अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने और चांदी की कीमतों में आई गिरावट|

भारतीय गोल्ड लोन (Gold Loan) का बाजार पूरी तरह से सोने और चांदी की कीमतों की चाल पर निर्भर करता है। पिछले 12 महीनों के दौरान देश में गोल्ड लोन का आंकड़ा 83 फीसदी की बंपर बढ़ोतरी के साथ रिकॉर्ड 5.77 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गया है। हालाँकि, दूसरी तरफ अंतरराष्ट्रीय बाजारों में सोने और चांदी की कीमतों में आई भारी गिरावट ने वित्तीय बाजारों की चिंता बढ़ा दी है। तकनीकी शेयरों में बिकवाली और वैश्विक आर्थिक दबाव के बीच सोने के दामों में हुए करेक्शन ने बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (NBFC) और कर्ज लेने वाले ग्राहकों के सामने नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं।

एक साल में 83% की बंपर ग्रोथ, लेकिन क्या हैं खतरे?

कैपिटलमाइंड म्यूचुअल फंड के सीईओ दीपक शिनॉय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक पोस्ट के जरिए इस स्थिति पर प्रकाश डाला है। उनके मुताबिक, पिछले एक साल के भीतर बैंकों और वित्तीय संस्थानों से लिए जाने वाले गोल्ड लोन में 83% की जोरदार तेजी दर्ज की गई है। इस दौरान कुल बकाया गोल्ड लोन बढ़कर 5.77 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जिसमें अकेले पिछले 12 महीनों में करीब 3 लाख करोड़ रुपये की नई रकम जुड़ी है।

बाजार के जानकारों का मानना है कि यह तेज ग्रोथ अपने साथ कुछ बड़े सवाल भी लेकर आई है। यदि आने वाले समय में सोने की कीमतों में और अधिक गिरावट आती है, तो बैंकों और एनबीएफसी के पास गिरवी रखे गए सोने (कोलेट्रल) का मूल्य काफी कम हो जाएगा, जिससे वित्तीय संस्थानों के लिए जोखिम बढ़ सकता है।

कीमतों में गिरावट से क्यों बढ़ रहा है खतरा?

वर्तमान में 24-कैरेट सोना अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से नीचे आ रहा है और एमसीएक्स (MCX) दिसंबर गोल्ड फ्यूचर्स पर भी लगातार दबाव बना हुआ है। यदि आने वाले दिनों में सोने की कीमतों में 15% तक की और गिरावट आती है, तो ग्राहकों का 'लोन-टू-वैल्यू' (LTV) रेशियो पूरी तरह बिगड़ सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, देश में अधिकांश गोल्ड लोन देने वाले संस्थान 60 से 70 प्रतिशत के एलटीवी (LTV) पर काम करते हैं। लेकिन बाजार में कीमतें गिरने पर यह सुरक्षा कवच (कुशन) कमजोर हो जाता है। ऐसी स्थिति में मुथूट फाइनेंस, मणप्पुरम फाइनेंस और आईआईएफएल फाइनेंस जैसी बड़ी कंपनियों के लिए वित्तीय जोखिम काफी हद तक बढ़ सकता है।

एक साल के निचले स्तर पर पहुंचे सोने-चांदी के भाव

वैश्विक मोर्चे पर टेक्नोलॉजी शेयरों में सुस्ती और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर किए जा रहे खर्चों से पर्याप्त रिटर्न न मिलने की चिंताओं के कारण बाजार प्रभावित हुआ है। इन सभी कारणों के चलते हाल ही में सोने के दाम लुढ़ककर एक साल के सबसे निचले स्तर पर आ गए हैं, जबकि चांदी भी 50 डॉलर प्रति औंस के नीचे फिसल गई है।

अमेरिका में ब्याज दरों के लंबे समय तक ऊंचे स्तर पर बने रहने की संभावना है और अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मजबूत आंकड़ों ने सुरक्षित निवेश के रूप में देखे जाने वाले सोने पर दबाव और बढ़ा दिया है। इन तमाम बदलावों के कारण जनवरी के अपने रिकॉर्ड उच्च स्तर से सोना अब तक करीब 30 फीसदी नीचे आ चुका है।

नए ग्राहकों और कर्ज देने वालों पर असर

सोने की कीमत कम होने का यह मतलब बिल्कुल नहीं है कि पुराने ग्राहकों को तुरंत अपना कर्ज चुकाना होगा, लेकिन इससे नए ग्राहकों की उधार लेने की क्षमता और पात्रता जरूर सीमित हो जाती है। इसके अलावा, कर्ज देने वाले वित्तीय संस्थानों के लिए घटता हुआ मार्जिन, बढ़ती परिचालन लागत (Operating Cost) और नॉन-परफॉर्मिंग एसेट्स (NPAs) का खतरा भी लगातार चिंता का विषय बनता जा रहा है।

बाजार के जानकारों का सुझाव है कि इस बदलते हालात से निपटने के लिए पुरानी एलटीवी नीतियों में सुधार, सतर्क अंडरराइटिंग और प्रभावी कोलेट्रल मॉनिटरिंग ही वित्तीय संस्थानों के लिए इस तेजी से बढ़ते बाजार में जोखिम को नियंत्रित करने का मुख्य जरिया होंगी।