खान के साथ पुलिस प्रोसीजरल में नपी-तुली तेजी जोड़ी।
2021 में ‘महारानी’ के साथ शाह ने पॉलिटिकल ड्रामा की दुनिया में कदम रखा। इसमें उन्होंने भीम भारती का किरदार निभाया, जो एक ताकतवर पॉलिटिकल हस्ती है और एम्बिशन, रिश्तों तथा बदलती अथॉरिटी के बीच संतुलन साधता है। उनकी परफॉर्मेंस में अथॉरिटी, कमजोरी और अनप्रेडिक्टेबिलिटी का मेल देखने को मिला, जिसने उनकी फिल्मोग्राफी में एक और लेयर्ड किरदार जोड़ा।
2018 में राही अनिल बर्वे के निर्देशन में बनी ‘तुम्बाड’ ने शाह के अलग तरह के कहानी कहने के तरीके को माइथोलॉजी पर आधारित फैंटेसी हॉरर की दुनिया में पहुंचाया। शाह ने इस फिल्म को प्रोड्यूस करने के साथ इसमें अभिनय भी किया। फिल्म ने हस्तर की दुनिया को सामने रखा और इसकी कहानी विनायक राव पर केंद्रित रही, जो पैसे के पीछे भागता रहता है। शाह ने विनायक के जीवन के अलग-अलग चरणों में उसके ऑब्सेशन को अपनी परफॉर्मेंस के जरिए दिखाया।
2024 में दोबारा रिलीज होने के बाद ‘तुम्बाड’ को सिनेमाघरों में नया जीवन मिला। फिल्म के प्रति दर्शकों की प्रतिक्रिया ने उन्हें फिर थिएटर तक खींचा और यह भारत में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली दोबारा रिलीज बन गई। इस रिस्पॉन्स ने ‘तुम्बाड’ के सफर में एक और अध्याय जोड़ा और दर्शकों के साथ फिल्म के लंबे समय तक बने रहने वाले कनेक्शन को सामने रखा।
2025 में ‘क्रेज़ी’ के साथ शाह ने एक और हाई-कॉन्सेप्ट चुनौती स्वीकार की। फिल्म में उन्होंने डॉ. अभिमन्यु सूद का किरदार निभाया, जो एक सर्जन है और जिसकी बेटी किडनैप हो जाती है। ज्यादातर एक ही रात में सेट यह फिल्म अर्जेंसी और साइकोलॉजिकल टेंशन से संचालित होती है। किरदार ने शाह से लगातार फिजिकल और इमोशनल इंटेंसिटी की मांग की।
‘शिप ऑफ थीसियस’, ‘तलवार’, ‘महारानी’, ‘तुम्बाड’ और ‘क्रेज़ी’ में सोहम शाह की पसंद ऐसी कहानियों की ओर उनका झुकाव दिखाती है, जो अलग किरदारों और दुनिया को सामने लाती हैं। एक्टर, प्रोड्यूसर और एंटरप्रेन्योर के तौर पर उनका काम किसी एक कैटेगरी में आसानी से फिट नहीं होता। फिलॉसॉफिकल उलझनों और इन्वेस्टिगेटिव मिस्ट्री से लेकर पॉलिटिकल पावर स्ट्रगल, माइथोलॉजिकल हॉरर और क्लॉस्ट्रोफोबिक थ्रिलर तक, उनका सफर एक्सपेरिमेंट, लगन और पारंपरिक सिनेमा से अलग कहानियों के प्रति उनकी पसंद को सामने रखता है।