3 घंटे मदद को तरसा घायल पति; पत्नी का शव बाइक से ले गया गांव
महाराष्ट्र के नागपुर से मध्य प्रदेश जाने वाले हाईवे पर रविवार को एक दिल दहला देने वाली घटना घटी, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। नागपुर निवासी अमित यादव और उनकी पत्नी ज्ञारसी अपने गांव करनपुर (जिला लखनादौन, मध्य प्रदेश) जा रहे थे। रास्ते में देवलापार के पास उनकी बाइक को एक ट्रक ने टक्कर मार दी। इस हाईवे हादसे में ज्ञारसी की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अमित गंभीर रूप से घायल हो गया।
तीन घंटे तक लगाता रहा मदद की गुहार :
अमित यादव ने घायल अवस्था में हाईवे से गुजरने वाले वाहनों को रोकने की कोशिश की। उसने हाथ जोड़कर लोगों से मदद मांगी, लेकिन किसी ने अपनी गाड़ी नहीं रोकी। यहां तक कि हाईवे पर मौजूद मदद के लिए तैनात पुलिस या एंबुलेंस भी मौके पर नहीं पहुंची। तीन घंटे तक अमित सड़क किनारे अपनी पत्नी के शव के पास बै� ा रोता रहा और मदद की आस लगाए रहा, लेकिन मदद नहीं मिली।
बाइक पर बांधी पत्नी की लाश :
जब सारी उम्मीदें टूट गईं, तो मजबूर अमित ने अपनी पत्नी का शव बाइक पर बांधा और 80 किलोमीटर दूर अपने गांव तक ले गया। इस दौरान वह खुद भी घायल था, लेकिन पत्नी के अंतिम संस्कार के लिए उसे यह कदम उ� ाना पड़ा। यह दृश्य इतना दर्दनाक था कि जिसने भी सुना, उसकी आंखें नम हो गईं।
नितिन गडकरी के गृहनगर में घटना :
यह दर्दनाक हाईवे हादसा नागपुर के देवलापार इलाके में हुआ, जो केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी का गृहनगर और चुनाव क्षेत्र है। इस घटना ने वहां की पुलिस और एंबुलेंस व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिन व्यवस्थाओं का दावा सरकार और प्रशासन लंबे समय से कर रहे हैं, वे इस घटना के दौरान पूरी तरह नाकाम साबित हुईं।
गांव लौटकर किया अंतिम संस्कार :
अमित यादव मूल रूप से मध्य प्रदेश के लखनादौन स्थित करनपुर गांव का रहने वाला है। वह नागपुर में रहकर काम करता था। हादसे के दिन वह अपनी पत्नी के साथ गांव लौट रहा था। घटना के बाद, घायल अवस्था में ही वह पत्नी का शव लेकर गांव पहुंचा और अंतिम संस्कार किया।
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लोगों में आक्रोश और सवाल :
इस हाईवे हादसे ने स्थानीय लोगों और सोशल मीडिया पर बड़ा आक्रोश पैदा कर दिया है। लोग पूछ रहे हैं कि हाईवे पर करोड़ों रुपये की लागत से बनाई गई इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम, एंबुलेंस और पेट्रोलिंग टीमें कहां थीं? क्या सरकार केवल कागजों में ही व्यवस्थाएं कर रही है?
मानवता पर सवाल :
यह घटना सिर्फ प्रशासनिक नाकामी ही नहीं, बल्कि मानवता के गिरते स्तर का भी उदाहरण है। तीन घंटे तक कोई मदद के लिए नहीं रुका, यह सोचने पर मजबूर करता है कि क्या हम संवेदनशील समाज में रह रहे हैं या फिर सिर्फ अपनी दुनिया में खोए हुए हैं।
Editorial

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