अक्षय कुमार के साथ किया डेब्यू, ‘भूत’ से मिली पहचान, फिर भिक्षुणी बनीं बरखा मदान
अक्षय कुमार के साथ ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ से बॉलीवुड में कदम रखने वाली बरखा मदान ने ‘भूत’ से पहचान बनाई और 2012 में बौद्ध भिक्षुणी बन गईं। जानिए ऐश्वर्या राय के साथ मिस इंडिया में हिस्सा लेने से लेकर ग्याल्टेन सैमटेन बनने तक का उनका सफर।
तस्वीर में बौद्ध भिक्षुणी के रूप में नजर आ रहीं पूर्व बॉलीवुड अभिनेत्री बरखा मदान उर्फ ग्याल्टेन सैमटेन तिब्बती क्षेत्र में जीवन बिता रही हैं।
बॉलीवुड में अक्षय कुमार के साथ फिल्मी सफर शुरू करने और राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘भूत’ में अपने अभिनय से पहचान बनाने वाली अभिनेत्री बरखा मदान ने मनोरंजन जगत से दूरी बनाकर बौद्ध भिक्षुणी का जीवन अपना लिया। कभी सौंदर्य प्रतियोगिताओं, फिल्मों और टेलीविजन धारावाहिकों में सक्रिय रहीं बरखा अब ग्याल्टेन सैमटेन के नाम से जानी जाती हैं। उन्होंने वर्ष 2012 में बौद्ध भिक्षुणी बनने की दीक्षा ली थी।
पंजाबी पृष्ठभूमि से आने वाली बरखा मदान ने वर्ष 1994 में फेमिना मिस इंडिया प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। इस दौरान वह ऐश्वर्या राय और सुष्मिता सेन के साथ रैंप पर उतरी थीं। इसके बाद उन्होंने टूरिज्म इंडिया सौंदर्य प्रतियोगिता का खिताब जीता, जिससे उनके लिए बॉलीवुड में प्रवेश का रास्ता खुला।
बरखा ने वर्ष 1996 में अक्षय कुमार के साथ फिल्म ‘खिलाड़ियों का खिलाड़ी’ से बॉलीवुड में पदार्पण किया। इसके बाद उन्होंने एक डच फिल्म में भी काम किया और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई। वर्ष 2003 में राम गोपाल वर्मा की फिल्म ‘भूत’ में भूत का किरदार निभाने के लिए उन्हें काफी प्रशंसा मिली। इसी दौर में उन्होंने फिल्म निर्माण के क्षेत्र में भी कदम रखा। फिल्मों के साथ-साथ वह टेलीविजन पर भी सक्रिय रहीं और 20 से अधिक टीवी कार्यक्रमों तथा धारावाहिकों में काम किया।
फिल्मों, टेलीविजन और निर्माण कार्यों में व्यस्त रहने के बावजूद बरखा मदान की रुचि धीरे-धीरे बौद्ध दर्शन की ओर बढ़ने लगी। वर्ष 2012 में बौद्ध धर्म के प्रति उनकी आस्था ने उनके जीवन की दिशा बदल दी। वह दलाई लामा की अनुयायी थीं और अंततः उन्होंने बौद्ध भिक्षुणी बनने का निर्णय लिया। दीक्षा लेने के बाद उन्होंने अपना नाम बदलकर ग्याल्टेन सैमटेन रख लिया।
बरखा ने एक दशक से अधिक समय पहले बॉलीवुड, फिल्मों, धारावाहिकों और सौंदर्य जगत से दूरी बना ली थी। वह पिछले 14 वर्षों से तिब्बती क्षेत्र में बौद्ध भिक्षुणी के रूप में जीवन बिता रही हैं। इस दौरान वह सामाजिक कार्यों में भी समय देती हैं। बरखा मदान कई बार कह चुकी हैं कि बौद्ध भिक्षुणी बनने का निर्णय उनके जीवन का सबसे अच्छा फैसला था।
बरखा मदान का सफर सौंदर्य प्रतियोगिताओं और अभिनय से शुरू होकर बौद्ध दर्शन तथा संन्यासी जीवन तक पहुंचा। मनोरंजन जगत में सक्रिय रहने के बाद उनका यह बदलाव उनके जीवन की सबसे महत्वपूर्ण घटनाओं में शामिल है।