तस्वीर में भीलवाड़ा के रामद्वारा में मंच पर बैठकर प्रवचन देते रामस्नेही संत दिख रहे हैं।

भीलवाड़ा, 17 सितम्बर। माणिक्यनगर रामद्वारा धाम में ‘‘विश्व शांति कल्याण’’ चातुर्मास के तहत चल रहे विराट श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह के पांचवें दिन गुरुवार को महाप्रभु स्वामी रामचरण महाराज का दीक्षा पर्व श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मनाया गया। अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा के पीठाघीश्वर जगतगुरू आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज के सानिध्य में आयोजित कार्यक्रम में स्वामी रामचरण महाराज की आरती की गई और छप्पन भोग लगाया गया। इस अवसर पर संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना ने श्रीमद् भागवत कथा में श्रीकृष्ण अवतार से जुड़े विभिन्न प्रसंगों का वाचन कर अवतार की महिमा बताई।

वाणीजी प्रवचन में आचार्य स्वामी श्रीरामदयालजी महाराज ने कहा कि महाप्रभु स्वामी रामचरण महाराज ऐसे विलक्षण, अद्भुत और अलौकिक अवतारी महापुरुष थे, जिन्होंने परमात्मा की भक्ति करते हुए अपने जीवन के साथ उनके सानिध्य में आने वाले सभी संतों और भक्तों के जीवन को भी पवित्र एवं पावन बनाया। उनकी भक्ति एवं साधना के विलक्षण चमत्कार मेवाड़ और भीलवाड़ा की धरती ने ही नहीं, पूरे संसार ने देखे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जाति हमारी आत्मा, प्राण हमारा नाम, राम हमारे इष्ट और शाहपुरा हमारा धाम, यहीं हम रामस्नेही की पहचान।’’


आचार्य रामदयाल महाराज ने कहा कि संत धन नहीं, शब्द प्रदान करते हैं, जिन्हें पाकर आत्मा के अमरत्व और परम आनंद की प्राप्ति की जा सकती है। भक्त का धर्म संत की सेवा करना है। सद्गुरू जब सिर पर हाथ रखते हैं तो दरिद्रता दूर हो जाती है और जिसकी नहीं हो पाती, उसके लिए पिछले कई जन्मों के पाप होते हैं, जो भोगने पड़ते हैं।

उन्होंने स्वामी रामचरण महाराज के प्रेरणादायी जीवन की चर्चा करते हुए कहा कि सद्गुरू कृपाराम के वरदहस्त में विक्रम संवत 1808 में दीक्षा लेने के बाद वे रामचरण के नाम से प्रख्यात हुए। दीक्षा के बाद उन्होंने निर्जन जंगलों में कठोर साधना एवं परमात्मा की भक्ति की। उन्होंने मेवाड़, विशेष रूप से भीलवाड़ा की धरती को धन्य किया और अनंत वर्षों तक यहां भजन करते हुए कई क्षेत्रों में विचरण किया। भीलवाड़ा की धरती पर विक्रम संवत 1817 में रामस्नेही सम्प्रदाय का प्रादुर्भाव हुआ और 1820 में अनुभव वाणी का उद्गम हुआ। इसमें दिव्य अलौकिक सवा छतीस हजार अनुभव वाणी है। उन्होंने कहा कि वेदों को पढ़ना सरल है, लेकिन महापुरुषों की वाणी को पढ़ना और चिंतन करना बहुत कठिन होता है।

आचार्यश्री ने कहा कि स्वामी रामचरण महाराज जैसे ज्ञानी ने व्यवहार पक्ष में वेदांत पक्ष को समाहित किया। उनका अद्भुत एवं विलक्षण इतिहास है। उनकी तपस्या का प्रताप यह पावन भूमि है। दीक्षा पर्व होने से अध्यात्म की दृष्टि से आज उनका अवतार दिवस है। वह साक्षात राम जैसे अवतारी पुरुष हैं।

आचार्यश्री ने कहा कि यहां संयोग से आनंद की अद्भुत त्रिवेणी प्रवाहित हो रही है। एक ओर रामचरण महाराज का दीक्षा दिवस मनाया जा रहा है, दूसरी ओर राष्ट्र प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जन्मदिवस मना रहा है और श्रीमद् भागवत कथा में श्रीकृष्ण भगवान का अवतार दिवस मनाया जा रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिवस पर अन्तरराष्ट्रीय रामस्नेही सम्प्रदाय शाहपुरा पीठ की ओर से बधाई दी।

