तस्वीर में जिला परिषद सभागार, चित्तौड़गढ़ में जिला कलक्टर डॉ. मंजू की अध्यक्षता में आरयूआईडीपी संवाद कार्यक्रम के दौरान बैठक में बैठे अधिकारी और जनप्रतिनिधि।

चित्तौड़गढ़। राजस्थान नगरीय आधारभूत विकास परियोजना (आरयूआईडीपी) के पंचम चरण के तहत शहर में प्रस्तावित 31.01 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं को लेकर बुधवार को जिला परिषद के ग्रामीण विकास अभिकरण सभागार में आरयूआईडीपी संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में शहर के जनप्रतिनिधियों, पूर्व पार्षदों, प्रबुद्धजनों, विभिन्न विभागों के अधिकारियों, मीडिया प्रतिनिधियों, महिला प्रतिनिधियों तथा अन्य स्टेकहोल्डर्स के साथ प्रस्तावित विकास कार्यों पर विस्तृत चर्चा की गई और उनके सुझाव एवं फीडबैक प्राप्त किए गए।

कार्यक्रम में जिला कलक्टर डॉ. मंजू ने मुख्य अतिथि के रूप में सहभागिता करते हुए परियोजनाओं के प्रभावी, गुणवत्तापूर्ण और समयबद्ध क्रियान्वयन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि विकास परियोजनाओं का क्रियान्वयन इस प्रकार किया जाए कि आमजन को न्यूनतम असुविधा हो। उन्होंने कहा कि सीवरेज परियोजनाओं के दौरान कई प्रकार की तकनीकी एवं व्यावहारिक चुनौतियां सामने आती हैं, इसलिए सभी संबंधित एजेंसियां बेहतर समन्वय के साथ कार्य करें।

जिला कलक्टर ने पूर्व अनुभवों का उल्लेख करते हुए कहा कि चित्तौड़गढ़ में आरयूआईडीपी द्वारा सभी कार्य गुणवत्ता, पारदर्शिता और समयबद्धता के साथ पूरे किए जाएं, जिससे नागरिकों को दीर्घकालिक लाभ मिल सके। उन्होंने कार्यशाला के दौरान प्राप्त रचनात्मक सुझावों को परियोजना के लिए उपयोगी बताते हुए उन्हें गंभीरता से शामिल करने के निर्देश दिए।

कार्यक्रम में आरयूआईडीपी अधिकारियों ने पंचम चरण में प्रस्तावित विकास कार्यों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण भी दिया। अधिकारियों ने बताया कि एशियन विकास बैंक के वित्तीय सहयोग से शहर में 17.31 करोड़ रुपये की लागत से अपशिष्ट जल प्रबंधन एवं शोधित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग से संबंधित कार्य किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त 5.71 करोड़ रुपये की लागत से बाढ़ प्रबंधन एवं ड्रेनेज कार्य तथा लगभग 8 करोड़ रुपये की लागत से कमांड एंड कंट्रोल सेंटर, विरासत संरक्षण एवं पर्यटन विकास से जुड़े कार्य प्रस्तावित हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य शहर में आधारभूत सुविधाओं को सुदृढ़ करना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना तथा नागरिकों को बेहतर शहरी सेवाएं उपलब्ध कराना है।

आरयूआईडीपी के सहायक अभियंता रामेश्वर जाट ने प्रस्तुतीकरण के माध्यम से पंचम चरण की परियोजनाओं की तकनीकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि विभाग परियोजना के सभी कार्य निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप एवं तय समयसीमा में पूर्ण करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने आश्वस्त किया कि संवाद कार्यक्रम के दौरान प्राप्त सुझावों एवं फीडबैक का परीक्षण कर आवश्यकतानुसार उन्हें परियोजना में शामिल किया जाएगा।

कार्यक्रम के दौरान आरयूआईडीपी द्वारा विभिन्न शहरों में किए गए विकास कार्यों पर आधारित एक वृत्तचित्र का भी प्रदर्शन किया गया। इसके बाद आयोजित खुले संवाद सत्र में प्रतिभागियों ने सीवरेज, ड्रेनेज, शोधित अपशिष्ट जल के पुनः उपयोग, विरासत संरक्षण तथा अन्य प्रस्तावित कार्यों से जुड़े विभिन्न प्रश्न और सुझाव रखे, जिनका अधिकारियों ने विस्तारपूर्वक समाधान किया। संवाद कार्यक्रम के माध्यम से प्रस्तावित परियोजनाओं पर विभिन्न हितधारकों की सहभागिता सुनिश्चित करते हुए उनके सुझावों को परियोजना के क्रियान्वयन की प्रक्रिया से जोड़ा गया।

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