नेपाल की राजनीति में उभरे नए और प्रभावशाली चेहरे, प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने देश की शिक्षा व्यवस्था में एक ऐतिहासिक और निर्णायक बदलाव की शुरुआत की है। अपने कार्यकाल की शुरुआत में ही उन्होंने ऐसा कदम उठाया है, जिसने वर्षों से चली आ रही छात्र राजनीति की जड़ों को सीधे चुनौती दी है। सरकार ने स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में सक्रिय सभी राजनीतिक दलों से जुड़े छात्र संगठनों पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने की घोषणा कर दी है।

बालेन शाह, जो एक समय काठमांडू के स्वतंत्र मेयर के रूप में लोकप्रिय हुए, अब 2026 के आम चुनावों में अपनी पार्टी की भारी जीत के बाद देश के प्रधानमंत्री बने हैं। एक इंजीनियर और रैपर से राजनेता बने शाह का यह फैसला न केवल शिक्षा क्षेत्र बल्कि पूरे राजनीतिक परिदृश्य में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है।


क्या है पूरा मामला:

सरकार के नए आदेश के तहत सभी राजनीतिक दलों से संबद्ध छात्र संगठनों को निर्धारित समयसीमा के भीतर शैक्षणिक परिसरों को खाली करने का निर्देश दिया गया है। इसके स्थान पर, सरकार 90 दिनों के भीतर “स्टूडेंट काउंसिल” नामक गैर-राजनीतिक निकाय स्थापित करेगी, जो छात्रों की आवाज़ को बिना किसी राजनीतिक प्रभाव के प्रतिनिधित्व देगा। यह निर्णय शिक्षा को “राजनीतिक हस्तक्षेप से मुक्त” करने और अकादमिक गुणवत्ता को सुधारने के व्यापक अभियान का हिस्सा बताया जा रहा है।


सरकार ने केवल छात्र राजनीति पर रोक तक ही अपने कदम सीमित नहीं रखे, बल्कि शिक्षा प्रणाली में कई महत्वपूर्ण बदलावों की भी घोषणा की है:

  • कक्षा 5 तक पारंपरिक परीक्षाओं को समाप्त कर वैकल्पिक और तनावमुक्त मूल्यांकन प्रणाली लागू की जाएगी।
  • शिक्षकों और सरकारी कर्मचारियों के राजनीतिक जुड़ाव पर प्रतिबंध लगाया जाएगा, साथ ही सभी राजनीतिक यूनियनों को समाप्त किया जाएगा।
  • देश की सांस्कृतिक पहचान को बढ़ावा देने के लिए विदेशी नाम वाले शैक्षणिक संस्थानों को नेपाली नाम अपनाने का निर्देश दिया गया है।


नेपाल में छात्र राजनीति लंबे समय से राष्ट्रीय राजनीतिक दलों का एक मजबूत आधार रही है। विश्वविद्यालय परिसरों में राजनीतिक गतिविधियाँ न केवल छात्रों के जीवन को प्रभावित करती रही हैं, बल्कि कई बार शैक्षणिक वातावरण को भी बाधित करती रही हैं। ऐसे में सरकार का यह कदम शिक्षा को निष्पक्ष और केंद्रित बनाने की दिशा में एक बड़ा प्रयास माना जा रहा है।

हालांकि, इस फैसले के विरोध की भी आवाजें उठने लगी हैं। कई छात्र संगठनों ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों पर अंकुश बताते हुए विरोध प्रदर्शन की चेतावनी दी है। इससे आने वाले समय में सरकार और छात्र समूहों के बीच टकराव की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता।


प्रधानमंत्री शाह का उदय 2025 के जन-आंदोलनों के बाद हुए राजनीतिक बदलावों का परिणाम है, जिसने देश की पारंपरिक सत्ता संरचना को हिला दिया था। युवाओं के समर्थन से सत्ता में आए शाह अब प्रशासनिक और संस्थागत सुधारों के जरिए एक नई व्यवस्था स्थापित करने की कोशिश कर रहे हैं। नेपाल में शिक्षा क्षेत्र में किया गया यह व्यापक हस्तक्षेप केवल नीतिगत बदलाव नहीं, बल्कि एक गहरे संरचनात्मक परिवर्तन का संकेत है। आने वाले समय में यह स्पष्ट होगा कि यह निर्णय शिक्षा प्रणाली को नई दिशा देता है या राजनीतिक असंतोष को और बढ़ाता है।

Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

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