कार्यक्रम के दौरान स्वामी रामचरणजी महाराज की भक्ति में संत प्रीतमराम, संत रामजस सहित कुछ भक्तों ने भजनों की सरिता प्रवाहित की। श्रद्धालु भक्ति रस से सराबोर होकर झूमने लगे। आचार्यश्री के सानिध्य में श्रद्धा एवं भक्ति के साथ स्वामी रामचरण महाराज की आरती की गई। दीक्षा पर्व के अवसर पर श्रद्धाभाव से छप्पन भोग लगाया गया। श्रद्धालु अपने-अपने घर से पकवानों की थाली तैयार करके लाए। सैकड़ों घरों से अलग-अलग पकवान आने के कारण छप्पन भोग के बजाय अनंत पकवान और अनंत व्यंजन हो गए। सभी श्रद्धालुओं को छप्पन भोग का प्रसाद भी प्राप्त हुआ।

व्यास पीठ से श्रीमद् भागवत कथा का वाचन करते हुए संत मनोरथराम रामजी राम मचलाना ने श्रीकृष्ण अवतार से जुड़े प्रसंगों की चर्चा की। उन्होंने कहा कि भगवान की कृपा उसी को प्राप्त होती है, जिसका जीवन त्याग और तपस्या से परिपूर्ण होता है। उनकी कृपा पाने के लिए भक्ति, सत्संग और प्रार्थना करनी पड़ती है। भक्त बनकर स्वयं को भगवान के चरणों में समर्पित करना पड़ता है।

उन्होंने कहा कि हनुमानजी राम के कृपा पात्र थे और हनुमानजी की कृपा पानी है तो निष्काम बनकर राम की सेवा करनी होगी। राम-राम बोले बिना हनुमानजी को खुश नहीं किया जा सकता। संत मनोरथराम ने कहा कि भगवान अवतार लेकर बालकृष्ण के रूप में बाल लीला करने के साथ आतताई कंस का विनाश भी करते हैं। जब-जब धरती पर आतंक और अन्याय बढ़ता है, परमात्मा अवतार लेकर दुष्टों का संहार करते हैं और मानवता की रक्षा करते हैं। गोकुल गांव में यशोदा के आंगन में बालकृष्ण की लीला भक्ति और प्रेम का इतिहास रचती है। श्रीमद् भागवत कथा के दौरान कई भजनों ने वातावरण को भक्ति रस से सराबोर कर दिया।

महाप्रभु स्वामी रामचरण महाराज के दीक्षा दिवस एवं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिवस के अवसर पर मानव सेवा की भावना से गुरुवार को रामस्नेही चिकित्सालय में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। रक्त संग्रहण रामस्नेही चिकित्सालय ब्लड बैंक टीम ने किया। इस अवसर पर रामस्नेही चिकित्सालय में ओपीडी निःशुल्क रही।

चातुर्मास आयोजन समिति के अनुसार 20 सितम्बर तक चलने वाले श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह में प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10.30 बजे तक एवं दोपहर 2 से 4 बजे तक श्रीमद् भागवत कथा तथा सुबह 10.30 बजे से 11.30 बजे तक एवं शाम को 4 से 5 बजे तक श्रीवाणीजी का प्रवचन हो रहा है।

श्रीमद् भागवत ज्ञान सप्ताह के तहत पुष्कर से आए विद्वान पंडितों द्वारा रामद्वारा परिसर में 108 भागवत का मूल पाठ किया जा रहा है। सुबह पाठ प्रारंभ करने से पहले 108 यजमान परिवारों द्वारा इनका पूजन किया जा रहा है। पूजा-अर्चना के बाद विद्वान भागवत का मूल पाठ प्रारंभ करते हैं तो पूरा वातावरण मंत्रों से पावन एवं पवित्र हो जाता है। जहां मूल भागवत पाठ चल रहा है, उस पावन नजारे का बाहर से ही सैकड़ों श्रद्धालु दर्शन करते हैं।

Tags: