बस्सी में आपसी खींचतान से विकास कार्य ठप्प, उपजिला अस्पताल के लिए जमीन तय

चित्तौड़गढ़ के बस्सी कस्बे में राजनीतिक गतिरोध के कारण ओवरब्रिज और अटल पथ जैसी करोड़ों की योजनाएं अधूरी पड़ी हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों को परेशानी हो रही है।

Update: 2026-06-02 14:35 GMT

चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र के सबसे बड़े कस्बे बस्सी में राजनीतिक खींचतान और अतिक्रमण के कारण सुस्त पड़ी विकास परियोजनाओं के बीच वाहनों के सुगम आवागमन के लिए प्रतीक्षारत एक अधूरा संपर्क मार्ग।

चित्तौड़गढ़ विधानसभा क्षेत्र के सबसे बड़े कस्बे बस्सी में नेताओं की आपसी खींचतान और कथित सफेदापोशों के व्यक्तिगत फायदों के चलते करोड़ों रुपए की विकास योजनाएं पूरी तरह ठप्प पड़ चुकी हैं। पिछली सरकार के कार्यकाल में स्वीकृत हुए कई महत्वपूर्ण कार्य आज भी अधुरे और ठप्प पड़े हैं, जिससे स्थानीय जनता को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस राजनीतिक गतिरोध के बीच एक बड़ी राहत की खबर यह आई है कि तीन साल से स्थान चयन को लेकर अटका उपजिला चिकित्सालय का निर्माण अब भीलवाड़ा मार्ग स्थित देवनारायण मंदिर के पास की १३ बीघा भूमि पर लगभग तय हो गया है। ग्राम पंचायत प्रशासन द्वारा इसके लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जारी कर दिया गया है।

इस चिकित्सालय के संबंध में जानकारी सामने आई है कि करीब एक सप्ताह पूर्व क्षेत्र के कई भाजपा नेता स्थानीय विधायक चंद्रभान सिंह आक्या से मिले थे और अस्पताल निर्माण कार्य जल्द शुरू करने का आग्रह किया था। पूर्व में निर्धारित स्थान पर ४० फीट चौड़ी सड़क की उपलब्धता न होने के कारण अब इसके स्थान में परिवर्तन कर उपजिला अस्पताल के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया गया है। क्षेत्र में यह भी पुरजोर चर्चा का विषय बना हुआ है कि इसी जमीन विवाद के मामले को लेकर विधायक ने क्षेत्र के एक व्यक्ति को जमकर खरी-खोटी भी सुनाई थी।




 




बस्सी क्षेत्र के शैक्षणिक और चिकित्सा ढांचे की स्थिति वर्तमान में अत्यंत दयनीय बनी हुई है। क्षेत्र में खोले गए कृषि महाविद्यालय के हालात पूरी तरह बेहाल हैं, जहां भूमाफियाओं ने महाविद्यालय परिसर के आसपास की बहुमूल्य मिट्टी खोदकर ऊंचे दामों में बेच दी है, परंतु उन्हें रोकने-टोकने वाला कोई प्रशासनिक तंत्र नजर नहीं आ रहा है। इसी प्रकार, राजकीय सीनियर सैकण्डरी विद्यालय में कृषि संकाय तो प्रारंभ कर दिया गया, लेकिन यहां विद्यार्थियों को पढ़ाने के लिए अध्यापक ही नियुक्त नहीं किए गए हैं, जिसके विरोध में छात्र लगातार शिक्षक लगाने की मांग उठा रहे हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की बात करें तो बस्सी में पिछले १० वर्षों से महिला चिकित्सक का पद रिक्त चल रहा है। महिला रोग विशेषज्ञ न होने के कारण आसपास के करीब १५० गांवों के ग्रामीणों को प्रसव एवं अन्य आपातकालीन उपचार के लिए जिला मुख्यालय चित्तौड़गढ़ की दौड़ लगानी पड़ती है, जहां से अधिकांश प्रसूताओं को आगे रेफर कर दिया जाता है।

इसके अतिरिक्त, बस्सी फोरलेन चौराहे पर ओवरब्रिज की स्वीकृति मिलने के बावजूद कुछ रसूखदारों ने इसमें रोड़ा अटका दिया है, जिससे सर्विस रोड का निर्माण कार्य भी पूरी तरह बंद पड़ा है। इसका मुख्य कारण यह है कि सड़क किनारे कई सफेदपोश नेताओं की बेशकीमती जमीनें आ रही हैं। यह भी प्रामाणिक जानकारी मिली है कि एक रसूखदार जनप्रतिनिधि ने पाल रोड पर स्थित सरकारी चरनोट भूमि पर रातों-रात जेसीबी मशीनें लगवाकर भारी मात्रा में मिट्टी अवैध रूप से खुदवाई और अपनी निजी जमीन पर डलवा दी, जिससे अन्य लोगों के जमीनों के रास्ते तक बंद हो गए। इसी कड़ी में, बस्सी-सोनगर मार्ग पर निर्माणाधीन अटल पथ का कार्य भी लंबे समय से बंद पड़ा है। इस अधूरे और क्षतिग्रस्त मार्ग के कारण प्रतिदिन दर्जनों वाहन दुर्घटनाग्रस्त हो रहे हैं और कई राहगीर गंभीर रूप से चोटिल हो चुके हैं, लेकिन क्षेत्र के जनप्रतिनिधि इस जनसमस्या के प्रति पूरी तरह संवेदनहीन बने हुए हैं।

कस्बे के ठीक बीचोंबीच स्थित उपजिला चिकित्सालय के इमरजेंसी द्वार पर भी एक स्थानीय व्यापारी ने अवैध रूप से अतिक्रमण कर रखा है। आपातकालीन द्वार के आसपास भारी मात्रा में व्यापारिक सामग्री बिखरी रहने के कारण एम्बुलेंस, पुलिस वाहनों और अन्य आपातकालीन गाड़ियों के आवागमन में भारी व्यवधान उत्पन्न हो रहा है। इससे पूर्व ग्राम पंचायत प्रशासन ने मुस्तैदी दिखाते हुए यहां से अतिक्रमण ध्वस्त कर सड़क का निर्माण करवाया था, इसके बावजूद उक्त अतिक्रमी ने दोबारा वहां कब्जा जमा लिया। आमजन का आरोप है कि इस अतिक्रमी को क्षेत्र के एक-दो रसूखदार जनप्रतिनिधियों का सीधा संरक्षण प्राप्त है, जिसके कारण चिकित्सालय का इमरजेंसी गेट पूरा नहीं खुल पा रहा है। इस अव्यवस्था से त्रस्त होकर स्थानीय व्यापारियों और मरीजों ने प्रशासन से जल्द से जल्द अतिक्रमण हटाने व चिकित्सा व्यवस्था में सुधार करने की पुरजोर मांग की है।

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