भीलवाड़ा स्थित हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में शारदीय नवरात्रि के दौरान महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन की मौजूदगी में आरती और धार्मिक अनुष्ठान करते श्रद्धालु।

भीलवाड़ा। हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में शारदीय नवरात्रि के अवसर पर महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन के सानिध्य में नवचंडी पाठ, दुर्गा सप्तशती पाठ, हवन-यज्ञ और दुर्गा पूजन के धार्मिक अनुष्ठान जारी हैं। नवरात्रि के प्रथम दिन 11 अक्टूबर 2026, रविवार से शुरू हुए इन कार्यक्रमों में प्रतिदिन विधि-विधान से पूजा-अर्चना की जा रही है। दुर्गाष्टमी के अवसर पर 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को विशेष हवन-यज्ञ, पूर्णाहुति, आरती, कन्या पूजन और कन्या भोज का आयोजन किया जाएगा।

आश्रम में नवरात्रि के दौरान प्रतिदिन प्रातः गणपति एवं मां दुर्गा का अभिषेक, मंडल पूजन और हवन-यज्ञ संपन्न कराया जा रहा है। इसके साथ ही तीन ब्राह्मणों द्वारा नवचंडी एवं दुर्गा सप्तशती के पाठ किए जा रहे हैं। इन धार्मिक अनुष्ठानों से आश्रम में भक्तिमय वातावरण बना हुआ है।

महामंडलेश्वर स्वामी हंसराम जी उदासीन ने बताया कि नवरात्रि सनातन धर्म का प्रमुख एवं पवित्र पर्व है। इन नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों मां शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री की आराधना की जाती है। नवरात्रि शक्ति, भक्ति और साधना का पर्व है, जो श्रद्धालुओं को धर्म, सत्य और सदाचार के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।

उन्होंने बताया कि नवरात्रि को देवी दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध तथा भगवान श्रीराम की रावण पर विजय के प्रतीक पर्व के रूप में भी मनाया जाता है। वर्ष में चार नवरात्रियां आती हैं। इनमें चैत्र और शारदीय नवरात्रि प्रमुख हैं, जबकि माघ और आषाढ़ मास में गुप्त नवरात्रि मनाई जाती है।

आश्रम में 19 अक्टूबर 2026, सोमवार को दुर्गाष्टमी के पावन अवसर पर विशेष धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। इस दिन प्रातः गणपति एवं देवी शक्ति का पूजन-अभिषेक किया जाएगा। इसके बाद विशेष सामग्री से दुर्गा हवन-यज्ञ संपन्न होगा। सायं 4:15 बजे पूर्णाहुति एवं आरती की जाएगी, जबकि सायं 5:15 बजे कन्या पूजन और कन्या भोज का आयोजन होगा।

हरि शेवा उदासीन आश्रम सनातन मंदिर में आयोजित ये धार्मिक अनुष्ठान मां दुर्गा की आराधना के साथ सनातन संस्कृति के संरक्षण, धर्म और आध्यात्मिक चेतना के प्रसार का संदेश दे रहे हैं। दुर्गाष्टमी पर होने वाले विशेष कार्यक्रमों में हवन-यज्ञ से लेकर कन्या पूजन और कन्या भोज तक की धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया जाएगा।

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