Balen Shah 100 point reform agenda Nepal : हिमालय की गोद में बसे देश नेपाल में एक ऐसी राजनीतिक लहर उठी है जिसने दशकों पुरानी सत्ता व्यवस्था की नींव हिला दी है। रैपर से राजनेता और फिर नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने 35 वर्षीय बालेंद्र शाह (बालेन) ने कार्यभार संभालने के महज दो सप्ताह के भीतर एक क्रांतिकारी '100 सूत्रीय सुधार एजेंडा' पेश किया है। 27 मार्च 2026 को शपथ लेने के बाद, बालेन शाह की 'राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी' (RSP) ने यह साफ कर दिया है कि वह केवल सत्ता के लिए नहीं, बल्कि नेपाल के प्रशासनिक ढाँचे को 'क्लीनअप' करने के लिए आई है। यह एजेंडा उस 'जेन-जी' (Gen Z) आंदोलन की उपज है जिसने सितंबर 2025 के हिंसक विरोध प्रदर्शनों के बाद पारंपरिक राजनीति को पूरी तरह नकार दिया था।


धानमंत्री बालेन शाह का यह मास्टरप्लान भ्रष्टाचार के खिलाफ एक खुली जंग है। उन्होंने मंत्रियों और शीर्ष अधिकारियों के लिए 'वीआईपी कल्चर' को खत्म करते हुए सड़क बंद करने (VVIP प्रोटोकॉल) जैसे विशेषाधिकारों को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। इसके अलावा, नेपाल के इतिहास में पहली बार सरकारी सेवाओं को राजनीति से पूरी तरह मुक्त करने के लिए स्कूलों और विश्वविद्यालयों में राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संघों (Student Unions) पर प्रतिबंध लगा दिया गया है। इन संगठनों की जगह 90 दिनों के भीतर गैर-पक्षपाती 'स्टूडेंट काउंसिल' का गठन किया जाएगा। यही नहीं, सरकारी कर्मचारियों और शिक्षकों के भी किसी राजनीतिक दल का सदस्य बनने या ट्रेड यूनियन बनाने पर रोक लगा दी गई है, जिसका उद्देश्य प्रशासन को निष्पक्ष और पेशेवर बनाना है।


कानूनी मोर्चे पर बालेन सरकार ने अभूतपूर्व कड़ाई दिखाई है। सरकार ने एक 'शक्तिशाली संपत्ति जांच समिति' के गठन का निर्णय लिया है, जो 1990 के बाद से सभी नेताओं और उच्च अधिकारियों की अवैध संपत्ति की जांच करेगी। प्रधानमंत्री ने अपने पहले हफ्ते में ही पूर्व प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक जैसे दिग्गजों के खिलाफ आपराधिक लापरवाही के मामलों में शिकंजा कसकर यह संदेश दे दिया है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है। पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए 'Pratipakchya.com' और एक एकीकृत डिजिटल डैशबोर्ड लॉन्च किया गया है, जहाँ नागरिक सरकार के हर वादे की प्रगति को लाइव ट्रैक कर सकते हैं। डिजिटल आईडी और 'गवर्नमेंट कूरियर सर्विस' के जरिए पासपोर्ट और लाइसेंस जैसे दस्तावेज अब सीधे नागरिकों के घर तक पहुँचाने की योजना है।





हालांकि, यह साहसिक कदम बड़ी चुनौतियों से मुक्त नहीं है। पुराने राजनीतिक घरानों और छात्र संगठनों ने बालेन शाह के इन फैसलों को 'लोकतंत्र विरोधी' बताते हुए कड़ा विरोध शुरू कर दिया है। आलोचकों का तर्क है कि यूनियनों पर प्रतिबंध लगाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर प्रहार है। लेकिन, बालेन शाह की सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि उनकी प्राथमिकता 'डिलिवरी-बेस्ड गवर्नेंस' है। स्कूलों में कक्षा 5 तक परीक्षाओं को खत्म करने और विदेशी नामों वाले स्कूलों को नेपाली पहचान अपनाने के निर्देश देना उनके राष्ट्रवादी और मनोवैज्ञानिक सुधारों का हिस्सा है। नेपाल की यह 'युवा लहर' अगर सफल होती है, तो यह न केवल हिमालयी राष्ट्र की तस्वीर बदलेगी, बल्कि पूरे दक्षिण एशिया के लिए सुशासन का एक नया मॉडल पेश करेगी।

Ashiti Joil

Ashiti Joil

यह प्रातःकाल में कंटेंट रायटर अँड एडिटर के पद पर कार्यरत हैं। यह गए 3 सालों से पत्रकारिता और डिजिटल मीडिया में सक्रिय हैं। इन्होंने लोकसत्ता, टाईम महाराष्ट्र, PR और हैट मीडिया में सोशल मीडिया कंटेंट रायटर के तौर पर काम किया है। इन्होंने मराठी साहित्य में मास्टर डिग्री पूर्ण कि है और अभी ये यूनिवर्सिटी के गरवारे इंस्टीट्यूड में PGDMM (Marthi Journalism) कर रही है। यह अब राजकरण, बिजनेस , टेक्नोलॉजी , मनोरंजन और क्रीड़ा इनके समाचार बनती हैं।

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