चित्तौड़गढ़: आरएसएस के संघ शिक्षा वर्ग में 'पंच परिवर्तन' का आह्वान
नारायण लाल गमेती ने कुटुंब व्यवस्था, स्वदेशी और सामाजिक समरसता के माध्यम से समाज के कायाकल्प और लव जिहाद के प्रति सजग रहने पर जोर दिया।
चित्तौड़गढ़ के विद्या निकेतन में आयोजित संघ शिक्षा वर्ग के समापन समारोह के दौरान मंचासीन मुख्य वक्ता नारायण लाल गमेती और अन्य अतिथि गण।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), चित्तौड़ प्रांत द्वारा आयोजित 'संघ शिक्षा वर्ग शालेय विद्यार्थी' का विद्या निकेतन, गांधी नगर में सफलतापूर्वक समापन हो गया है। इस अवसर पर आयोजित भव्य समापन समारोह में मुख्य वक्ता के रूप में उपस्थित क्षेत्र सह प्रांत कार्यवाह नारायण लाल गमेती ने समाज के आमूलचूल कायाकल्प के लिए 'पंच परिवर्तन' का पुरजोर आह्वान किया। समारोह के मंच पर मुख्य अतिथि के रूप में आदित्य बिरला सीमेंट के यूनिट हेड उत्तम सिंह रॉय उपस्थित रहे। उनके साथ ही विद्यार्थी वर्ग के सर्वाधिकारी लक्ष्मण डामोर, विभाग संघ चालक चित्तौड़ हेमंत जैन तथा जिला संघ चालक अनिरुद्ध सिंह भाटी भी मंच पर गरिमामयी उपस्थिति में विराजमान रहे।
समारोह को मुख्य वक्ता के रूप में संबोधित करते हुए सह प्रांत कार्यवाह नारायण लाल गमेती ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पिछले 100 वर्षों से अत्यंत शांत मन से संपूर्ण हिन्दू समाज को संगठित करने के पुनीत कार्य में निरंतर जुटा हुआ है। उन्होंने इस बात पर विशेष बल दिया कि राष्ट्र और समाज में वांछित परिवर्तन लाने के लिए प्रत्येक नागरिक की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण और निर्णायक है। समाज को सही दिशा देने के लिए उन्होंने 'पंच परिवर्तन' का मंत्र देते हुए आह्वान किया कि ये पाँचों सूत्र देश की सभी सामाजिक संस्थाओं में अनिवार्य रूप से समाहित होने चाहिए। इन पाँच सूत्रों को स्पष्ट करते हुए उन्होंने कहा कि हमारे जीवन में कुटुंब व्यवस्था का पूरी निष्ठा से पालन हो, हम सभी स्वदेशी वस्तुओं का उपयोग करें और अपनी दैनिक दिनचर्या में स्वभाषा का ही व्यवहार करें। इसके साथ ही उन्होंने रेखांकित किया कि प्रकृति पूजन भारतीय संस्कृति की मूल प्राथमिकता है, हमें सदैव संविधान का अक्षरशः पालन करना चाहिए और सामाजिक समरसता को बढ़ावा देने के लिए हर घर का समाज के विभिन्न वर्गों में कोई न कोई मित्र अवश्य होना चाहिए।
गमेती ने पारिवारिक मूल्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महिलाओं का वास्तविक सम्मान स्वयं के परिवार से ही प्रारंभ होता है और वर्तमान में हो रहे धर्मांतरण को भी केवल पारिवारिक संस्कारों के सुदृढ़ीकरण के माध्यम से ही प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है। उन्होंने लव जिहाद जैसे अत्यंत संवेदनशील विषयों पर संपूर्ण समाज को हर समय पूरी तरह सजग और सतर्क रहने की आवश्यकता प्रतिपादित की। पर्यावरण संरक्षण को आज का परम दायित्व बताते हुए उन्होंने कहा कि पानी बचाना, पेड़ लगाना और समाज को पूरी तरह प्लास्टिक मुक्त बनाना हम सबका अनिवार्य कर्तव्य है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने देश को भ्रष्टाचार से मुक्त करने की शुरुआत भी सबसे पहले अपने स्वयं के परिवार से ही करने का आग्रह किया। सह प्रांत कार्यवाह ने समाज को प्रेरित किया कि हमारे मंदिर केवल पूजा स्थल न रहकर समाज परिवर्तन के सशक्त केंद्र बनें, जिसके लिए जन्मदिन जैसे मांगलिक प्रसंग भी मंदिरों में ही मनाए जाने चाहिए। उन्होंने यह भी व्यवस्था दी कि भविष्य में सभी सामाजिक कार्यक्रमों का प्रारंभ 'जन गण मन' से हो और उनका समापन अनिवार्य रूप से राष्ट्रगान से किया जाए।
कार्यक्रम के औपचारिक प्रारंभ में वर्ग कार्यवाह प्रवीण कुमार भार्गव ने उपस्थित जनसमुदाय के समक्ष वर्ग का विस्तृत प्रतिवेदन प्रस्तुत किया। उन्होंने जानकारी दी कि विद्या निकेतन के इस पवित्र स्थल पर आयोजित वर्ग में चित्तौड़ प्रांत के कुल 27 जिलों से आए 200 सामान्य विद्यार्थी वर्ग के शिक्षार्थियों ने सहभागिता की। इन सभी शिक्षार्थियों ने पूर्णतः अनुशासित रहते हुए अपने स्वयं के खर्च पर और बिना मोबाइल फोन के, प्रतिदिन प्रातः 4:00 बजे से लेकर रात्रि 10:30 बजे तक अनथक साधना और कड़ा प्रशिक्षण प्राप्त किया। इस वर्ग के सफल और सुचारू संचालन में 12 सदस्यों की कुशल संचालन टोली सहित 90 शिक्षकों एवं प्रबंधकों ने दिन-रात अथक परिश्रम किया। वर्ग की अवधि के दौरान कुल 327 लोगों के 15 दिनों तक निवास करने, गहन प्रशिक्षण, औषधालय तथा भोजन की समुचित एवं उत्तम व्यवस्था की गई थी। इस ऐतिहासिक समापन समारोह में सह प्रांत प्रचारक डॉ. धर्मेन्द्र सिंह सहित चित्तौड़ जिले के गणमान्य नागरिक, प्रबुद्ध जन, माताएं एवं भगिनियाँ भी बहुत बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं, जिन्होंने शिक्षार्थियों का उत्साहवर्धन कर कार्यक्रम को गरिमा प्रदान की।