SIR में गड़बड़ी; सुप्रीम कोर्ट ने लगाई चुनाव आयोग को फटकार
बिहार में मतदाता सूची विवाद लगातार गहराता जा रहा है। मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर दाखिल याचिकाओं पर मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई की। इस दौरान सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि एसआईआर की पहली ड्राफ्ट लिस्ट में 12 ऐसे लोगों को मृत घोषित कर दिया गया है, जो वास्तव में जीवित हैं। यह गंभीर गड़बड़ी मतदाता सूची विवाद को और गहरा कर रही है।
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या की बेंच ने इस मुद्दे पर विस्तार से सुनवाई की। कपिल सिब्बल ने दावा किया कि ड्राफ्ट लिस्ट में भारी पैमाने पर त्रुटियां हैं और 65 लाख लोगों को सूची से बाहर रखा गया है। उन्होंने कहा कि यह केवल कुछ बूथों की समस्या नहीं है, बल्कि पूरे राज्य में गड़बड़ी है।
चुनाव आयोग का जवाब - अंतिम सूची में सुधार होगा :
चुनाव आयोग की ओर से पेश वकील राकेश द्विवेदी ने कहा कि इतनी बड़ी प्रक्रिया में छोटी गलतियां हो सकती हैं, लेकिन अंतिम लिस्ट जारी होने से पहले सभी त्रुटियां सुधार दी जाएंगी। उन्होंने कहा कि कई नई याचिकाएं भी दायर हुई हैं, जिनका जवाब अभी बाकी है।
सुप्रीम कोर्ट का सवाल - पीड़ितों की लिस्ट दें :
कपिल सिब्बल की दलील सुनने के बाद सुप्रीम कोर्ट ने पूछा कि जिन लोगों को गलत तरीके से मृत घोषित किया गया है, उनकी लिस्ट दी जाए। अदालत ने कहा कि अगर कोई जीवित व्यक्ति मृत घोषित किया गया है तो हम चुनाव आयोग से इसका जवाब मांगेंगे।
सिब्बल ने तर्क दिया कि इतनी बड़ी गड़बड़ी में हर पीड़ित का पता लगाना संभव नहीं है, लेकिन इस तरह से मतदाता सूची से नाम हटाना गलत है। इस पर जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि आप तो एसआईआर की शुरुआत पर ही सवाल उठा रहे हैं।
65 लाख नाम बाहर, बहस गरमाई :
एडवोकेट गोपाल शंकरनारायण ने कोर्ट को याद दिलाया कि पहले अदालत ने कहा था कि अगर बड़ी संख्या में लोगों को सूची से हटाया गया तो दखल दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस बार 65 लाख लोग बाहर हैं, जो मतदाता सूची विवाद की गंभीरता को दिखाता है।
आधार कार्ड पर बहस :
कपिल सिब्बल ने कहा कि किसी का नागरिक और क्षेत्र का निवासी होना पर्याप्त है और इसके लिए आधार कार्ड में दर्ज जानकारी नियमों के अनुसार मान्य है। उन्होंने कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया इतनी मनमानी नहीं हो सकती।
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अगली सुनवाई में होगी विस्तृत बहस :
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सभी पक्षों की दलीलें सुनकर ही इस मतदाता सूची विवाद पर फैसला लिया जाएगा। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर सुनवाई के लिए अतिरिक्त समय दिया जाएगा। बिहार में जारी यह मामला अब राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बन गया है और आने वाले दिनों में यह राजनीति और चुनाव प्रक्रिया दोनों के लिए बड़ा मुद्दा साबित हो सकता है।
Editorial

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