मुर्शिदाबाद के बेलदानगा क्षेत्र में ‘बाबरी‑शैली’ मस्जिद की नींव रखते हुए, पूर्व विधायक और निलंबित Trinamool Congress (TMC) नेता हुमायूँ कबीर ने एक बेहद संवेदनशील धार्मिक व राजनीतिक कदम उठाया है। इसके तुरंत बाद उन्होंने फरवरी 2026 में आयोजित होने वाले एक महाकाय आयोजन की घोषणा की जिसमें 1,00,000 (एक लाख) लोगों द्वारा सामूहिक क़ुरान पाठ (Quran Path) करवाया जाएगा, और सभी भक्तों को मांस व चावल का भोजन भी कराया जाएगा।


स्थानीय धार्मिक स्थल पर रखी गई नींव की सामग्री में लाल‑सफेद पत्थर और पारंपरिक इस्लामी नक्काशी से सुसज्जित डिजाइन को “बाबरी‑शैली” बताया गया। यह मस्जिद, पत्रों व बयानों में, ऐतिहासिक बाबरी मस्जिद‑निर्माण की याद दिलाने वाला ढांचा बताकर चर्चित हुई है। कबीर ने अधिकारियों के सामने कहा कि उन्होंने “धर्म और विश्वास के सम्मान” की भावना से यह नींव रखी है जैसा कि अन्य धर्मों में धार्मिक आयोजन होते हैं।


उनके बयान के अनुसार, फरवरी 2026 में आयोजित इस आयोजन में पूरे मुर्शिदाबाद और आसपास के जिलों से हजारों लोग भाग लेंगे। अनुमानित एक लाख पाठकों के लिए पर्याप्त व्यवस्था की जाएगी और अंत में मांस व चावल का भंडारा भी आयोजित किया जाएगा। कबीर ने कहा कि यदि हिन्दुओं द्वारा भक्ति‑कर्मों में अपने धार्मिक ग्रंथों को पढ़ने तथा समारोह आयोजित करने की आज़ादी है, तो मुसलमानों की धार्मिक अभिव्यक्ति को भी समान रूप से महत्व मिलना चाहिए।


इस मस्जिद‑निर्माण व क़ुरआन पाठ की योजना के सार्वजनिक होते ही TMC ने हुमायूँ कबीर को पार्टी से निलंबित कर दिया। पार्टी ने सार्वजनिक बयान में कहा कि ऐसे धार्मिक-राजनीतिक गठजोड़ से “साम्प्रदायिक तनाव” की संभावनाएं बढ़ जाती हैं, और पार्टी नींव सूत्रों व पार्टी लाइन से हटकर काम नहीं करने देगी। अब इस मस्जिद निर्माण व क़ुरान पाठ की कानूनी वैधता, भूमि स्वामित्व, अनुमति और सामूहिक धार्मिक आयोजन के सरकारी नियमों की समीक्षा चर्चित हो रही है।


इस घोषणा ने राजनीतिक दलों, नागरिक समूहों, मीडिया और आम लोगों में तीव्र बहस शुरू कर दी है। आलोचकों का कहना है कि इतने बड़े धार्मिक आयोजन व मस्जिद निर्माण वह भी इतिहास में विवादित ढांचे की याद दिलाते हुए सामाजिक सद्भाव व धार्मिक भेदभाव दोनों के लिए घातक हो सकते हैं। कुछ विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यह आयोजन बड़े पैमाने पर हो गया, तो पश्चिम बंगाल व आस-पास के राज्यों में सामाजिक असहमति, सुरक्षा खतरों, और धार्मिक उत्तरदायित्वों की जिम्मेदारियों में उलझन बढ़ सकती है।


हुमायूँ कबीर के समर्थकों का दावा है कि यह मात्र एक धार्मिक आयोजन है मुसलमानों को आध्यात्मिक अखंडता, सम्मान और पहचान दिलाने वाला। लेकिन विपक्षी दल व सामाजिक संस्था इसे चुनाव‑पूर्व धार्मिक व राजनीतिक संदेश के रूप में देख रही है। अगर यह आयोजन सफल रहा, तो 1,00,000 लोगों की भागीदारी, विशाल भोजन व्यवस्था और मॉक‑मस्जिद सब मिलकर पश्चिम बंगाल के धार्मिक समीकरण बदल सकते हैं। वहीं, असफलता या विरोध से सामाजिक उथल-पुथल और बढ़ सकती है।


बेलदानगा में बाबरी‑शैली मस्जिद की नींव व एक लाख लोगों की क़ुरआन पाठ योजना केवल धार्मिक घटना नहीं है; यह एक ऐसी घटना है जो सामाजिक, राजनीतिक व धार्मिक परतों को छू रही है। हुमायूँ कबीर के इस कदम ने बंगाल और भारत के धर्मनिरपेक्षता, सांप्रदायिक सद्भाव व राजनीतिक उत्तरदायित्व के सवाल फिर से खड़े कर दिए हैं।



Manyaa Chaudhary

Manyaa Chaudhary

यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।

Next Story