चित्तौड़गढ़ में सनातन संस्कार शिविर शुरू, बटुकों को दिया यज्ञ का प्रशिक्षण

चित्तौड़गढ़ के श्री सांवलियाजी विश्रांति गृह में आयोजित दस दिवसीय शिविर के विशेष सत्र में शिविरार्थियों को हवन की शास्त्रीय विधि और वैदिक मंत्रोच्चार का अभ्यास कराया गया।

Update: 2026-06-05 14:11 GMT

चित्तौड़गढ़ के श्री सांवलियाजी विश्रांति गृह में आयोजित दस दिवसीय सनातन संस्कार शिविर के दौरान प्रशिक्षकों की देखरेख में बटुक और अन्य शिविरार्थी वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ कुंड में आहुति देने की शास्त्रीय विधि का व्यावहारिक अभ्यास कर रहे हैं।

चित्तौड़गढ़। ऊं तत्सत् पारमार्थिक संस्था के तत्वावधान में किला रोड स्थित श्री सांवलियाजी विश्रांति गृह में आयोजित दस दिवसीय सनातन संस्कार शिविर सांस्कृतिक और धार्मिक चेतना का केंद्र बन गया है। 3 से 12 जून तक चलने वाले इस भव्य शिविर में प्रतिदिन धर्म, संस्कृति एवं वैदिक परंपराओं से संबंधित विविध प्रशिक्षण सत्रों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बालक, बालिकाएँ, युवक, युवतियाँ, महिलाएँ एवं पुरुष अत्यंत उत्साहपूर्वक भाग ले रहे हैं। शिविरार्थी यहाँ सनातन धर्म के गूढ़ रहस्यों, वैदिक ज्ञान एवं जीवनोपयोगी संस्कारों को आत्मसात करने का गंभीर प्रयास कर रहे हैं।

इसी शृंखला में शुक्रवार के विशेष सत्र के दौरान सभी बटुकों एवं शिविरार्थियों को यज्ञ की वैदिक एवं शास्त्रीय विधि का विस्तृत और व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान किया गया। योग्य प्रशिक्षकों के गहन मार्गदर्शन में शिविरार्थियों ने यज्ञ के वैज्ञानिक व आध्यात्मिक महत्व को समझा। इसके साथ ही उन्होंने हवन की संपूर्ण प्रक्रिया, हवनीय सामग्री के सटीक चयन एवं उपयोग, विभिन्न देवताओं के निमित्त आहुति प्रदान करने की शास्त्रीय विधि तथा शुद्ध वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यज्ञ संपादन की समृद्ध परंपराओं का गहन अभ्यास किया। इस प्रशिक्षण के पश्चात समस्त शिविरार्थियों ने सामूहिक रूप से राष्ट्र मंगल, चराचर जगत की सुख-समृद्धि एवं विश्व कल्याण की उदात्त भावना के साथ यज्ञ कुंड में आहुतियाँ अर्पित कीं, जिससे पूरा परिसर वैदिक ऋचाओं से गुंजायमान हो उठा।

शिविर के मुख्य वक्ता दिनेशचंद्र भट्ट ने बौद्धिक सत्र को संबोधित करते हुए भारतीय सनातन संस्कृति के ऐतिहासिक वैभव, सर्वधर्म समभाव तथा वैदिक ज्ञान परंपरा के शाश्वत महत्व पर विस्तार से प्रकाश डाला और इसे मानव जीवन का आधार बताया। इसके उपरांत, तकनीकी सत्रों में ज्योतिषाचार्य पं विकास उपाध्याय द्वारा शिविरार्थियों को दैनिक जीवन के अनिवार्य अंग संध्या-वंदन की विधि एवं पंचांग ज्ञान का व्यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया। वहीं, प्रो. श्यामसुंदर पारीक ने संस्कृत संभाषण, विभिन्न रोचक ज्ञानवर्धक गतिविधियों एवं विविध क्रीड़ा प्रतियोगिताओं के माध्यम से शिक्षण पद्धति को अत्यंत सहज, सुगम एवं मनोरंजक बनाया, जिसे संस्कारी युवाओं ने खूब सराहा।

इस वृहद आयोजन को धरातल पर उतारने और शिविर के सफल संचालन एवं प्रशिक्षण व्यवस्था को त्रुटिहीन बनाने में पं कौशल शर्मा, पं अंकित शर्मा, पं दीपक शर्मा, प कृष्णगोपाल, पं पीयूष शर्मा, पं कीर्तन शर्मा, पं अनिल रामचौक, पं रतन शर्मा, पं अक्षय शर्मा, ओमप्रकाश शर्मा और प रोहित व्यास सहित अनेक समर्पित कार्यकर्ताओं का महत्वपूर्ण और सक्रिय सहयोग रहा। वहीं दूसरी ओर, शिविर की समस्त व्यवस्थाओं को सुचारु, व्यवस्थित और भव्य रूप से संचालित करने में ओमप्रकाश उपाध्याय, प शशिकांत चतुर्वेदी, नंदकिशोर जोशी, बद्रीलाल शर्मा, मदन शर्मा, जगदीशचंद्र शर्मा और प्रदीप दीक्षित का मार्गदर्शन अग्रणिय रहा, जिनके कुशल प्रबंधन से यह आयोजन चित्तौड़गढ़ में सनातन संस्कृति के संवर्धन में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हो रहा है।

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