बड़ी सादड़ी में 15 साल से गौ सेवा की मिसाल, रोज सुबह 4:45 बजे जुटते हैं दो दोस्त
राजस्थान के बड़ी सादड़ी में वीरेंद्र कुमार मेहता और दिलीप कुमार मोगरा पिछले 15 वर्षों से रोज सुबह 4:45 बजे गौ सेवा के लिए दान जुटा रहे हैं। बिना रसीद चलने वाली इस पहल में हरे चारे की व्यवस्था और चारा स्टैंड भी शामिल हैं।
बड़ी सादड़ी में 15 वर्षों से गौ सेवा के लिए दान एकत्र करने वाले वीरेंद्र मेहता और दिलीप मोगरा।
बड़ी सादड़ी में दो मित्र पिछले 15 वर्षों से बिना किसी प्रचार और रसीद के गौ सेवा के लिए दान एकत्र कर रहे हैं। 61 वर्षीय वीरेंद्र कुमार मेहता और 60 वर्षीय दिलीप कुमार मोगरा रोज सुबह 4:45 बजे से 7:15 बजे तक घंटाघर चौराहे पर बैठकर लोगों से श्रद्धानुसार दान लेते हैं। कड़ाके की ठंड हो या बारिश, दोनों मित्रों की यह दिनचर्या कभी नहीं बदली है।
जब शहर के अधिकांश लोग सुबह की नींद में होते हैं, तब वीरेंद्र कुमार मेहता और दिलीप कुमार मोगरा गौ सेवा के अपने संकल्प को पूरा करने में जुट जाते हैं। दोनों मित्र पिछले 15 वर्षों से लगातार घंटाघर चौराहे पर पहुंचकर गौ सेवा के लिए दान एकत्र कर रहे हैं। उनकी इस पहल में न किसी बड़े संगठन का सहारा है और न ही प्रचार-प्रसार का कोई तामझाम। पूरी व्यवस्था आपसी विश्वास और सेवा के संकल्प पर आधारित है।
दान एकत्र करने के इस तरीके की खास बात यह है कि यहां किसी प्रकार की रसीद नहीं दी जाती। लोग अपनी श्रद्धा के अनुसार दान राशि सौंपते हैं। यह राशि सैकड़ों रुपये में हो या हजारों रुपये में, पूरी प्रक्रिया विश्वास के आधार पर चलती है। दोनों मित्रों ने 15 वर्षों से इस व्यवस्था को नियमित रूप से जारी रखा है।
दान राशि एकत्र होने के बाद उसका उपयोग गौशाला के लिए हरा चारा खरीदने में किया जाता है। दोनों मित्र उसी समय और उसी दिन हरे चारे की पिकअप गाड़ी लोड करवाकर सीधे गौशाला पहुंचवाते हैं। इस तरह एकत्रित राशि का उपयोग बिना देरी के गौ सेवा के लिए किया जाता है। बीते 15 वर्षों में मौसम और परिस्थितियां बदलती रहीं, लेकिन सुबह 4:45 बजे से 7:15 बजे तक घंटाघर चौराहे पर पहुंचने का उनका नियम नहीं बदला।
घंटाघर चौराहे पर गौ सेवा के लिए दो चारा स्टैंड भी बनाए गए हैं। जो लोग आर्थिक दान देने के बजाय अपने हाथों से पशुओं को चारा खिलाना चाहते हैं, वे इन स्टैंड में चारा डाल सकते हैं। चौराहे पर आने वाले पशुओं को खिलाने के लिए की गई इस व्यवस्था का उद्देश्य वहां कचरा और गंदगी फैलने से रोकना भी है। बचा हुआ चारा गौशाला पहुंचा दिया जाता है।
वीरेंद्र कुमार मेहता और दिलीप कुमार मोगरा की यह पहल अब बड़ी सादड़ी में निःस्वार्थ मित्रता और निरंतर गौ सेवा की मिसाल बन गई है। दोनों मित्रों की दिनचर्या केवल धार्मिक या सामाजिक गतिविधि तक सीमित नहीं है, बल्कि यह साझा संकल्प के साथ वर्षों तक सेवा जारी रखने का उदाहरण भी है।
सर्दी की कड़कड़ाती ठंड हो या मूसलाधार बारिश, दोनों मित्रों के लिए समय और स्थान नहीं बदलते। भोर में घंटाघर चौराहे पर उनकी मौजूदगी और बिना दिखावे के गौ सेवा का यह प्रयास पिछले 15 वर्षों से लगातार जारी है। उनकी पहल बताती है कि दृढ़ संकल्प और आपसी विश्वास के सहारे बिना बड़े संगठन या प्रचार के भी किसी सामाजिक सेवा कार्य को लंबे समय तक निरंतर चलाया जा सकता है।