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साल का सबसे बड़ा आईटी क्रैश; 25% की गिरावट
By EditorialPublished on
आईटी सेक्टर में सुस्ती के संकेत साफ नजर आ रहे हैं। प्रमुख आईटी कंपनियों का पीई (प्राइस-टू-अर्निंग) रेशियो दिसंबर 2023 के 25.5 गुना से गिरकर अब सिर्फ 22.3 गुना रह गया है। इस गिरावट के साथ ही मार्केट कैप में भी तेज कमी आई है, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा है।

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शेयर बाजार में इस साल आईटी सेक्टर सबसे बड़े नुकसान का सामना कर रहा है। बीएसई पर सूचीबद्ध देश की पांच सबसे बड़ी आईटी कंपनियों के शेयर पिछले सात महीनों में करीब 25 प्रतिशत तक लुढ़क चुके हैं। यह पिछले पांच वर्षों में इन कंपनियों का सबसे खराब प्रदर्शन है। आईटी कंपनियों के शेयर में आई इस गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
क्यों गिरे आईटी कंपनियों के शेयर ?
विश्लेषकों के अनुसार, इस गिरावट की मुख्य वजह कंपनियों की कमाई में कमी और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (Artificial Intelligence) से उत्पन्न प्रतिस्पर्धा है। पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग घटने के साथ-साथ वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और अमेरिकी ट्रेड टैरिफ नीतियों ने भी असर डाला है।
देश की शीर्ष पांच आईटी कंपनियों इंफोसिस, विप्रो, टीसीएस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक्नोलॉजिज का कुल बाजार पूंजीकरण (मार्केट कैप) शुक्रवार को घटकर 24.86 ट्रिलियन रुपये रह गया, जो पिछले साल दिसंबर में 32.67 ट्रिलियन रुपये था।
पीई रेशियो में गिरावट :
आईटी कंपनियों के शेयर के कमजोर प्रदर्शन के साथ उनका पीई (प्राइस-टू-अर्निंग) रेशियो भी घटा है। दिसंबर 2023 में शीर्ष पांच आईटी कंपनियों का ट्रेलिंग पीई 25.5 गुना था, जो अब केवल 22.3 गुना रह गया है। 2021 के दिसंबर में यह रिकॉर्ड 36 गुना पर पहुंच गया था।
किसे हुआ सबसे ज्यादा नुकसान ?
- टीसीएस: 26% गिरावट, मार्केट कैप में सबसे बड़ी कमी
- एचसीएल टेक्नोलॉजिज: 23.1% की गिरावट
- इंफोसिस: 24.3% की गिरावट
- विप्रो: 20.7% की गिरावट
- टेक महिंद्रा: 13.2% की गिरावट
गिरावट के प्रमुख कारण :
- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की चुनौती और पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग में संभावित कमी
- कमजोर तिमाही नतीजे
- अमेरिकी ट्रेड टैरिफ नीतियां और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता
- टीसीएस द्वारा बड़े पैमाने पर छंटनी की घोषणा, जिससे निवेशकों का भरोसा कमजोर हुआ
आगे का परिदृश्य :
विशेषज्ञों का मानना है कि आईटी कंपनियों के शेयर में फिलहाल स्थिरता आने में समय लग सकता है। कंपनियों को नई तकनीकों, विशेषकर एआई, में तेजी से निवेश करना होगा ताकि वे प्रतिस्पर्धा में बने रह सकें। साथ ही, वैश्विक मांग में सुधार और अमेरिकी नीतियों में स्थिरता भी इन शेयरों को सहारा दे सकती है।
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फिलहाल निवेशकों को सतर्कता बरतने और दीर्घकालिक रणनीति के साथ निवेश बनाए रखने की सलाह दी जा रही है। बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, मौजूदा स्तर पर कुछ आईटी स्टॉक्स वैल्यूएशन के लिहाज से आकर्षक हो सकते हैं, लेकिन जोखिम को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
इस साल का प्रदर्शन साफ दिखाता है कि आईटी कंपनियों के शेयर ग्लोबल ट्रेंड्स, तकनीकी बदलाव और आर्थिक नीतियों से गहरे प्रभावित होते हैं। आने वाले महीनों में इन कारकों पर करीबी नजर रखना निवेशकों के लिए बेहद जरूरी होगा।

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