एक बड़े पंडाल में टेबल कुर्सी पर बैठकर भोजन करते जैन श्रद्धालु दिख रहे हैं।

निम्बाहेड़ा में जैन श्वेताम्बर मूर्तिपूजक सकल श्रीसंघ की ओर से आयोजित नौ दिवसीय सामूहिक ओली आराधना का मंगलवार, 27 अक्टूबर को पारणे के साथ समापन हुआ। जैन धर्म में तप, त्याग और संयम की साधना से जुड़े इस आयोजन में प्रतिदिन करीब 300 आराधकों ने निर्धारित नियमों का पालन करते हुए तपस्या की। नौ दिनों के दौरान 2700 अन्य श्रावक-श्राविकाओं और आराधकों सहित कुल 3100 आयंबिल संपन्न हुए। समापन अवसर पर तपस्वियों की तपस्या की अनुमोदना कर उन्हें वंदन किया गया और पारणे की शुभकामनाएं दी गईं।

श्रीराजेन्द्र सूरिष्वर जी ज्ञान मंदिर परिसर में विराजित पूज्य आचार्य महाराज सा. संघ में आयोजित सामूहिक ओली आराधना के मुख्य लाभार्थी मुकेश कुमार और कल्पित कुमार नागौरी रहे। यह आयोजन ओलीजी के मुख्य आयोजक की ओर से पूज्य आचार्य भगवंत श्री निपुणरत्न सूरीश्वरजी के शिष्य प्रवर श्री राजरत्न विजयजी महाराज साहब की 100वीं ओली के अनुमोदनार्थ किया गया। आसोज सुदी सातम तक चले इस धार्मिक आयोजन में श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर धर्म आराधना की।

आयोजन के दौरान आराधकों ने लगातार नौ दिनों तक निर्धारित नियमों के अनुसार उबला हुआ सात्विक भोजन ग्रहण किया। इस दौरान भोजन में तेल, घी, दूध, दही और ड्राईफ्रूट का सेवन नहीं किया गया। आराधकों ने एक आसन पर टेबल-कुर्सी पर बैठकर भोजन किया और तप के नियमों का पालन किया। इसके अतिरिक्त अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने अलग-अलग आयंबिल तप की आराधना भी की। इस तरह नौ दिनों में कुल 3100 आयंबिल संपन्न हुए।

जैन धर्म में ओली आराधना और आयंबिल तप का विशेष महत्व है। इस साधना में खानपान संबंधी नियमों का पालन करते हुए स्वाद का त्याग कर आत्मसंयम और आध्यात्मिक साधना की जाती है। नौ दिनों तक कठिन नियमों के साथ तपस्या करने वाले आराधकों के प्रति समाजजनों और आनंदीलाल, कल्याणमल, मोहनलाल, नक्षत्र मल, दिलीप कुमार, मुकेश कुमार, दिनेश, विश्वास कुमार, हर्षवर्धन, संजय एवं नागौरी परिवार, निम्बाहेड़ा ने श्रद्धा व्यक्त की और उनकी तपस्या की खूब-खूब अनुमोदना की।

आयोजन की व्यवस्थाएं मुख्य लाभार्थी परिवार मुकेश कुमार, कल्पित नागौरी परिवार और सकल जैन श्रीसंघ ग्रुप की ओर से संभाली गईं। इस दौरान समाजजनों ने बारी-बारी से व्यवस्थाओं में सहयोग दिया। तपस्या पूर्ण करने वाले आराधकों को प्रभावना स्वरूप उपहार भी प्रदान किए गए। मंगलवार, 27 अक्टूबर को सभी आराधकों के पारणे के साथ सामूहिक ओली आराधना संपन्न हुई। इस अवसर पर तपस्वियों के उत्तम स्वास्थ्य, सुख-शांति और निरंतर धर्म आराधना की मंगलकामना की गई।

इस धार्मिक आयोजन में निम्बाहेड़ा के अलावा नीमच, मंदसौर, छोटी सादड़ी, चित्तौड़गढ़, कपासन, बड़सर, निकुंभ, बड़ीसादड़ी, प्रतापगढ़, जयपुर, भीलवाड़ा, अजमेर, किशनगढ़, कोटा, धरियावद, देवास, उज्जैन, पीपलिया मंडी, बूढ़ा, अवर, बोलिया, रतलाम, नौगावां, उदयपुर और डडोली सहित विभिन्न स्थानों से श्रावक-श्राविकाओं ने सहभागिता निभाई।

इसके अलावा कांकरोली, नीमच, नयांगाव, बाडी, जीरन, आवरीमाता जी, बानसेन, बडीसादडी, सांवरियाजी, अभादसौडा, मोडी, बिजोलिया, उदयपुर, षम्भूपूरा, लसडावन, रायपुर, जयपुर, बिजयनगर, हिम्मत नगर, केलवा, चिकारडा और बारावरदा आदि गांवों से आए आराधकों और तपस्वियों की तपस्या, त्याग तथा धर्म के प्रति समर्पण की अनुमोदना की गई। समाजजनों ने उनके सुखमय जीवन और निरंतर धर्म आराधना की मंगलकामना की। नौ दिनों तक चले इस आयोजन का समापन तपस्या पूर्ण करने वाले आराधकों के पारणे के साथ हुआ।

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