वंडर सीमेंट में आचार्य पुलकसागरजी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश, पाटनी परिवार की सादगी और धर्मनिष्ठा की सराहना

निम्बाहेड़ा के वंडर सीमेंट परिसर में आचार्य पुलकसागरजी महाराज का भव्य मंगल प्रवेश हुआ। प्रवचन में पाटनी परिवार की सादगी, धर्म सेवा और समर्पण की सराहना की।

Update: 2026-07-03 13:47 GMT

तस्वीर में (विभिन्न फ्रेमों में) जैन संत आचार्य पुलकसागरजी महाराज को मंच से प्रवचन देते और पाटनी परिवार सहित वंडर सीमेंट के अधिकारियों द्वारा उनका स्वागत व पूजन करते हुए देखा जा सकता है।

निम्बाहेड़ा स्थित वंडर सीमेंट लिमिटेड परिसर में शुक्रवार को आचार्य श्री 108 पुष्पदन्त सागरजी महाराज के परम शिष्य आचार्य श्री पुलकसागरजी महाराज का ससंघ भव्य मंगल प्रवेश हुआ। इस अवसर पर वंडर सीमेंट के वाइस चेयरमैन विमल पाटनी, श्रीमती तारिका पाटनी सहित पाटनी परिवार, आर.के. मार्बल के निर्मल दोषी, वंडर सीमेंट के निदेशक परमानन्द पाटीदार, यूनिट हेड नितिन जैन तथा अन्य अधिकारियों ने विधिवत स्वागत किया। सभी ने मुनि श्री के पद प्रक्षालन कर धर्म के प्रति अपनी आस्था और निष्ठा प्रकट की।

अपने मंगल प्रवचन में आचार्य पुलकसागरजी महाराज ने गुरु भक्ति, सेवा, त्याग, विनम्रता और समाज के प्रति समर्पण का संदेश दिया। उन्होंने कहा, “मैं वंडर सीमेंट में आर.के. परिवार की सादगी, अपनापन और संतों के प्रति श्रद्धा देखकर अत्यंत अभिभूत हूँ।” उन्होंने समाज रत्न अशोक पाटनी के व्यक्तित्व की सराहना करते हुए कहा कि वैभव के साथ त्याग और समाजहित का ऐसा समन्वय अत्यंत प्रेरणादायी है।

वंडर समूह के कार्यों की प्रशंसा करते हुए आचार्यश्री ने कहा, “सीमेंट जोड़े ईंट को, धर्म जोड़े जीव को, झुका जो शीश गुरु चरण, उसने जीता जग को, सोच बना वंडर जैसी, व्यक्तित्व हो दमदार, ऐसा जी कर जाओ कि जमाना करे जय-जयकार।” उन्होंने कहा कि पाटनी समूह नवधा भक्ति के साथ-साथ धर्म सेवा में अग्रणी है तथा अपने मजबूत चरित्र और सतत मेहनत के कारण प्रोडक्शन को भी सुदृढ़ बनाया है। उन्होंने कहा कि अल्प समय में ही आज पूरे विश्व में वंडर सीमेंट ने अपनी पहचान स्थापित की है।

प्रवचन एवं आहारचर्या के पश्चात आचार्य पुलकसागरजी महाराज ने आर.के. नगर से चित्तौड़गढ़ के लिए विहार किया। इस दौरान पाटनी परिवार, वंडर सीमेंट परिवार तथा बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पदयात्रा के साथ आचार्य एवं संघ की श्रद्धापूर्वक अगवानी की और उन्हें भावभीनी विदाई दी। धार्मिक आस्था, गुरु भक्ति और सामाजिक सरोकारों से जुड़े इस आयोजन में श्रद्धालुओं की व्यापक सहभागिता देखने को मिली।

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