शराब-नशामुक्त भारत का संकल्प, पुलकसागर ने भीलवाड़ावासियों से मांगी ‘जिंदगी की खोट’
भीलवाड़ा के चित्रकूटधाम में ज्ञान गंगा महोत्सव के समापन पर आचार्य पुलकसागर महाराज ने शराब व नशामुक्त भारत का आह्वान किया। गुरुदक्षिणा में उन्होंने भीलवाड़ावासियों से ‘जिंदगी की खोट’ मांगी।
तस्वीर में राष्ट्र संत पुलकसागर महाराज भीलवाड़ा में आयोजित कार्यक्रम के दौरान मंच से प्रवचन देते हुए नजर आ रहे हैं।
भीलवाड़ा। पिछले एक पखवाड़े से राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज के मुखारबिंद से प्रवाहित हो रही ज्ञान की गंगा का रविवार को समापन हो गया। श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव के अंतिम दिन आचार्यश्री ने शराब और नशे से होने वाली जिंदगी की बर्बादी पर प्रवचन देते हुए परिवार, समाज और राष्ट्र को बचाने के लिए भारत को शराब एवं नशामुक्त बनाने का आह्वान किया।
भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि ज्ञान गंगा महोत्सव के समापन पर उन्हें गुरुदक्षिणा के रूप में न नोट चाहिए, न वोट और न सपोर्ट। उन्होंने भीलवाड़ावासियों से कहा कि वे गुरुदक्षिणा में केवल अपनी जिंदगी की खोट उन्हें देकर जाएं। उन्होंने कहा, “मुझे दुनिया की खोट चाहिए।” आचार्यश्री ने कहा कि भीलवाड़ा में ज्ञान गंगा का समापन हुआ है, लेकिन जब तक पुलकसागर है, ज्ञान की गंगा बहती रहेगी।
उन्होंने कहा कि जिसने यहां 15 दिन दिल से ज्ञान गंगा का श्रवण किया, उसका चारित्र पावन हो गया। जो हंस बनकर ज्ञान की गंगा में डूब गए, वे परमहंस बनकर दुनिया से विदा लेंगे। महोत्सव के अंतिम दिन पुलक वाणी सुनने के लिए श्रद्धालुओं का ऐसा सैलाब उमड़ा कि विशाल पांडाल भी छोटा प्रतीत हुआ। जिसे जहां जगह मिली, वहीं बैठकर प्रवचन सुनने को तत्पर दिखाई दिया। ज्ञान गंगा महोत्सव के समापन के बाद भीलवाड़ावासियों के बीच इन 15 दिनों में जीवन को आनंदमय बनाने के लिए दी गई सीख की चर्चा रही और श्रद्धालुओं में यह भावना भी रही कि काश, ज्ञान की यह गंगा कुछ दिन और प्रवाहित होती रहती।
आचार्यश्री ने विभिन्न दृष्टांतों के माध्यम से शराब और नशे के दुष्प्रभावों पर चर्चा करते हुए कहा कि शराब पीने वाले और नशा करने वाले कभी नहीं चाहते कि उनकी संतान भी शराबी और नशेड़ी बने, लेकिन गलत संगति व्यक्ति को ऐसा बना देती है। जैसी संगत होगी, वैसी ही जिंदगी बन जाएगी। उन्होंने नशे का गलत रास्ता दिखाने वाले दोस्तों की संगति छोड़ने और ऐसे दोस्त नहीं बनाने की बात कही, जो घर-परिवार को बर्बाद कर दें।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि यदि अपने घर को पवित्र और पावन बना लिया जाए तो मंदिर की जगह वहीं भगवान के दर्शन हो जाएंगे। उन्होंने चिंता जताई कि आज युवा पीढ़ी शराब के नशे में डूब रही है और सिगरेट तथा गुटखे की लत लग चुकी है। उन्होंने कहा कि समाज और सरकार दोहरा चरित्र जी रहे हैं। मंदिर में पानी छानने की बात करने वाले घर में शराब पी रहे हैं। सरकार शराबी पर कार्रवाई के कानून बनाती है और दूसरी तरफ शराब की दुकानों के लाइसेंस जारी करती है। उन्होंने कहा कि शराब की नदी से बाहर आकर ज्ञान की गंगा में डुबकी लगा लो, जीवन सुधर जाएगा।
