न्युवोको ने चित्तौड़ सीमेंट प्लांट में राजमिस्त्रियों के लिए आरपीएल प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया
न्युवोको ने चित्तौड़ सीमेंट प्लांट में राजमिस्त्रियों के लिए आरपीएल प्रशिक्षण शुरू किया, 75 श्रमिकों को कौशल प्रमाणन मिलेगा।
तस्वीर में चित्तौड़ सीमेंट प्लांट में आयोजित ‘न्युवो मेसन’ कौशल विकास कार्यक्रम के दौरान प्रशिक्षण कक्ष में बैठे राजमिस्त्री और मौजूद अधिकारी नजर आ रहे हैं।
न्युवोको विस्टास कॉर्प लिमिटेड ने अपने प्रमुख सीएसआर कार्यक्रम ‘न्युवो मेसन’ के तहत चित्तौड़ सीमेंट प्लांट में राजमिस्त्रियों के लिए रिकग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग (आरपीएल) प्रशिक्षण कार्यक्रम का उद्घाटन किया। कार्यक्रम का उद्देश्य अनुभवी राजमिस्त्रियों के कौशल को औपचारिक रूप से मान्यता देकर प्रमाणित करना तथा व्यवस्थित प्रशिक्षण और व्यावहारिक प्रदर्शन के माध्यम से उनकी तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाना है।
न्युवोको मेसन निर्माण श्रमिकों को सशक्त बनाने के लिए तैयार किया गया कौशल विकास कार्यक्रम है। इसका उद्देश्य राजमिस्त्रियों के मेसनरी कौशल को मजबूत करना, रोजगार की संभावनाओं में सुधार करना और टिकाऊ आजीविका के अवसर उपलब्ध कराना है। रिकग्निशन ऑफ प्रायर लर्निंग ढांचे के तहत कार्यक्रम अनुभवी राजमिस्त्रियों के मौजूदा कौशल का आकलन करता है और उन्हें उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप औपचारिक प्रमाणन प्रदान करता है।
कार्यक्रम के तहत तीन बैचों में कुल 75 मौजूदा राजमिस्त्रियों को शामिल किया जाएगा। 25 राजमिस्त्रियों वाले पहले बैच का उद्घाटन चित्तौड़ सीमेंट प्लांट और न्युवोको विस्टास के अधिकारियों की मौजूदगी में किया गया। इसमें मानव संसाधन, गुणवत्ता, व्यवसाय विकास और सीएसआर टीमों के प्रतिनिधि शामिल रहे।
कार्यक्रम को स्थानीय समुदाय से उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली। कई अन्य राजमिस्त्रियों ने भी प्रशिक्षण के लिए स्वेच्छा से पंजीकरण कराया। कार्यक्रम को कार्यरत राजमिस्त्रियों की तकनीकी क्षमता बढ़ाने के लिए कौशल आकलन, व्यवस्थित प्रशिक्षण और व्यावहारिक प्रदर्शन के संयोजन के साथ तैयार किया गया है।
इसके पाठ्यक्रम में आधुनिक निर्माण तकनीक, गुणवत्ता मानक, व्यावसायिक स्वास्थ्य एवं सुरक्षा प्रक्रियाएं तथा निर्माण सामग्री के कुशल उपयोग को केंद्र में रखा गया है। सफल आकलन के बाद प्रतिभागियों को एनएसडीसी-मान्यता प्राप्त प्रमाणपत्र प्रदान किया जाएगा, जिससे उनकी पेशेवर विश्वसनीयता बढ़ेगी और उन्हें बेहतर आजीविका के अवसर प्राप्त होंगे।
इस पहल के माध्यम से अनुभवी राजमिस्त्रियों के पहले से अर्जित कौशल को औपचारिक मान्यता देने के साथ उनकी तकनीकी दक्षता को उद्योग की आवश्यकताओं के अनुरूप मजबूत करने पर जोर दिया गया है।