तस्वीर में अभिनेत्री अदिति राव हैदरी खिड़की के पास पोज देती हुई दिख रही हैं।

अभिनेत्री अदिति राव हैदरी के लिए जन्मदिन केवल जश्न मनाने का अवसर नहीं, बल्कि खुद से जुड़ने और जीवन में संतुलन बनाए रखने का समय है। हिंदी, तमिल और तेलुगु सिनेमा में अपने अभिनय के लिए पहचान बनाने वाली अदिति ने अपने जन्मदिन, फिल्मी सफर और व्यक्तिगत विकास को लेकर विचार साझा किए हैं। उनका कहना है कि बदलाव को अपनाते हुए अपने भीतर के उस सहज और जिज्ञासु बच्चे को सुरक्षित रखना जरूरी है।

28 अक्टूबर 1987 को हैदराबाद में त्याबजी-हैदरी परिवार में जन्मीं अदिति राव हैदरी 28 अक्टूबर को अपना जन्मदिन मनाती हैं। उन्होंने 2006 में मलयालम फिल्म ‘प्रजापति’ से अभिनय की शुरुआत की थी, जिसमें वह ममूटी के साथ नजर आई थीं। ‘दिल्ली-6’ (2009) और ‘ये साली जिंदगी’ (2011) से उन्हें पहचान मिली। इसके बाद उन्होंने ‘रॉकस्टार’ (2011), ‘मर्डर 3’ (2013), ‘वजीर’ (2016), ‘पद्मावत’ (2018), मणिरत्नम की तमिल रोमांटिक फिल्म ‘काट्रु वेलियिदाई’ (2017) और संजय लीला भंसाली की ‘हीरामंडी’ (2024) में काम किया। वर्ष 2024 में उन्होंने अभिनेता सिद्धार्थ से शादी की।

सिनेमा में करीब दो दशक के सफर को याद करते हुए अदिति ने बताया कि वह अपने कम उम्र वाले रूप को क्या सलाह देना चाहेंगी। उनके मुताबिक, उन्हें बिना किसी बाहरी दबाव की परवाह किए अपने व्यक्तित्व को स्वीकार करना चाहिए, उन लोगों पर भरोसा करना चाहिए जो उनका साथ देते हैं और उन्हें बेहतर बनने की चुनौती देते हैं। उन्होंने कहा कि जीवन में हर बात को तुरंत समझ लेने या हर सवाल का जवाब खोजने की जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए।

अदिति ने सीखते रहने, जिज्ञासु बने रहने और गलतियां करने से नहीं डरने की अहमियत भी बताई। उनका मानना है कि गलतियों को सुधारा जा सकता है और कई बार जिन अनुभवों का अर्थ उस समय समझ नहीं आता, उनसे भी आगे चलकर सीख मिलती है। उन्होंने कहा कि इन सभी परिस्थितियों के बीच दयालु बने रहना चाहिए। उनके अनुसार, विकास का अर्थ बदलाव के लिए खुले रहना और अपने भीतर के उस खुशमिजाज बच्चे को बनाए रखना है।

जन्मदिन मनाने के तरीके पर अदिति ने कहा कि वह आमतौर पर बड़ी तैयारियां नहीं करतीं। उन्हें अपने प्रिय लोगों के साथ समय बिताना पसंद है। उनके लिए जन्मदिन का महत्व खुद को संतुलित महसूस करने और अपनी जड़ों से जुड़े रहने में है। उन्होंने बताया कि बचपन में जन्मदिन का अनुभव अलग होता था, क्योंकि उनका जन्मदिन हमेशा दिवाली के आसपास आता है और उस समय चारों ओर उत्सव का माहौल रहता था। अब वह चाहती हैं कि खुशी केवल किसी खास अवसर तक सीमित न रहे, बल्कि हर दिन का हिस्सा बने।

फिल्म उद्योग में अपने अनुभवों पर बात करते हुए अदिति ने शिकायतों के बजाय कृतज्ञता को महत्व देने की बात कही। उन्होंने स्वीकार किया कि उनका सफर हमेशा आसान नहीं रहा और आगे बढ़ने का हर कदम चुनौतीपूर्ण रहा है। इसके बावजूद वह हर उपलब्धि के लिए आभारी हैं। उनके अनुसार, यदि कोई उनके साथ गलत व्यवहार करता है या उन्हें उनका उचित हक नहीं देता, तो इसकी जिम्मेदारी उसी की है। उन्होंने कहा कि सही लोग जीवन में आते हैं, साथ देते हैं, आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करते हैं और चुनौतियों के जरिए बेहतर बनने में मदद करते हैं। अदिति ऐसे लोगों को महत्व देती हैं।

अभिनेत्री ने सिनेमा और फिल्म उद्योग के बीच अंतर पर भी अपना दृष्टिकोण रखा। उनका मानना है कि सिनेमा और उसकी कला किसी भी उद्योग तथा उसे चलाने वाले लोगों से बड़ी है। उन्होंने कहा कि यदि किसी व्यक्ति और सिनेमा के बीच सच्चा प्रेम है, तो कोई भी चीज, यहां तक कि वह व्यक्ति स्वयं भी, इस संबंध के रास्ते में बाधा नहीं बन सकता। उनके अनुसार, सिनेमा के प्रति यह प्रेम समय के साथ बना रहता है।

अपने अनुभवों से मिली सीख का उल्लेख करते हुए अदिति ने कहा कि अब उनकी प्राथमिकता ऐसे काम चुनना है, जो उन्हें उत्साहित करें, चुनौती दें और एक अभिनेत्री के रूप में कुछ नया खोजने का अवसर प्रदान करें। उनके विचार व्यक्तिगत विकास, सीखते रहने, अपने आत्मसम्मान को महत्व देने और अभिनय के प्रति निरंतर जिज्ञासा बनाए रखने पर केंद्रित हैं।

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