डीग की खण्डेलवाल धर्मशाला में आयोजित भागवत कथा के दौरान उपस्थित श्रद्धालु।

डीग, 19 सितंबर। शहर की खण्डेलवाल धर्मशाला में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ के चतुर्थ दिवस कृष्ण जन्म की कथा का प्रसंग सुनाते हुए लक्ष्मण मंदिर के महंत एवं कथा प्रवक्ता पूज्य पंडित मुरारी लाल पाराशर ने कहा कि श्रीमद्भागवत वेदरूपी वृक्ष का पका हुआ फल है। इस रस का पान पिपासु बनकर ग्रहण करना चाहिए। जब-जब अवसर मिले, भागवत ग्रहण करने से पीछे नहीं हटना चाहिए।

व्यास पीठ से कथा प्रवक्ता पूज्य पंडित मुरारी लाल पाराशर ने कहा कि जब मन अशुद्ध होता है तो संसार में लगता है और जब मन शुद्ध होता है तो सिर्फ भगवान की कथा में लगता है। उन्होंने कहा कि जिसमें मानवता नहीं है, वह मानव नहीं है। मानव वह है जो किसी के काम आ जाए। ईश्वर का भजन करे, किसी को तकलीफ न दे और बड़ों को सम्मान दे, यही मानवता है।

पाराशर ने कहा कि व्यक्ति संसार में केवल कर्म लेकर आता है, इसलिए अच्छे कर्म करो। भाग्य, भक्ति, वैराग्य और मुक्ति पाने के लिए भगवत की कथा सुनो। केवल सुनो ही नहीं, भागवत की मानो भी।

उन्होंने कहा कि श्रीमद् के पीछे एक बड़ा मर्म छुपा हुआ है। श्री यानी जब धन का अहंकार हो जाए तो श्रीमद्भागवत सुन लो, अहंकार दूर हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कलयुग में मुक्ति का सबसे उत्तम साधन भागवत कथा का श्रवण व भगवान नाम का सुमिरन करना है। भागवत का अर्थ ज्ञान, भक्ति और वैराग्य है। इन तीनों में से किसी एक की कमी होने पर ईश्वर की भक्ति प्राप्त नहीं होती। इसलिए हमें श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण करना चाहिए।

पाराशर ने कहा कि प्रभु अपने भीतर हैं, उन्हें अपने भीतर तलाश करो। राम का नाम अमृत समान है। जिसने उसका पान किया है या उसका स्वाद चखा है, वही राम नाम के महत्व को जान सकता है।

इस अवसर पर श्रीमती कांति देवी, संजय खण्डेलवाल उर्फ बंटी, महेश खण्डेलवाल, आदित्य खण्डेलवाल, निखिल खण्डेलवाल, पार्थ खण्डेलवाल, बाबू लाल, भगवान, मुकेश, विष्णु, लखन, आशा खण्डेलवाल, सलोनी खण्डेलवाल सहित बड़ी संख्या में भक्त उपस्थित थे।

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