भीलवाड़ा गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन की सरकार को 7 दिन की चेतावनी, मांगें नहीं मानीं तो होगा अनिश्चितकालीन चक्का जाम
भीलवाड़ा गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने सरकार को 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है। मांगें पूरी नहीं होने पर राजस्थानभर में चक्का जाम और परिवहन बंद की चेतावनी दी गई है।
तस्वीर में भीलवाड़ा गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन के पदाधिकारी और वाहन मालिक एक ट्रांसपोर्ट कार्यालय के बाहर खड़े होकर विरोध प्रदर्शन और नारेबाजी करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
भीलवाड़ा। भीलवाड़ा गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन ने परिवहन व्यवसाय से जुड़ी विभिन्न व्यावहारिक और प्रशासनिक समस्याओं के समाधान की मांग करते हुए राजस्थान के मुख्यमंत्री, परिवहन मंत्री और जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा है। एसोसिएशन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि आगामी सात दिनों के भीतर उनकी मांगों पर सकारात्मक और ठोस कार्रवाई शुरू नहीं की गई, तो पूरे राजस्थान के ट्रांसपोर्टर्स और वाहन मालिक लोकतांत्रिक एवं शांतिपूर्ण तरीके से व्यापक आंदोलन शुरू करेंगे।
एसोसिएशन ने कहा है कि प्रस्तावित आंदोलन के तहत धरना-प्रदर्शन, चक्का जाम और आवश्यकता पड़ने पर अनिश्चितकालीन परिवहन बंद जैसे कदम उठाए जाएंगे। संगठन का कहना है कि ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार, प्रशासन और संबंधित विभागों की होगी।
ज्ञापन में मांग की गई है कि व्यावसायिक वाहनों के परमिट, आरोग्यता प्रमाणपत्र (फिटनेस) तथा अन्य अनुमतियों से जुड़े कार्यों का त्वरित, सरल और पारदर्शी तरीके से निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। साथ ही तकनीकी कारणों और पोर्टल संबंधी त्रुटियों के मामलों में अनावश्यक कार्रवाई तथा भारी आर्थिक दंड (जुर्माने) से राहत प्रदान की जाए।
एसोसिएशन ने व्यावसायिक वाहनों के परमिट नवीनीकरण और संचालन के लिए लागू वीएलटीडी-जीपीएस (वाहन स्थान ट्रैकिंग उपकरण) की अनिवार्यता को तत्काल समाप्त करने अथवा इसे पूरी तरह स्वैच्छिक बनाने की भी मांग की है। संगठन का आरोप है कि इस व्यवस्था की आड़ में अधिकृत कंपनियां वाहन मालिकों से मनमाने तरीके से धन वसूल रही हैं, जिससे कालाबाजारी और एकाधिकार को बढ़ावा मिल रहा है।
एसोसिएशन के सचिव अरिहंत जैन और कोषाध्यक्ष राहुल कटारिया ने पत्र में कहा है कि छोटी-मोटी तकनीकी और दस्तावेजी कमियों पर लगाए जा रहे अत्यधिक ई-चालान और भारी आर्थिक दंड को व्यावहारिक तथा तर्कसंगत बनाया जाए। इसके अलावा बीएस-6, सीएनजी और विद्युत (इलेक्ट्रिक) चालित पर्यावरण-अनुकूल वाहनों पर लगाए जा रहे हरित कर (ग्रीन टैक्स) को तत्काल प्रभाव से समाप्त किया जाए। उनका कहना है कि जब सरकार स्वयं प्रदूषण रहित वाहनों को प्रोत्साहित कर रही है, तब ऐसे वाहनों पर कर लगाया जाना न्यायसंगत नहीं है।
परिवहन क्षेत्र को देश और प्रदेश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ बताते हुए एसोसिएशन ने वाहन मालिकों की समस्याओं के समाधान के लिए समय-समय पर विशेष शिविर, जनसुनवाई और समन्वय बैठकें आयोजित करने की भी मांग की है, ताकि इस व्यवसाय से जुड़े लाखों परिवारों को अतिरिक्त आर्थिक बोझ से बचाया जा सके। संगठन ने दोहराया कि यदि सात दिनों के भीतर मांगों पर कार्रवाई शुरू नहीं हुई, तो राजस्थानभर के ट्रांसपोर्टर्स और वाहन मालिक आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।