कंगना रनौत के 'गटरछाप' बयान पर आशुतोष राणा का जवाब, बोले- शब्द ही सम्मान और दंड तय करते हैं|
नीट पेपर लीक छात्र आंदोलन के दौरान दिए गए बयान पर जारी विवाद के बीच आशुतोष राणा ने कहा कि व्यक्ति के शब्द ही उसके सम्मान और अपमान का आधार बनते हैं।
बाएं से दाएं आशुतोष राणा और कंगना रनौत का सांकेतिक संयोजन।
अभिनेत्री और भाजपा सांसद कंगना रनौत के 'गटरछाप' बयान को लेकर जारी विवाद के बीच अभिनेता आशुतोष राणा ने भाषा और शब्दों के महत्व पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति की पहचान उसके शब्दों से होती है और वही शब्द सम्मान दिलाने के साथ-साथ अपमान तथा दंड का कारण भी बन सकते हैं। आशुतोष राणा का यह बयान ऐसे समय आया है, जब कंगना रनौत की टिप्पणी को लेकर सार्वजनिक और राजनीतिक स्तर पर लगातार बहस जारी है।
यह विवाद उस समय शुरू हुआ, जब दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक मामले को लेकर छात्रों का प्रदर्शन चल रहा था। प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्रों द्वारा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्र सरकार, सैनिकों और प्रधानमंत्री की दिवंगत मां के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किए जाने की घटनाएं सामने आई थीं। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए कंगना रनौत ने सोशल मीडिया पर कुछ युवाओं और Gen Z पीढ़ी को 'गटरछाप' कहा था। उनके इस बयान की कई स्तरों पर आलोचना हुई और सोशल मीडिया पर भी इस पर व्यापक चर्चा शुरू हो गई।
इस विवाद के बीच अभिनेता सोनू सूद ने भी सार्वजनिक रूप से अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कंगना की टिप्पणी पर असहमति जताई थी। अब आशुतोष राणा ने भी भाषा की गरिमा पर जोर देते हुए अपनी बात रखी है।
आशुतोष राणा ने कहा कि प्रत्येक जीव की पहचान उसकी आवाज और उसके स्वर से होती है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि शेर दहाड़ता है, हाथी चिंघाड़ता है और कुत्ता भौंकता है। इसी प्रकार मनुष्य की पहचान उसके द्वारा बोले गए शब्दों और उसकी भाषा से होती है। उन्होंने कहा कि भाषा का महत्व केवल संवाद तक सीमित नहीं है, बल्कि यह व्यक्ति के संस्कार, व्यक्तित्व और सामाजिक व्यवहार को भी दर्शाती है।
आशुतोष राणा ने आगे कहा कि भारतीय परंपरा में लंबे समय से यह माना जाता रहा है कि शब्दों के माध्यम से ही व्यक्ति को सम्मान प्राप्त होता है और उन्हीं शब्दों के कारण उसे दंड भी मिल सकता है। उनके अनुसार, व्यक्ति के बोले गए शब्द ही उसके सम्मान और अपमान दोनों का आधार बनते हैं। इसलिए प्रत्येक व्यक्ति को सार्वजनिक जीवन में भाषा का प्रयोग अत्यंत सावधानी और जिम्मेदारी के साथ करना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि शब्द केवल विचार व्यक्त करने का माध्यम नहीं होते, बल्कि वे व्यक्ति के चरित्र और सोच का भी परिचय देते हैं। ऐसे में सार्वजनिक मंचों पर बोलते समय संयम और मर्यादा बनाए रखना आवश्यक है।
इस पूरे घटनाक्रम के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी छात्रों द्वारा की गई अभद्र टिप्पणियों पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने 31 जुलाई को इंस्टाग्राम पर साझा किए गए एक वीडियो में कहा कि वह गाली देने वाले छात्रों को माफ करते हैं। प्रधानमंत्री की इस प्रतिक्रिया को कई लोगों ने संयम और संवाद की भावना से जोड़कर देखा।
हालांकि, इसी मामले में कंगना रनौत का रुख अलग नजर आया। प्रधानमंत्री को अपशब्द कहने के मामले में चर्चा में आई 15 वर्षीय छात्रा रुचिका द्वारा सार्वजनिक रूप से माफी मांगने के बाद भी कंगना ने सोशल मीडिया पर अपनी प्रतिक्रिया जारी रखी।
कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम स्टोरी के माध्यम से लिखा कि छात्रा ने स्वयं स्वीकार किया है कि वह पहले कभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ कोई पोस्ट नहीं करती थी, लेकिन उस दिन अपने दोस्तों के साथ प्रदर्शन में गई और वहां मौजूद लोगों के प्रभाव में आकर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किया। कंगना ने अपनी पोस्ट में अभिभावकों से बच्चों को भटकाने वाले विचारों से सावधान रहने की अपील भी की। साथ ही उन्होंने प्रदर्शन में शामिल लोगों को लेकर कुछ अन्य टिप्पणियां भी कीं, जिन पर सोशल मीडिया पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आईं।
कंगना रनौत की टिप्पणी और उस पर आई प्रतिक्रियाओं ने सार्वजनिक जीवन में भाषा की मर्यादा, अभिव्यक्ति की जिम्मेदारी और सामाजिक संवाद की सीमाओं को लेकर नई बहस को जन्म दिया है। आशुतोष राणा का बयान भी इसी संदर्भ में भाषा के संयम और जिम्मेदार अभिव्यक्ति पर जोर देता है। फिलहाल यह मुद्दा सोशल मीडिया और सार्वजनिक विमर्श में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहां अलग-अलग पक्ष अपनी राय रख रहे हैं।