जब ‘बुनियाद’ के किरदारों पर बरसे पत्थर, एक किरदार को बचाने के लिए डॉक्टरों ने लिखी थी चिट्ठी|
दूरदर्शन के लोकप्रिय धारावाहिक बुनियाद के शुरुआती प्रसारण पर दर्शकों के विरोध और डॉक्टरों द्वारा मेकर्स को पत्र लिखने की पूरी कहानी।
दूरदर्शन के पुराने धारावाहिक बुनियाद के कलाकार सेट पर बैठे हुए नजर आ रहे हैं जिसका निर्देशन रमेश सिप्पी ने किया था।
दूरदर्शन के इतिहास के पन्नों को पलटें तो कई ऐसे धारावाहिक नजर आते हैं जिन्होंने भारतीय टेलीविजन की रूपरेखा हमेशा के लिए बदल दी और दर्शकों के दिलों पर गहरी छाप छोड़ी। इसी स्वर्णिम दौर का एक ऐसा ही ऐतिहासिक और क्लासिक धारावाहिक रहा है 'बुनियाद', जिसने 'रामायण' और 'महाभारत' के टीवी पर आगमन से बहुत पहले ही अपनी लोकप्रियता का ऐसा इतिहास रच दिया था जो आज भी याद किया जाता है। साल 1986 में टेलिकास्ट हुए इस धारावाहिक ने न केवल टेलीविजन देखने के तरीके को बदला, बल्कि हर घर में अपनी एक विशेष जगह बना ली। 'संडे सिनेमा' के इस विशेष प्रसंग में आज हम उसी ऐतिहासिक धारावाहिक की बात कर रहे हैं, जिसे भारतीय टेलीविजन का 'शोले' तक कहा जाता था।
'बुनियाद' की कहानी और इसका ताना-बाना विभाजन की पृष्ठभूमि पर बुना गया था। इस सीरियल की कहानी में मास्टर हवेलीराम मुख्य भूमिका में थे, जो लाहौर में अपनी पत्नी लाजो और तीन बेटों के अलावा बहू लोचन के साथ रहते थे। लेकिन जैसे ही देश का विभाजन होता है, हवेलीराम का जीवन पूरी तरह उथल-पुथल हो जाता है। उन्हें अपना पुश्तैनी घर और काम-धंधा सब कुछ छोड़कर विस्थापित होना पड़ता है। हालात तब और गंभीर हो जाते हैं जब विभाजन की इस विभीषिका के बीच हवेलीराम अचानक लापता हो जाते हैं। यह धारावाहिक मुख्य रूप से विभाजन के बाद हवेलीराम के परिवार द्वारा नए सिरे से अपनी जिंदगी बसाने और संघर्ष करने की लंबी दास्तान को बयां करता है।
इस धारावाहिक के निर्माण से जुड़े कई ऐसे दिलचस्प तथ्य और किस्से हैं जो इसे और भी खास बनाते हैं। 'बुनियाद' का निर्देशन बॉलीवुड की кульटक फिल्म 'शोले' के मशहूर निर्देशक रमेश सिप्पी और ज्योति स्वरूप ने किया था। इस सीरियल के भव्य पैमाने का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि इसके मात्र एक एपिसोड को तैयार करने में उस समय लगभग 3 लाख रुपये की लागत आती थी। इसके अलावा, लाहौर के विभाजन से पहले के दृश्यों को फिल्माने के लिए फिल्म सिटी के एक बड़े हिस्से को पूरी तरह से लाहौर के रूप में तब्दील किया गया था और भव्य सेट तैयार किए गए थे।
धारावाहिक की कहानी को दो अलग-अलग कालखंडों में बांटा गया था। पहले 25 एपिसोड्स में विभाजन से ठीक पहले के दौर और उस समय की सामाजिक परिस्थितियों को दिखाया गया था, जब लोगों को यह गलतफहमी थी कि सरहदें केवल कागजी हैं और वे हमेशा अपने प्रियजनों के साथ मिलजुलकर रहेंगे। इसके बाद कहानी कई दशकों का सफर तय करते हुए 1980 के दशक की शुरुआत में पहुंचती है। इस दौर में मास्टर हवेलीराम अपने नाती-पोतों के साथ अपना जन्मदिन मनाते हुए नजर आते हैं। समय पूरी तरह बदल चुका है, परिवार आर्थिक रूप से समृद्ध होकर दिल्ली में बस चुका है। नई पीढ़ी के लिए देश का बंटवारा केवल बुजुर्गों द्वारा सुनाई जाने वाली पुरानी कहानियां बनकर रह गया है, लेकिन हवेलीराम के मन में आज भी वो पुराना दर्द और अपनों से बिछड़ने की टीस जिंदा है।
