आचार्य पुलकसागर बोले- जुबान से निकले शब्द वापस नहीं आते, इन्हीं से बनते हैं रिश्ते और महाभारत
भीलवाड़ा के चित्रकूटधाम में आचार्य पुलकसागर महाराज ने वाणी के प्रभाव पर प्रवचन दिया। उन्होंने शब्दों को रिश्तों की मजबूती और टकराव का कारण बताते हुए 19 अगस्त की मंगल रथयात्रा सहित आगामी आयोजनों की जानकारी दी।
तस्वीर में भीलवाड़ा के चित्रकूटधाम में ज्ञान गंगा महोत्सव के दौरान मंच पर विराजमान राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज और सामने प्रवचन सुनते हुए बैठे श्रद्धालु नजर आ रहे हैं।
भीलवाड़ा में पहली बार चातुर्मास कर रहे राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि किसी के साथ रिश्तों में मधुरता होगी या टकराव, यह हमारी वाणी ही तय करती है। जुबान से निकले शब्द वापस नहीं लिए जा सकते। उनका घाव दिखाई नहीं देता, लेकिन वह सबसे गहरा और घातक होता है। उन्होंने कहा, “दुनिया में सबसे जहरीली आदमी की जुबान होती है, नीम और करेला तो यूं ही बदनाम है।”
श्री पार्श्वनाथ दिगम्बर जैन मंदिर ट्रस्ट, मैन सेक्टर शास्त्रीनगर के तत्वावधान में सकल दिगम्बर जैन समाज की ओर से चित्रकूटधाम में आयोजित ज्ञान गंगा महोत्सव में सोमवार को वाणी के महत्व और उसके प्रभाव पर प्रवचन देते हुए आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि जिनकी वाणी अच्छी होती है, वे दिल में उतर जाते हैं और जिनकी वाणी तीखी होती है, वे दिल से उतर जाते हैं।
उन्होंने कहा कि द्रोपदी द्वारा दुर्योधन के लिए “अंधे का बेटा अंधा” कहना उसे अपमान की आग में झुलसा देता है और इसी एक शब्द ने महाभारत करा दिया। हमारी वाणी की मिठास या कड़वाहट ही तय करती है कि रिश्तों में प्रगाढ़ता होगी या महाभारत होने वाली है। हमारे शब्दों में प्रेम घुला हो तो व्यंग्य से भी नफरत नहीं बढ़ती। दुनिया शब्दों का खेल है। अच्छे से बोलेंगे तो शांति और बुरा बोलेंगे तो अशांति तैयार है।
आचार्यश्री ने कहा कि भोजन से अधिक स्वादिष्ट हमारे वचन होने चाहिए। “कहो वही जो सच्चा हो, करो वहीं जो अच्छा हो, बोलो वहीं जो मीठा हो, चाल वहीं जिसमें चरित्र हो और काम वहीं जो पवित्र हो।” उन्होंने कहा कि जीवन में आनंद चाहिए तो बोलें कम और सुनें ज्यादा। भगवान से प्रार्थना करें कि जीवन में धन-दौलत भले कम मिले, लेकिन अच्छे शब्दों का खजाना भरपूर प्रदान करे।
उन्होंने कहा कि घरों में कलह संपत्ति के कारण कम और जुबान से निकलने वाले बेरहम शब्दों के कारण ज्यादा होती है। वचनों के कारण ही इंसान का जुड़ाव या बिखराव होता है। मीठा बोलने से जिंदगी भी मीठी हो जाती है। वाणी कर्कश होने के कारण कौए को कोई पसंद नहीं करता और मीठी वाणी के कारण कोयल अच्छी लगती है। हमें इंसान की तरह बोलना नहीं आए तो पशु की तरह मौन रह जाएं। शब्द हमारे दर्पण हैं, जो हमारे चरित्र एवं सभ्यता को प्रदर्शित करते हैं।
“मैं खाता तीखा, पर बोलता मीठा हूं; आप खाते मीठा, बोलते तीखा”
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि तोता मिर्ची खाकर भी मीठा बोलता है और हम मिश्री खाकर भी नीम जैसा बोलते हैं। “मैं खाता तीखा हूं, पर बोलता मीठा हूं और आप खाते मीठा हो, पर बोलते तीखा हो।” उन्होंने कहा कि बोलना सीख गए तो जीवन की 90 प्रतिशत समस्याएं स्वतः हल हो जाएंगी।
उन्होंने कहा कि महावीर ने सबसे ज्यादा वाणी की साधना की। ईंट का जवाब पत्थर से और गोली का जवाब गोली से देने वाला कभी महात्मा नहीं बन सकता। महापुरुष वे होते हैं जो ईंट का जवाब फूल से देते हैं। दुनिया में सर्वाधिक विनाश जुबान के कारण ही होता है। जुबान पर ताला लगाना सीख गए तो जीवन सार्थक हो जाएगा। बोलने का हुनर मिल गया तो जंगल में मंगल हो जाएगा।
“जली हुई रोटी से नहीं, जले-कटे शब्दों से होती जिंदगी बर्बाद”
आचार्यश्री ने कहा कि जली हुई रोटी से कोई नुकसान नहीं होता, लेकिन जले-कटे शब्दों से जिंदगी बर्बाद हो जाती है। क्रोध में शब्दों की साधना बिखर जाती है। अपशब्दों के निशान माफी मांगने पर भी दिल से नहीं मिटते। जीवन में जो काम गुस्सा करने से नहीं होता, वह काम प्रेम में सहज ही हो जाता है।
उन्होंने कहा कि कोई परमात्मा हमारा स्वभाव नहीं बदल सकता, हमें खुद को बदलना होगा। हम जैसा बोलेंगे, वैसा ही जवाब मिलेगा। प्रेम से बोलने पर उत्तर में भी प्रेम ही प्राप्त होगा। जैसा सुनना चाहते हैं, वैसा बोलना शुरू कर दें। धागा और जुबान बहुत लंबी होती है और उलझ जाते हैं। हमेशा धागे को लपेटकर और जुबान को समेटकर रखें।
बच्चों का भविष्य बनाने और बिगाड़ने वाले होते हैं माता-पिता
आचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि बच्चों का भविष्य बनाने और बिगाड़ने वाले माता-पिता होते हैं। वह बच्चा जीवन में तरक्की नहीं कर सकता जिसकी इज्जत उसके माता-पिता नहीं करते हैं, तो दुनिया क्यों करेगी। बच्चों की खूबियों की बजाय कमजोरियां उजागर करने पर वह कुंठा में जीएगा। आलोचना व्यक्ति का हौसला तोड़ देती है। कमजोरी उजागर करने में नहीं, बल्कि उसे दूर करने में सहायक बनें। आप अपने बच्चों का हौसला बढ़ाएंगे तो वह क्षमता से भी अधिक कार्य करके दिखा सकता है।
प्रवचन से पूर्व दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट
प्रवचन के प्रारंभ में दीप प्रज्वलन, पाद प्रक्षालन एवं शास्त्र भेंट का सौभाग्य शकुन्तलादेवी, नंदलाल सुरेश कोठारी परिवार एवं जीतो के वाइस प्रेसीडेन्ट महावीरसिंह चौधरी ने प्राप्त किया। अतिथियों का स्वागत श्री पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी, संयोजक मनीष शाह और सह संयोजक लोकेश अजमेरा ने किया।
श्री वासुपूज्य महिला मण्डल बिलिया की सदस्यों ने मंगलाचरण की प्रस्तुति दी। संचालन चातुर्मास समिति के महामंत्री जयकुमार पाटनी ने किया। ज्ञान की गंगा में डुबकी लगाने के लिए भीलवाड़ा के विभिन्न क्षेत्रों से सर्व समाज के हजारों लोग पहुंचे।
ज्ञान गंगा महोत्सव के तहत 30 अगस्त तक प्रतिदिन सुबह 8.30 से 10 बजे तक चित्रकूटधाम में प्रवचन होंगे। शाम 7 से 8 बजे तक आनंद यात्रा एवं आरती का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें शहर के विभिन्न क्षेत्रों से श्रद्धालु शामिल होकर लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
मोक्ष सप्तमी पर 19 अगस्त को निकलेगी भव्य मंगल रथ यात्रा
मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज के भीलवाड़ा चातुर्मास के दौरान 19 अगस्त को भक्ति का नया इतिहास रचा जाएगा। पहली बार श्री पार्श्वनाथ भगवान मोक्ष कल्याण महोत्सव दिवस मोक्ष सप्तमी पर तीन लोक के नाथ की भव्य मंगल रथयात्रा का आयोजन किया जाएगा।
सकल दिगम्बर जैन समाज एवं चातुर्मास समिति के तत्वावधान में आचार्य पुलकसागर महाराज ससंघ के सानिध्य में सूर्यमहल से सुबह 7.30 बजे मंगल रथयात्रा निकलेगी। इसमें उत्तरप्रदेश के बड़ोत से आने वाले पांच एरावत हाथियों के साथ श्रीजी के रथ के आगे 10 हाथी चलेंगे। सात विशेष झांकियां सजाई जाएंगी।
चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने बताया कि भव्य आयोजन में श्राविकाएं ध्वज, डोली, ढोल और मंजीरे लेकर चलेंगी। भीलवाड़ा के महिला मण्डलों एवं श्रावकों द्वारा सम्मेद शिखर की जीवंत वंदना की जाएगी। कार्यक्रम स्थल चित्रकूटधाम में 40 फीट लंबी और 12 फीट ऊंची विशाल सम्मेद शिखर की झांकी बनाई जाएगी। इस अवसर पर 23 पुण्यार्जक परिवारों द्वारा 23 निर्वाण लड्डू चढ़ाए जाएंगे।