बड़ी सादड़ी स्थित निरंकारी सत्संग स्थल पर साप्ताहिक सत्संग के दौरान संगत को संबोधित करते हुए प्रचारक महात्मा हरजिंदर सिंह।   

बड़ी सादड़ी स्थित निरंकारी सत्संग स्थल पर आयोजित जनरल साप्ताहिक सत्संग में प्रचारक महात्मा हरजिंदर सिंह सूरतगढ़ ने सेवा, भक्ति और नम्रता का महत्व बताते हुए कहा कि जो सेवा दिल से की जाए, वही सच्ची और सबसे अच्छी सेवा होती है। सेवा में तन के साथ मन का समर्पण भी आवश्यक है। सेवा तभी सार्थक होती है, जब उसमें अहंकार के बजाय नम्रता और दास भावना हो।

सत्संग में महात्मा हरजिंदर सिंह ने कहा कि सेवा का महत्व एक सेवादार भक्त ही समझ सकता है। वही भक्ति के वास्तविक स्वरूप को जानता है। भक्त एक खिला हुआ फूल होता है और भक्ति उसकी महक होती है। सेवा वही व्यक्ति कर सकता है, जो नम्रता और दास भावना के साथ कार्य करता है। अहंकारी व्यक्ति सच्ची सेवा नहीं कर सकता। सच्चा सेवक स्वयं को सेवा का कर्ता भी नहीं मानता। इसी भावना के साथ सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज ने जीवन में नर सेवा को नारायण सेवा के रूप में अपनाने का संदेश दिया है।

संगत इंचार्ज राधेश्याम रेगर ने बताया कि संत निरंकारी मिशन का 79वां अंतरराष्ट्रीय वार्षिक संत समागम 23 से 26 अक्टूबर तक हरियाणा के पानीपत समालखा स्थित आध्यात्मिक स्थल पर आयोजित होगा। इस समागम में शामिल होने के लिए 22 अक्टूबर को भीलवाड़ा जॉन 21A से हजारों निरंकारी श्रद्धालु समालखा के लिए प्रस्थान करेंगे।

उन्होंने कहा कि संत समागम मानव जीवन में प्रभु प्राप्ति की जिज्ञासा को शांत करने का सुनहरा अवसर है। यह आत्मतत्व को पहचानने का भी अवसर प्रदान करता है। जिस स्थान पर प्रभु के भक्त निवास करते हैं, वह स्वर्ग से भी सुंदर बन जाता है। निरंकारी संत समागम भी ऐसा ही अवसर होगा, जहां धरती पर स्वर्ग जैसी अनुभूति होगी।

राधेश्याम रेगर ने कहा कि सद्गुरु माता सुदीक्षा जी महाराज से निराकार परमात्मा को जान चुके निरंकारी भक्त सभी में भगवान का स्वरूप देखते हैं। इसी भावना के कारण वे एक-दूसरे को गले लगाते हैं। ऐसा स्थान किसी स्वर्ग से कम नहीं होता। कार्यक्रम का संचालन बाल संत पुष्पेंद्र ने किया।

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