Ramayanam Casting Controversy: रणबीर कपूर पर उठे सवाल, यश और साई पल्लवी की शिव सागर ने की तारीफ|
रामानंद सागर के पोते शिव सागर ने नितेश तिवारी की फिल्म रामायणम् में रणबीर कपूर को भगवान राम के रूप में कास्ट किए जाने पर संदेह जताया है।
फिल्म रामायणम् के ट्रेलर में सीता के रूप में साई पल्लवी, भगवान राम के रूप में रणबीर कपूर और रावण के रूप में यश।
नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही आगामी बहुचर्चित फिल्म 'रामायणम्' इन दिनों अपनी स्टार कास्ट को लेकर लगातार सुर्खियों में बनी हुई है। 1980 के दशक में टेलीविजन पर प्रसारित हुए रामानंद सागर के ऐतिहासिक और पौराणिक धारावाहिक 'रामायण' ने दर्शकों के दिलों-दिमाग पर ऐसी गहरी छाप छोड़ी थी, जिसे आज तक कोई दूसरा शो या फिल्म पूरी तरह नहीं पछाड़ पाई है। समय-समय पर इस महान कथा को बड़े और छोटे पर्दे पर उतारने के कई प्रयास किए गए, लेकिन मूल कृति की लोकप्रियता के करीब पहुंचना हर बार चुनौतीपूर्ण साबित हुआ है। अब इस गौरवशाली गाथा को बड़े पर्दे पर भव्य पैमाने पर वापस लाने की तैयारी चल रही है, जिसके ट्रेलर के सामने आने के बाद से ही फिल्म के किरदारों और कलाकारों के चयन को लेकर सिनेमा जगत में चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।
हाल ही में रिलीज हुए ट्रेलर को लेकर दर्शकों और समीक्षकों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। इस बीच, मूल 'रामायण' के निर्माता रामानंद सागर के पोते शिव सागर ने फिल्म की कास्टिंग पर खुलकर अपनी राय रखी है। उन्होंने स्वीकार किया है कि नया ट्रेलर पहले जारी किए गए टीजर की तुलना में फिल्म की एक कहीं अधिक बेहतर और स्पष्ट छवि पेश करता है। एक हालिया वीडियो साक्षात्कार में उन्होंने साझा किया कि हालिया ट्रेलर में ज्यादा किरदारों, बेहतर वीएफएक्स और रावण के रूप में यश के लुक की झलक देखने को मिली है, जिससे फिल्म के प्रति उत्सुकता काफी बढ़ गई है।
फिल्म में विभिन्न किरदारों के चयन की बात करें तो शिव सागर ने रावण की भूमिका के लिए दक्षिण भारतीय अभिनेता यश और माता सीता के रूप में अभिनेत्री साई पल्लवी की कास्टिंग की खुलकर सराहना की है। उन्होंने इसके पीछे का तर्क देते हुए कहा कि इन कलाकारों का सांस्कृतिक बैकग्राउंड उन्हें भारतीय पौराणिक कथाओं और उनके मर्म को सहज रूप से समझने की क्षमता देता है। उनके अनुसार, ये ऐसी कहानियां हैं जो दक्षिण भारत के इन कलाकारों ने अपने बचपन में अपने दादा-दादी से सुनी हैं, जिससे वे किरदारों के सूक्ष्म हाव-भाव और उनकी मूल भावनाओं को अपने अभिनय में पूरी प्रामाणिकता के साथ उतारने में सक्षम हैं।
हालांकि, भगवान राम की केंद्रीय भूमिका के लिए अभिनेता रणबीर कपूर के चयन को लेकर उन्होंने अपनी दुविधा और संदेह व्यक्त किया है। शिव सागर का मानना है कि दर्शक अभी भी रणबीर कपूर को उनकी हालिया और बिल्कुल विपरीत ऑन-स्क्रीन छवि से जोड़कर देखते हैं, विशेषकर उनकी फिल्म 'एनिमल' के बाद बनी उनकी विवादास्पद और आक्रामक छवि का असर उनकी इस भूमिका पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय सिनेमा में अमूमन राम जैसे पवित्र और आदर्श किरदार के लिए हमेशा एक नए और बेदाग चेहरे को प्राथमिकता दी जाती रही है, जिसके चलते वे इस बात को लेकर अनिश्चित हैं कि दर्शक रणबीर को राम के रूप में कितनी सहजता से स्वीकार कर पाएंगे।
दिलचस्प बात यह है कि खुद रणबीर कपूर ने भी सैन डिएगो में आयोजित कॉमिक-कॉन के दौरान 'रामायणम्' के प्रमोशन के वक्त अपनी कास्टिंग पर उठ रहे सवालों और आलोचनाओं का खुलकर सामना किया था। उन्होंने स्वीकार किया था कि जब उन्हें यह प्रस्ताव मिला था, तो उनके मन में सबसे पहला सवाल यही आया था कि क्या वे वास्तव में इस भूमिका के योग्य हैं। उन्होंने खुद से यह सवाल किया था कि क्या वे इस किरदार के लिए सही व्यक्ति हैं और उन्हें भगवान राम की भूमिका निभाने के बजाय उनका प्रतिनिधित्व करने की इतनी बड़ी जिम्मेदारी क्यों सौंपी गई है।
इसके बावजूद, रणबीर ने यह भी महसूस किया कि इस महान कहानी का महत्व, इसकी जिम्मेदारी और फिल्म निर्माताओं के नेक इरादे ऐसे हैं जो पिछले 4000 वर्षों से लगातार प्रासंगिक बने हुए हैं और हमारे अवचेतन मन में गहराई से रचे-बसे हैं। कुल मिलाकर, 'रामायणम्' की स्टार कास्ट को लेकर भले ही दर्शकों और जानकारों के बीच संशय और बहस का दौर जारी हो, लेकिन इस बहुप्रतीक्षित फिल्म को लेकर लोगों की उत्सुकता अपने चरम पर है। यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि परदे पर यह पौराणिक गाथा दर्शकों की उम्मीदों और कसौटियों पर किस प्रकार खरी उतरती है।