उदयपुर की मेवाड़ी फिल्म ‘अमलपट्टा’ ने BRICS फिल्म शिखर सम्मेलन में बनाई खास पहचान
उदयपुर की मेवाड़ी फिल्म ‘अमलपट्टा’ ने BRICS फिल्म शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा बनकर पहचान बनाई। वेव्स बाजार में विदेशी वितरकों ने फिल्म की कहानी और अंतरराष्ट्रीय वितरण में रुचि दिखाई।
तस्वीर में मेवाड़ी फीचर फिल्म 'अमलपट्टा' का आधिकारिक पोस्टर दिखाई दे रहा है, जिसमें फिल्म के कलाकार और शीर्षक नजर आ रहे हैं।
उदयपुर। राजस्थान के युवा फिल्मकारों की मेवाड़ी भाषा में बनी फीचर फिल्म ‘अमलपट्टा’ ने मुंबई में 6-7 अगस्त को आयोजित BRICS फिल्म शिखर सम्मेलन में भारतीय प्रतिनिधिमंडल के हिस्से के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। सम्मेलन का आयोजन सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय तथा एनएफडीसी वेव्स की ओर से किया गया। फिल्म के निर्देशक सौरव जैन ने सम्मेलन में ‘अमलपट्टा’ का प्रतिनिधित्व किया।
सम्मेलन के दौरान आयोजित वेव्स बाजार में ‘अमलपट्टा’ को विदेशी वितरकों और अंतरराष्ट्रीय फिल्म प्रतिनिधियों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। फिल्म की मेवाड़ी भाषा, राजस्थान का ग्रामीण परिवेश और अपराध-रोमांच पर आधारित कहानी ने प्रतिनिधियों का ध्यान आकर्षित किया। कई विदेशी वितरकों ने फिल्म की विषयवस्तु और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके वितरण में रुचि दिखाई।
‘अमलपट्टा’ राजस्थान के अफीम उत्पादक क्षेत्र की पृष्ठभूमि पर आधारित मेवाड़ी भाषा की अपराध-रोमांच फिल्म है। फिल्म में अफीम किसानों के जीवन, उनकी चुनौतियों तथा इससे जुड़े सामाजिक और आर्थिक तंत्र को कहानी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।
फिल्म की निर्माता आस्था वर्मा, निर्देशक सौरव जैन और लेखक सौरभ चतुर्वेदी हैं। फिल्म का निर्माण आरजे27 प्रोडक्शंस यूनिवर्सल के बैनर तले किया गया है।
फिल्म की शूटिंग राजस्थान में 38 दिनों में पूरी की गई, जिस पर करीब 50 लाख रुपए की लागत आई। फिल्म की खास बात यह है कि इसके सभी कलाकार और तकनीकी दल राजस्थान से जुड़े हुए हैं। फिल्म में रमेश नागदा, प्रफुल्ल बोराना और नवीन जीनगर प्रमुख भूमिकाओं में हैं।
केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड की ओर से फिल्म को ‘ए’ प्रमाण-पत्र मिल चुका है। फिल्म जल्द ही सिनेमाघरों में प्रदर्शित की जाएगी।
BRICS फिल्म शिखर सम्मेलन में ‘अमलपट्टा’ की मौजूदगी को राजस्थानी सिनेमा के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है। फिल्म के अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों तक पहुंचने से क्षेत्रीय भाषाओं और राजस्थान की स्थानीय कहानियों के लिए वैश्विक फिल्म बाजार के नए रास्ते खुलने की उम्मीद जगी है। ‘अमलपट्टा’ ने यह भी साबित किया है कि स्थानीय भाषा और ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़ी प्रभावशाली कहानियों में अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को आकर्षित करने की क्षमता है।