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मोदी कैबिनेट का मेगा पैकेज; मेट्रो, चिप फैक्ट्री और पावर प्रोजेक्ट को हरी झंडी
By EditorialPublished on
केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और तकनीकी विकास को गति देने वाले कई बड़े फैसले लिए गए. बैठक में उड़ीसा, पंजाब और आंध्र प्रदेश में चार नए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई, जिससे इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा. इसके साथ ही लखनऊ मेट्रो के विस्तार के लिए 5,801 करोड़ रुपये के निवेश को भी हरी झंडी दी गई.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुआई में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में मंगलवार को कई बड़े फैसले लिए गए, जिनका सीधा असर देश के इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी सेक्टर पर पड़ेगा। बैठक में उड़ीसा, पंजाब और आंध्र प्रदेश में चार नए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट लगाने को मंजूरी दी गई, जिन पर कुल 4,594 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके अलावा लखनऊ मेट्रो के फेस 1B और अरुणाचल प्रदेश में 700 मेगावॉट क्षमता वाले ताटो-II हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को भी हरी झंडी दी गई है।
चार नए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट को मंजूरी :
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि देश में पहले ही छह सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है, और आज इसमें चार नई परियोजनाएं जुड़ गई हैं। ये प्रोजेक्ट उड़ीसा, आंध्र प्रदेश और पंजाब में लगाए जाएंगे। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से भारत ग्लोबल सेमीकंडक्टर मार्केट में एक मजबूत खिलाड़ी के रूप में उभरेगा।
सरकार के मुताबिक, 2023 में भारत का सेमीकंडक्टर बाजार लगभग 38 अरब डॉलर का था और यह 2024-25 तक बढ़कर 45 से 50 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। ग्लोबल पार्टनरशिप, नीतिगत सहयोग और घरेलू मैन्युफैक्चरिंग में बढ़ोतरी के साथ भारत का चिप इकोसिस्टम तेजी से विकसित हो रहा है।
लखनऊ मेट्रो फेस 1B को मंजूरी :
बैठक में लखनऊ मेट्रो के फेस 1B को भी मंजूरी दी गई है, जिसके लिए 5,801 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा। लखनऊ, उत्तर प्रदेश का एक बड़ा और तेजी से विकसित हो रहा शहर है, जहां मेट्रो सेवाओं की बढ़ती जरूरत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। सरकार का मानना है कि इस प्रोजेक्ट से शहर में ट्रैफिक दबाव कम होगा और पब्लिक ट्रांसपोर्ट को मजबूती मिलेगी।
ताटो-II हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट पर 8,146 करोड़ का निवेश :
बैठक में 700 मेगावॉट क्षमता वाले ताटो-II हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्रोजेक्ट को मंजूरी दी गई है, जिस पर 8,146 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह प्रोजेक्ट अरुणाचल प्रदेश में विकसित किया जाएगा और स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन में देश को नई दिशा देगा। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारत स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।
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सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट से भारत को फायदा :
विशेषज्ञों के अनुसार, नए सेमीकंडक्टर प्रोजेक्ट भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स और टेक्नोलॉजी सेक्टर के लिए गेमचेंजर साबित हो सकते हैं। इन परियोजनाओं से न केवल घरेलू मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। साथ ही, भारत ग्लोबल सप्लाई चेन में अपनी हिस्सेदारी मजबूत कर सकेगा।
सरकार का कहना है कि देश के विभिन्न हिस्सों में बड़े पैमाने पर निवेश की घोषणाएं हो रही हैं, जो आने वाले वर्षों में भारत को तकनीकी महाशक्ति बनाने में मदद करेंगी।

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