आचार्यश्री ने कहा कि शराब और नशे के राक्षस से परिवार, समाज और राष्ट्र की रक्षा करनी है तो सरकार के भरोसे रहने की बजाय स्वयं जागृत होना होगा। यह दुनिया कानून से सुधरने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि लोग शराब पीना छोड़ दें तो शराब की दुकानें खुद बंद हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि देश का दुर्भाग्य है कि पीने का पानी तीन किलोमीटर दूर से लाना पड़ता है, लेकिन शराब की दुकान हर गली में मिल जाएगी।
उन्होंने कहा कि नशे के कारण बच्चे समय से पहले जवान हो रहे हैं। बच्चों को जैसे संस्कार दिए जाएंगे, वैसा ही उनका भविष्य होगा। बच्चों के आदर्श फिल्मी सितारे नहीं, बल्कि महापुरुष होने चाहिए। शराब और नशे से बचना और बचाना है तो इसकी शुरुआत पहले खुद से करनी होगी।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि शराबियों और नशेड़ियों को मंदिरों में प्रवेश करने से रोकना होगा। ऐसे लोगों को अभिषेक करने और मुनि आहार देने का कोई अधिकार नहीं है। शराब जैसे कुव्यसनों से घिरे लोग आहार प्रदान कर संतों की साधना को दोष लगाते हैं।
आचार्यश्री ने शराब का अर्थ समझाते हुए कहा कि जो सड़ाएगी, रुलाएगी और बर्बाद करेगी, उसका नाम शराब है। शराब पीने वाला कुछ देर अपना गम भूल जाता है, लेकिन उसका पूरा परिवार गम में डूब जाता है। उन्होंने कहा कि शराब पीने वाले की स्थिति पशु से भी बदतर हो जाती है।
उन्होंने माता-पिता से अपील की कि वे अपनी बेटी की शादी कभी ऐसे लड़के से न करें, जो शराब पीता हो। बेटियों की शादी शराबी से कर उनकी जिंदगी बर्बाद नहीं करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि बेटियां भी अपने पिता से कहें कि धनपति शराबी से शादी मत करना, निर्धन संस्कारी से शादी करा देना। धन कुछ दिन में खत्म हो जाएगा, लेकिन संस्कार जीवनभर काम आएंगे।
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि बेटियां संकल्प लें कि किसी भी हाल में शराबी से शादी नहीं रचाएंगी और यदि पति शराब पीना नहीं छोड़ता है तो उसे छोड़ने से भी पीछे नहीं रहेंगी। उन्होंने कहा कि शराबियों को सरकार नहीं, बल्कि परिजनों और समाज को ही सुधारना पड़ेगा।
प्रवचन के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन, आचार्यश्री के पाद प्रक्षालन और शास्त्र भेंट का सौभाग्य भगवतीदेवी, विजय और अजय झांझरी परिवार ने प्राप्त किया। विभिन्न सामाजिक संगठनों के पदाधिकारियों ने भी आचार्यश्री को श्रीफल समर्पित कर आशीर्वाद प्राप्त किया।
सौभाग्यशाली परिवार एवं अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह, सह संयोजक लोकेश अजमेरा आदि पदाधिकारियों ने किया। शास्त्रीनगर बालिका मण्डल की अष्ट कुमारियों ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। कार्यक्रम का संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया।
ज्ञान गंगा महोत्सव के समापन के बाद सोमवार से आचार्य पुलकसागर ससंघ के आगम एवं शास्त्र आधारित चातुर्मासिक प्रवचन प्रतिदिन सुबह 8.30 बजे से शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में होंगे।