पश्चिम बंगाल में बाबरी मस्जिद-स्टाइल मस्जिद का शिलान्यास, राजनीतिक और सांप्रदायिक प्रतिक्रिया
मुरशिदाबाद में निलंबित TMC विधायक हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद शैली की मस्जिद का शिलान्यास किया, जो 6 दिसंबर 1992 के विध्वंस की 33वीं सालगिरह से मेल खाता है। राजनीतिक और सांप्रदायिक बहसें तेज, सुरक्षा और कानूनी पहलू भी चर्चा में।

हुमायूं कबीर मस्जिद शिलान्यास
6 दिसंबर 2025 को मुरशिदाबाद जिले के बेलडंगा/रेजिनगर क्षेत्र में एक ऐतिहासिक और विवादित घटना सामने आई, जब हाल ही में तृणमूल कांग्रेस (TMC) से निलंबित विधायक हुमायूं कबीर ने बाबरी मस्जिद की शैली में एक मस्जिद का शिलान्यास किया। यह कार्यक्रम सुबह से ही धार्मिक नारों और धार्मिक नेताओं की मौजूदगी के साथ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए।
शिलान्यास का यह आयोजन राजनीतिक और सांप्रदायिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों और विभिन्न सामाजिक समूहों ने इसे भड़काऊ करार देते हुए कबीर की मंशा पर सवाल उठाए हैं। उल्लेखनीय है कि इस शिलान्यास की तारीख, 6 दिसंबर, 1992 में बाबरी मस्जिद के विध्वंस की 33वीं सालगिरह के साथ मेल खाती है, जो इसे और अधिक प्रतीकात्मक और संवेदनशील बना देती है।
कार्यक्रम के दौरान स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों ने विशेष सतर्कता बरती। भारी पुलिस, रैपिड एक्शन फोर्स और केंद्रीय बलों की तैनाती की गई थी ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके। सुरक्षा के बावजूद, राजनीतिक और धार्मिक स्तर पर बहस और आलोचना जारी रही।
कानूनी दृष्टि से भी यह मामला चर्चा में रहा। एक जनहित याचिका (PIL) दायर की गई थी, जिसमें इस शिलान्यास को रोकने का अनुरोध किया गया था ताकि सांप्रदायिक तनाव से बचा जा सके। हालांकि, कोलकाता उच्च न्यायालय ने इस मामले में हस्तक्षेप नहीं किया और इसे राज्य सरकार की जिम्मेदारी मानते हुए कानून और व्यवस्था बनाए रखने का निर्देश दिया।
राजनीतिक प्रतिक्रियाओं में, तृणमूल कांग्रेस ने हुमायूं कबीर को पार्टी से निलंबित कर दिया और इस कदम को “सांप्रदायिक राजनीति में संलग्न होने” के रूप में बताया। वहीं, अन्य राजनीतिक दलों और स्थानीय सामाजिक संगठनों ने भी इसे विवादास्पद और असंवेदनशील कार्रवाई करार दिया।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस शिलान्यास को केवल धार्मिक निर्माण की प्रक्रिया तक सीमित नहीं देखा जा सकता। यह घटनाक्रम राजनीतिक संवेदनशीलता, चुनावी रणनीतियों और सांप्रदायिक भावनाओं को भी छू रहा है। आगामी चुनावों को देखते हुए इस मामले का राजनीतिक प्रभाव और अधिक तीव्र होने की संभावना जताई जा रही है।
समग्र रूप से देखा जाए तो मुरशिदाबाद में बाबरी मस्जिद शैली की मस्जिद का शिलान्यास केवल एक निर्माण कार्य नहीं, बल्कि एक संवेदनशील प्रतीक बन गया है, जो भारतीय राजनीति और सामाजिक-सांप्रदायिक समीकरणों में लंबे समय तक चर्चा का विषय बना रहेगा।
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Manyaa Chaudhary
यह 'प्रातःकाल' में एसोसिएट एडिटर के पद पर हैं। और पिछले दो वर्षों से इन्हें रिपोर्टिंग और इवेंट मैनेजमेंट का अनुभव है। इससे पहले इन्होंने 'स्वदेश न्यूज़ चैनल' में बतौर ट्रेनी रिपोर्टर काम किया है। ये विशेष रूप में मनोरंजन, स्पोर्ट्स, और क्राइम रिपोर्टिंग क्षेत्र में समर्थ हैं। अभी यह जर्नलिज्म की पढाई कर रही हैं।
