खल्दी में 80 बीघा वन भूमि पर अवैध कब्जे का मामला, शिकायत के 10 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं
बारां जिले के ग्राम खल्दी में 70 से 80 बीघा वन भूमि पर कथित अवैध कब्जे को लेकर ग्रामीणों ने गंभीर आरोप लगाए हैं। उप वन संरक्षक को ज्ञापन देने के 10 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं होने से नाराजगी बढ़ गई है। ग्रामीणों ने वन विभाग पर मिलीभगत का आरोप लगाते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।
तस्वीर में बारां जिले के किशनगंज तहसील स्थित खल्दी गांव की वन भूमि का खुला क्षेत्र नजर आ रहा है, जहां जमीन पर खेती और हरियाली दिखाई दे रही है।
बारां जिले की किशनगंज तहसील के नाहरगढ़ रेंज स्थित ग्राम खल्दी में वन भूमि पर बड़े पैमाने पर हुए कथित अवैध अतिक्रमण को लेकर ग्रामीणों में प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि उप वन संरक्षक को ज्ञापन सौंपे जाने के 10 दिन बाद भी वनभूमि पर कब्जा करने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
ग्रामीणों का कहना है कि राजनीतिक संरक्षण प्राप्त दबंगों द्वारा वन भूमि पर किए गए अतिक्रमण के कारण गांव में मवेशी चराने का संकट खड़ा हो गया है। इस स्थिति से ग्रामीणों में लगातार असंतोष बढ़ रहा है।
खल्दी निवासी छोटूलाल पुत्र लक्ष्मीचंद सहित ग्रामवासियों ने अपने ज्ञापन में बताया कि गांव के कुछ प्रभावशाली लोगों ने 70 से 80 बीघा वन भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर काश्त शुरू कर दी है। ग्रामीणों के अनुसार जब उन्होंने इस अतिक्रमण का विरोध किया तो अतिक्रमियों ने उन्हें ही धमकाना शुरू कर दिया। उनका कहना है कि अतिक्रमियों के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे खुलेआम कहते हैं कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
ग्रामीणों ने यह भी बताया कि इस संबंध में स्थानीय वन विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों को कई बार अवगत कराया गया, लेकिन अतिक्रमियों के खिलाफ अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद 28 जुलाई को ग्रामवासी बारां पहुंचे और उप वन संरक्षक (डीएफओ) को ज्ञापन सौंपकर वन भूमि से अतिक्रमण हटाने की मांग की, लेकिन इसके बावजूद भी कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई।
ग्रामवासियों ने वन विभाग के कर्मचारियों पर अतिक्रमियों से मिलीभगत का आरोप भी लगाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि अतिक्रमियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो वे आंदोलनात्मक कदम उठाने के लिए बाध्य होंगे।