भीलवाड़ा: अवैध संबंध के शक में मजदूर की हत्या, आरोपी को उम्रकैद
सुखाड़िया नगर में पत्थर मारकर मजदूर की हत्या करने वाले आरोपी सलामुद्दीन को एससी/एसटी अदालत ने दोषी ठहराते हुए 20 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया।
तस्वीर में पुलिस अधिकारियों की हिरासत में खड़ा हत्या का आरोपी सलामुद्दीन दिख रहा है।
भीलवाड़ा में पत्नी से अवैध शारीरिक संबंध की रंजिश में मजदूर हकरू निनामा की हत्या के मामले में अदालत ने आरोपी सलामुद्दीन उर्फ कालू को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। विशिष्ट न्यायाधीश अजा/जजा (अत्याचार) निवारण प्रकरण, भीलवाड़ा ने बुधवार को फैसला सुनाते हुए आरोपी पर 20 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया।
मामला सदर थाना क्षेत्र के सुखाडिय़ा नगर का है। वर्ष 2023 में सामने आई इस वारदात में मजदूर हकरू निनामा की कच्चे घर के बाहर से बड़ा पत्थर फेंककर हत्या कर दी गई थी। अपर लोक अभियोजक दिनेशकुमार जोशी के मुताबिक, हकरू मजदूरी के सिलसिले में भीलवाड़ा आया था और सुखाडिय़ा नगर में रहकर ठेकेदार के अधीन मजदूरी कर रहा था।
8 जून 2023 को हकरू की हत्या की सूचना मिलने पर परिवादी रंगजी निमाना मौके पर पहुंचा। वहां उसकी भाभी ने बताया कि मजदूरी के बाद हकरू ने शराब पी थी और चिकन खाया था। इसके बाद सभी कच्चे घर में दरवाजे के पास सो गए थे। इसी दौरान अचानक किसी ने बाहर से बड़ा पत्थर हकरू के सीने पर फेंका। पत्थर लगने से हकरू की मौके पर ही मौत हो गई। घटना की सूचना पुलिस को दी गई।
मृतक के चचेरे भाई, प्रतापगढ़ जिले के केला-मेला निवासी रंगजी पुत्र पोजा निमाना की रिपोर्ट पर सदर थाने में मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई। शुरुआती जांच में हत्या का आरोपी अज्ञात था। पुलिस की पड़ताल आगे बढ़ी तो सलामुद्दीन उर्फ कालू पुत्र बाबू खां नीलगर, निवासी अंटाली थाना शंभूगढ़, हाल पीडब्ल्यू ऑफिस के पास सुखाडिय़ा नगर, का नाम सामने आया।
पुलिस ने सलामुद्दीन को पकड़ा और पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक, सलामुद्दीन ने बताया कि उसकी पत्नी से हकरू के अवैध शारीरिक संबंध थे और इसी बात को लेकर उसकी हकरू से रंजिश थी। इसी रंजिश में बदला लेने के लिए उसने हकरू की हत्या की। पुलिस पूछताछ में आरोपी के अपराध स्वीकार करने के बाद उसके खिलाफ हत्या के साथ एससी/एसटी एक्ट की धाराओं में कार्रवाई की गई।
मामले में अपर लोक अभियोजक दिनेश कुमार जोशी ने आरोपी के खिलाफ आरोप साबित करने के लिए अदालत में 20 गवाहों के बयान दर्ज करवाए। इसके साथ ही 21 महत्वपूर्ण दस्तावेज भी पेश किए गए। अभियोजन की ओर से रखे गए साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने सलामुद्दीन को दोषी माना।
हत्या के इस मामले की जांच तत्कालीन वृत्ताधिकारी सदर भीलवाड़ा योगेश शर्मा ने की थी। 8 जून 2023 को सामने आई इस वारदात के बाद पुलिस ने आरोपी को जांच के दायरे में लेकर उसके खिलाफ साक्ष्य जुटाए। करीब तीन साल बाद अदालत ने सलामुद्दीन को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 20 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया।