बड़ी सादड़ी में लिंकोड़ा रोड के अतिक्रमण पर बड़ा फैसला, रामलाल का स्थगन आदेश खारिज
बड़ी सादड़ी में पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्टेडियम से सटे लिंकोड़ा रोड पर अतिक्रमण हटाने का रास्ता साफ हो गया है। रामलाल को मिली स्थगन राहत न्यायालय ने खारिज कर दी। जानिए मामले में नगरपालिका की पैरवी और भूमि आवंटन के कथित पत्र पर क्या दलील दी गई।
बड़ी सादड़ी में नीमच रोड स्थित लिंकोड़ा रास्ते पर बना कथित अवैध निर्माण।
बड़ी सादड़ी में नगरपालिका की नीमच रोड स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्टेडियम से सटे लिंकोड़ा रास्ते पर कथित अवैध अतिक्रमण हटाने का रास्ता साफ हो गया है। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई के खिलाफ कब्जाधारी रामलाल की ओर से प्राप्त स्थगन आदेश को न्यायालय ने खारिज कर दिया है। इससे नगरपालिका अब संबंधित अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ा सकेगी।
इस मामले में खेल प्रेमियों और जागरूक नागरिकों ने रास्ते पर किए गए अतिक्रमण को हटाने की मांग की थी। उनकी मांग पर उपखंड अधिकारी, बड़ी सादड़ी ने नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाने के आदेश दिए थे। हालांकि, इन आदेशों के खिलाफ अतिक्रमणकारी ने न्यायालय से स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया था, जिसके चलते अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई प्रभावित हुई।
मामले की सुनवाई के दौरान नगरपालिका के अधिवक्ता जगदीश प्रसाद वैष्णव ने नगरपालिका की ओर से पैरवी की। उन्होंने न्यायालय में अतिक्रमणकारी के विरुद्ध उपलब्ध साक्ष्य प्रस्तुत किए। अधिवक्ता ने तर्क दिया कि रत्तिचन्द जी का खेड़ा ग्राम पंचायत में आवासीय मकान रखने वाला व्यक्ति नगरपालिका की बेशकीमती जमीन पर अवैध रूप से कब्जा करके नहीं रह सकता।
सुनवाई के दौरान 6 फरवरी 2026 को जिला कलेक्टर, चित्तौड़गढ़ को लिखा गया एक पत्र भी पेश किया गया। यह पत्र तत्कालीन नगरपालिका अध्यक्ष विनोद कंठालिया की ओर से लिखा गया था, जिसमें संबंधित भूमि अतिक्रमणकारी को आवंटित किए जाने का कथित उल्लेख था। इस पर नगरपालिका के अधिवक्ता जगदीश प्रसाद वैष्णव ने अधिशाषी अधिकारी का पक्ष रखते हुए कहा कि यह पत्र व्यक्तिगत हो सकता है, क्योंकि नगरपालिका मंडल की किसी भी बैठक में भूमि आवंटन से संबंधित ऐसा कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया गया था।
दोनों पक्षों की ओर से प्रस्तुत तथ्यों और साक्ष्यों पर सुनवाई के बाद सिविल न्यायाधीश मोहित कुमार चायल ने अतिक्रमणकारी रामलाल की ओर से प्रस्तुत प्रार्थना पत्र तथा अतिक्रमण हटाने के आदेश पर लगाई गई रोक को खारिज कर दिया। न्यायालय के इस फैसले से नगरपालिका के लिए संबंधित भूमि से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई का रास्ता खुल गया है।
इस मामले में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर नगरपालिका की भूमिका भी चर्चा में रही। स्थानीय स्तर पर इस अतिक्रमण को हटवाने के लिए कई बार ज्ञापन सौंपे गए थे। वार्ड के तत्कालीन पार्षद जगदीश कंडारा ने स्वयं उपखंड अधिकारी, जिला कलेक्टर, अधिशाषी अधिकारी और नगरपालिका अध्यक्ष को ज्ञापन देकर अतिक्रमण हटाने की मांग की थी। इसके बावजूद लंबे समय तक कार्रवाई नहीं हुई, जिसका फायदा उठाकर अतिक्रमणकारी ने स्थगन आदेश प्राप्त कर लिया था।
अब न्यायालय द्वारा स्थगन आदेश खारिज किए जाने के बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई आगे बढ़ने की संभावना बनी है। इस फैसले को सार्वजनिक भूमि पर अतिक्रमण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण कानूनी घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह संदेश भी सामने आया है कि सरकारी भूमि पर अतिक्रमण के मामलों में कानूनी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जा सकती है और ऐसे मामलों में न्यायालय का निर्णय निर्णायक भूमिका निभा सकता है।