राजस्थान पुलिस का साइबर अलर्ट: फर्जी वेडिंग कार्ड और APK से दूर रहें
शादी के सीजन में व्हाट्सऐप पर आ रहे फर्जी मैरिज कार्ड और APK फाइल से साइबर ठगी का खतरा बढ़ा, राजस्थान पुलिस की R4C विंग ने जारी की विशेष एडवाइजरी।
तस्वीर में राजस्थान पुलिस का लोगो और 'साइबर एडवाइजरी डायल 1930' लिखा हुआ संदेश दिख रहा है।
निम्बाहेड़ा, जयपुर। शादी के सीजन में व्हाट्सऐप और सोशल मीडिया पर भेजे जा रहे ऑनलाइन वेडिंग कार्ड, होटल वेन्यू और प्री-वेडिंग फोटो-वीडियो साइबर ठगी का जरिया बन सकते हैं। राजस्थान पुलिस के साइबर क्राइम विंग आर4सी ने आमजन को सतर्क करते हुए संदिग्ध एपीके फाइल और फिशिंग लिंक से बचने की विशेष एडवाइजरी जारी की है।
महानिदेशक पुलिस राजस्थान श्री राजीव कुमार शर्मा के निर्देशानुसार राजस्थान पुलिस का साइबर क्राइम विंग आर4सी आमजन को साइबर अपराधों से सुरक्षित रखने के लिए लगातार जागरूक कर रहा है। इसी क्रम में ऑनलाइन वेडिंग कार्ड के नाम पर होने वाली संभावित साइबर ठगी को लेकर पुलिस ने सावधानी बरतने की अपील की है।
अतिरिक्त महानिदेशक पुलिस साइबर क्राइम श्री वीके सिंह ने बताया कि वेडिंग सीजन में साइबर ठग लोगों की खुशी और भावनाओं का फायदा उठाकर व्हाट्सऐप या अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर फर्जी शादी के निमंत्रण, होटल का पता, वेडिंग कार्ड अथवा प्री-वेडिंग फोटो-वीडियो के नाम पर संदिग्ध फाइल या लिंक भेज सकते हैं। इनके जरिए मोबाइल में मैलवेयर इंस्टॉल कर व्यक्तिगत जानकारी, एसएमएस/ओटीपी, बैंकिंग संबंधी जानकारी और अन्य संवेदनशील डेटा चोरी किया जा सकता है।
साइबर ठग व्हाट्सऐप पर यह कहते हुए मैसेज भेज सकते हैं कि “आपका हार्दिक स्वागत है, हमारी शादी का कार्ड और होटल का पता भेजा है” या “प्री-वेडिंग की फोटो और वीडियो हैं, जरूर देखना।” इसके साथ एपीके एक्सटेंशन वाली फाइल भी भेजी जा सकती है। एक क्लिक के बाद मोबाइल की सुरक्षा खतरे में पड़ सकती है।
साइबर क्राइम शाखा ने स्पष्ट किया है कि शादी का कार्ड, फोटो या वीडियो देखने के लिए एपीके फाइल डाउनलोड करने की आवश्यकता नहीं होती। सामान्यतः कार्ड पीडीएफ, जेपीजी/पीएनजी इमेज अथवा चैट में साझा किए जा सकते हैं। इसलिए संदिग्ध एपीके फाइल को डाउनलोड या इंस्टॉल नहीं करना चाहिए।
साइबर ठग फाइल के बजाय फिशिंग लिंक के जरिए भी लोगों को निशाना बना सकते हैं। ऐसे लिंक शादी के निमंत्रण, होटल बुकिंग या वेडिंग कार्ड देखने के नाम पर तैयार किए जा सकते हैं। लिंक खोलने पर फर्जी वेबसाइट मोबाइल नंबर, बैंक संबंधी जानकारी या अन्य संवेदनशील विवरण भरने के लिए कह सकती है। कुछ मामलों में संदिग्ध सॉफ्टवेयर डाउनलोड कराने का प्रयास भी किया जा सकता है।
पुलिस ने यह भी चेताया है कि परिचित या रिश्तेदार के नंबर से आया संदेश भी आंख मूंदकर भरोसा करने का कारण नहीं है। साइबर ठग किसी परिचित का व्हाट्सऐप अकाउंट हैक कर उसके नाम से मैसेज भेज सकते हैं, जैसे “भाई, शादी का कार्ड भेजा है, देखकर बताओ वेन्यू सही है या नहीं? मैं जल्दी में हूं।” परिचित के नंबर से संदेश आने के कारण व्यक्ति बिना सत्यापन किए लिंक या फाइल खोल सकता है।
ऐसे मामलों में साइबर अपराधी मोबाइल में मौजूद निजी फोटो, कॉन्टैक्ट, पासवर्ड, एसएमएस और अन्य संवेदनशील जानकारी तक पहुंच बनाने का प्रयास कर सकते हैं। संक्रमित मोबाइल से संबंधित व्यक्ति के संपर्कों को भी इसी तरह के संदिग्ध संदेश भेजे जा सकते हैं।
राजस्थान पुलिस ने सलाह दी है कि शादी का कार्ड या फोटो देखने के लिए एपीके फाइल डाउनलोड या इंस्टॉल न करें। मोबाइल में ‘इंस्टॉल अननोन ऐप्स’ या ‘अननोन सोर्सेज’ विकल्प बंद रखें। परिचित या रिश्तेदार के नंबर से संदिग्ध लिंक या फाइल आने पर कॉल करके पहले पुष्टि करें। अनजान लिंक पर क्लिक कर मोबाइल नंबर, बैंकिंग जानकारी, ओटीपी या अन्य संवेदनशील जानकारी दर्ज न करें।
यदि गलती से संदिग्ध ऐप डाउनलोड हो गया है तो तुरंत इंटरनेट बंद या फोन फ्लाइट मोड पर करें, संदिग्ध ऐप को अनइंस्टॉल करें और मोबाइल को विश्वसनीय सुरक्षा एप्लिकेशन से स्कैन करें। आवश्यकता होने पर एम-कवच 2 या ई-स्कैन बॉट रिमूवल टूल जैसे विश्वसनीय मोबाइल सुरक्षा टूल का उपयोग किया जा सकता है।
राजस्थान पुलिस ने अपील की है कि साइबर ठगी का शिकार होने या ठगी का प्रयास होने पर बिना देरी किए नजदीकी पुलिस थाने या साइबर पुलिस स्टेशन में सूचना दें। साइबर अपराध की शिकायत साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल cybercrime.gov.in पर अथवा साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर की जा सकती है। इसके अलावा राजस्थान साइबर हेल्पडेस्क नंबर 9256001930 / 9257510100 पर भी सूचना दी जा सकती है। शादी के निमंत्रण के नाम पर भेजी गई एक संदिग्ध फाइल या लिंक गंभीर साइबर जोखिम का कारण बन सकती है, इसलिए किसी भी संदेश को सत्यापित किए बिना खोलने से बचना जरूरी है।