हालांकि, इस सीरियल को जितनी शोहरत और प्यार मिला, शुरुआती दौर में इसे जनता के तीखे गुस्से और विरोध का भी सामना करना पड़ा था। 'मद्रासवाला डॉट कॉम' की रिपोर्ट के अनुसार, जब 'बुनियाद' के पहले दो एपिसोड ऑन-एयर हुए, तो दर्शक बुरी तरह भड़क गए और इसका विरोध शुरू कर दिया। इसकी मुख्य वजह यह थी कि धारावाहिक में विभाजन के दर्द और जख्मों को इतनी जीवंतता के साथ दिखाया गया था कि दर्शकों के पुराने नासूर हरे हो गए और उनका गुस्सा कलाकारों पर फूट पड़ा।
धारावाहिक में निभाए गए किरदारों का असर दर्शकों के दिलों पर इस कदर गहरा था कि अभिनेताओं को वास्तविक जीवन में भी इसका सामना करना पड़ा था। 'बुनियाद' के अभिनेता विनोद नागपाल ने एक इंटरव्यू में खुद इस बात का खुलासा किया था कि एक बार जब वह मुंबई के अंधेरी इलाके में सामान्य रूप से घूम रहे थे, तो कुछ लोगों ने उन्हें देखते ही उन पर पत्थर बरसाने शुरू कर दिए थे और उन्हें खरी-खोटी सुनाने लगे थे। ऐसा इसलिए हुआ था क्योंकि धारावाहिक में विनोद नागपाल के किरदार ने वृषभान के परिवार के साथ काफी गलत व्यवहार किया था, जिससे आहत होकर दर्शक उनके खिलाफ हो गए थे और ऑन-स्क्रीन गुस्से को उन्होंने ऑफ-स्क्रीन निकाल दिया था।
इसके विपरीत, कुछ किरदार ऐसे भी थे जिनसे दर्शकों को अत्यधिक लगाव हो गया था। सीरियल में जय भूषण का किरदार निभाने वाले अभिनेता अभिनव चतुर्वेदी ने अपनी बेहतरीन अदायगी से लोगों के दिलों में एक खास जगह बना ली थी। वह इससे पहले देश के पहले टीवी सीरियल 'हम लोग' में भी काम कर चुके थे। 'बुनियाद' में जब जय भूषण की मृत्यु का दृश्य दिखाया जाने वाला था, तब दर्शकों का भावनात्मक जुड़ाव इतना गहरा था कि टाटा मेमोरियल अस्पताल के डॉक्टरों ने सीधे मेकर्स को चिट्ठी लिखकर यह गुजारिश की थी कि जय भूषण के किरदार को न मारा जाए और उसे कहानी में जीवित रखा जाए। डॉक्टरों का तर्क था कि यदि इस लोकप्रिय पात्र की मौत दिखाई गई, तो इससे कैंसर के मरीजों का हौसला टूट सकता है और वे जीने की इच्छा खो बैठेंगे।
'बुनियाद' में आलोक नाथ ने मास्टर हवेलीराम की भूमिका निभाकर इसे अमर कर दिया था। उनके अलावा इस महागाथा में सोनी राजदान, विजयेंद्र घाटगे, मजहर खान, अनीता कंवर, दलीप ताहिल और कंवलजीत सिंह जैसे दिग्गज कलाकारों ने अपनी अदाकारी से जान फूंकी थी। यह धारावाहिक केवल मनोरंजन का साधन नहीं था, बल्कि यह भारतीय टेलीविजन के इतिहास का एक ऐसा मील का पत्थर बन गया, जिसने पीढ़ियों को इतिहास के उस दर्दनाक पन्ने से रूबरू कराया और हमेशा के लिए छोटे पर्दे के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में अपना नाम दर्ज करा लिया।