तस्वीर में मंगल चैरिटेबल ट्रस्ट के अध्यक्ष मेघराज धाकड़ धिधागढ़ गांव में स्थानीय ग्रामीणों और दो महिलाओं के साथ बातचीत करते हुए नजर आ रहे हैं।

नाथद्वारा। राजसमंद जिले की शिशोदा ग्राम पंचायत के धिधागढ़ गांव में जर्जर मकान में जीवन गुजार रही दो विधवा बहनों भंवरी बाई चौहान एवं जमना बाई चौहान के लिए मंगल चैरिटेबल ट्रस्ट, मुंबई ने मदद का जिम्मा उठाया है। बरसात में क्षतिग्रस्त मकान में छतरी के सहारे रात बिताने को मजबूर दोनों बहनों की पीड़ा की खबर एक निजी चैनल के माध्यम से सामने आने के बाद ट्रस्ट ने उनके लिए दो पक्के मकान बनाने की घोषणा की है।

मंगल चैरिटेबल ट्रस्ट, मुंबई के अध्यक्ष मेघराज धाकड़ ने 15 अगस्त को अपनी माताजी कंकुबाई के 75वें जन्मदिन के अवसर पर दोनों विधवा बहनों को दो पक्के मकानों का अनोखा उपहार देने की घोषणा की। ट्रस्ट आगामी छह माह में दोनों बहनों के लिए अलग-अलग दो मकान बनाकर देगा। यह घोषणा उस समय हुई, जब दोनों बहनें लंबे समय से जर्जर मकान और बरसात की परेशानी के बीच जीवन गुजार रही थीं।

दोनों बहनों की स्थिति की जानकारी मेघराज धाकड़ तक पहुंची तो उन्होंने इसे केवल एक समाचार नहीं माना, बल्कि अपनी जन्मभूमि के प्रति नैतिक जिम्मेदारी समझते हुए स्वयं धिधागढ़ पहुंचने का निर्णय लिया। 15 अगस्त की पूर्व संध्या पर धाकड़ अपनी टीम के साथ मुंबई से धिधागढ़ पहुंचे और भंवरी बाई एवं जमना बाई से मुलाकात कर उनके घरों की स्थिति का जायजा लिया।

जर्जर दीवारें, क्षतिग्रस्त छत और बरसात में घर के भीतर गिरते पानी की स्थिति देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। दोनों बहनों की पीड़ा को करीब से देखने के बाद मेघराज धाकड़ ने तत्काल उनके लिए पक्के मकान बनाने की घोषणा की।

इस अवसर पर मेघराज धाकड़ ने कहा कि सोशल मीडिया और समाचार माध्यमों के जरिए जब उन्हें अपनी जन्मभूमि की इन दोनों बहनों की परेशानी की जानकारी मिली तो उनके मन में यह भावना जागी कि यदि जन्मभूमि के लोग ऐसी कठिन परिस्थिति में जीवन जी रहे हैं तो उनकी सहायता करना उनकी नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “मैं स्वयं को केवल निमित्त मात्र मानता हूं। ईश्वर की प्रेरणा से हमारा ट्रस्ट दोनों बहनों को छह माह की अवधि में दो मकान बनाकर देगा।”

मेघराज धाकड़ ने भावुक होते हुए कहा, “15 अगस्त को मेरी माताजी कंकुबाई का 75वां जन्मदिन है। दोनों विधवा बहनों के लिए बनने वाले ये मकान मेरी माताजी की ओर से उनके 75वें जन्मदिन का उपहार हैं। जन्मदिन पर अक्सर हम अपने प्रियजनों को उपहार देते हैं, लेकिन मेरी इच्छा थी कि इस विशेष अवसर को किसी जरूरतमंद के जीवन में खुशियां और सुरक्षा देने के रूप में मनाया जाए। ईश्वर की प्रेरणा से यह सेवा का अवसर मिला है।”

उन्होंने प्रवासी समाज से भी अपनी जन्मभूमि के लिए आगे आने का आह्वान किया। धाकड़ ने कहा कि मुंबई सहित देश के विभिन्न शहरों में रहने वाले प्रवासियों का अपनी जन्मभूमि से गहरा भावनात्मक रिश्ता होता है। प्रवासियों को चाहिए कि वे अपनी जन्मभूमि के विकास और जरूरतमंद परिवारों की सहायता के लिए आगे आएं। किसी जरूरतमंद को सुरक्षित छत देना केवल आर्थिक सहयोग नहीं, बल्कि उसके जीवन में सम्मान, सुरक्षा और नई उम्मीद देना है।

ट्रस्ट की घोषणा सुनकर दोनों विधवा बहनों की आंखों में खुशी और भावुकता साफ दिखाई दी। वर्षों से जर्जर मकान में रहने के बाद उन्हें पहली बार सुरक्षित आशियाने की उम्मीद मिली। दोनों बहनों ने ट्रस्ट के प्रति आभार व्यक्त किया। स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि किसी जरूरतमंद के जीवन की सबसे बड़ी जरूरत को समझकर उसे पूरा करना ही सच्ची मानव सेवा है।

ग्रामीणों ने कहा कि माताजी के 75वें जन्मदिन को दो जरूरतमंद बहनों के लिए सुरक्षित आशियाने की सौगात से जोड़ना समाज के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है। मंगल चैरिटेबल ट्रस्ट की यह पहल मातृभक्ति, जन्मभूमि के प्रति कर्तव्य और मानव सेवा का सुंदर संगम बन गई है।

दोनों बहनों के लिए बनने वाले मकान उनके लिए सिर्फ ईंट-पत्थर की इमारत नहीं होंगे, बल्कि बरसों से झेली जा रही असुरक्षा, अभाव और बारिश की परेशानी से मुक्ति का नया अध्याय होंगे। इस अवसर पर कपिल जैन, भगवती धाकड़, विष्णु बागोरा सहित मंगल चैरिटेबल ट्रस्ट, मुंबई के पदाधिकारी एवं स्थानीय ग्रामीण मौजूद रहे।